Monday, February 9

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Su-57 और S-400 को लेकर भारत की बड़ी चिंता खत्म, रूस ने स्वदेशी माइक्रोचिप्स पर किया बड़ा ऐलान
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Su-57 और S-400 को लेकर भारत की बड़ी चिंता खत्म, रूस ने स्वदेशी माइक्रोचिप्स पर किया बड़ा ऐलान

भारत की वायु रक्षा और लड़ाकू विमान क्षमताओं से जुड़ी एक बड़ी रणनीतिक चिंता अब समाप्त होती नजर आ रही है। रूस ने घोषणा की है कि वह S-400 एयर डिफेंस सिस्टम और पांचवीं पीढ़ी के Su-57 लड़ाकू विमान में इस्तेमाल होने वाली अत्याधुनिक माइक्रोवेव माइक्रोचिप्स का घरेलू स्तर पर बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू करने जा रहा है। इस कदम से इन सैन्य प्लेटफॉर्म्स में चीनी चिप्स के इस्तेमाल और उससे जुड़ी साइबर जासूसी की आशंकाओं पर विराम लगने की उम्मीद है। रूस के स्वेर्दलोव्स्क ओब्लास्ट प्रांत के गवर्नर डेनिस पासलर ने बताया कि एक रूसी कंपनी ने देश की पहली ऐसी फैक्ट्री का डिजाइन और निर्माण शुरू कर दिया है, जहां माइक्रोवेव माइक्रोचिप्स का पूरे तकनीकी चक्र के साथ सीरियल प्रोडक्शन किया जाएगा। यह उत्पादन 2027 के अंत तक शुरू होने की संभावना है। भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला भारत वर्तमान में रूस से मिले S-400 एयर ...
इंडिया–ईयू ट्रेड डील से अमेरिका में बेचैनी, कनाडाई विशेषज्ञ का दावा—दिल्ली से समझौते पर इसलिए नरम पड़े ट्रंप
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इंडिया–ईयू ट्रेड डील से अमेरिका में बेचैनी, कनाडाई विशेषज्ञ का दावा—दिल्ली से समझौते पर इसलिए नरम पड़े ट्रंप

भारत को लेकर लंबे समय से सख्त रुख अपनाए हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अचानक बदले तेवरों के पीछे अब एक बड़ी वजह सामने आई है। कनाडा के वरिष्ठ ट्रेड विश्लेषक जैक्स शोर का कहना है कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुई ऐतिहासिक ट्रेड डील ने अमेरिका को पीछे छूट जाने का डर दिखा दिया, जिसके चलते ट्रंप प्रशासन को दिल्ली के साथ जल्दबाजी में समझौता करना पड़ा। सोमवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने न केवल भारत के साथ ट्रेड डील की घोषणा की, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ भी की। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। भारत-ईयू समझौते से अमेरिका पर दबाव एक इंटरव्यू में जैक्स शोर ने कहा कि भारत-ईयू ट्रेड डील के बाद अमेरिका को यह एहसास हुआ कि यदि उसने तेजी से कदम नहीं उठाया, तो वह दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों से बा...
भारत-पाक और अफगानिस्तान विवाद में मध्यस्थ नहीं बनेगा रूस, शरीफ सरकार को कड़ा संदेश भारत-पाक और अफगानिस्तान विवाद में मध्यस्थ नहीं बनेगा रूस, शरीफ सरकार को कड़ा संदेश
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भारत-पाक और अफगानिस्तान विवाद में मध्यस्थ नहीं बनेगा रूस, शरीफ सरकार को कड़ा संदेश भारत-पाक और अफगानिस्तान विवाद में मध्यस्थ नहीं बनेगा रूस, शरीफ सरकार को कड़ा संदेश

रूस ने भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से जुड़े क्षेत्रीय विवादों पर अपना रुख बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है। मॉस्को ने दो-टूक शब्दों में कहा है कि वह भारत-पाकिस्तान या अफगानिस्तान-पाकिस्तान के बीच किसी भी तरह की मध्यस्थता की भूमिका नहीं निभा रहा है। रूस ने जोर देकर कहा कि दिल्ली और इस्लामाबाद को अपने आपसी मतभेद शिमला समझौते और लाहौर घोषणापत्र के तहत द्विपक्षीय स्तर पर ही सुलझाने चाहिए। रूसी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यदि संबंधित पक्ष औपचारिक रूप से अनुरोध करते हैं तो रूस किसी समाधान में मदद के लिए तैयार रहेगा, लेकिन फिलहाल ऐसी कोई प्रक्रिया या पहल नहीं चल रही है। लावरोव से सवाल, मंत्रालय ने दिया साफ जवाब रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव में रूस की भूमिका को लेकर सवाल पूछे गए थे। इसके जवाब में विदेश मंत्रालय ने कहा,“र...
भारत से ट्रेड डील को अमेरिका ने बताया रणनीतिक हथियार, चीन पर लगाम और रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने की उम्मीद
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भारत से ट्रेड डील को अमेरिका ने बताया रणनीतिक हथियार, चीन पर लगाम और रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने की उम्मीद

भारत और अमेरिका के बीच हुई नई व्यापार डील को अब सिर्फ आर्थिक समझौता नहीं, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति का अहम मोड़ माना जा रहा है। अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति के रिपब्लिकन चेयरमैन और वरिष्ठ सांसद जिम रिश ने इस डील को चीन और रूस जैसे अमेरिकी विरोधियों को घेरने का प्रभावी माध्यम बताया है। उन्होंने कहा है कि भारत के साथ मजबूत आर्थिक साझेदारी से न सिर्फ चीन को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में काबू किया जा सकेगा, बल्कि रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की दिशा में भी मदद मिल सकती है। सोमवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बातचीत के बाद भारत-अमेरिका ट्रेड डील की घोषणा की गई थी, जिसके तहत भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। ट्रंप की तारीफ, भारत को बताया अहम साझेदार जिम रिश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि भारत के साथ ट्रेड एग्रीमेंट ...
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भारत-अमेरिका ट्रेड डील: टैरिफ घटाने को क्यों मजबूर हुआ अमेरिका, विशेषज्ञों ने बताया भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत

भारत और अमेरिका के बीच घोषित नई ट्रेड डील को वैश्विक स्तर पर भारत की बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक सफलता माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले अमेरिकी टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला अमेरिका के लिए रणनीतिक मजबूरी और भारत के लिए सही समय पर बनाए गए प्रभावी दबाव का नतीजा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई बातचीत के बाद इस समझौते पर सहमति बनी। दुनिया भर में इस डील पर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं और अधिकांश विश्लेषक इसे भारत की स्पष्ट जीत बता रहे हैं। विशेषज्ञों की नजर में भारत की सफलता अमेरिकी लेखक और वरिष्ठ पत्रकार सदानंद धुमे ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि जिनकी तारीफ बनती है, उनकी तारीफ होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दंडात्मक अमेरिकी टैरिफ को हटाने के लिए सफल बातचीत करना ...
भारत-अमेरिका टैरिफ समझौते से पाकिस्तान में हलचल, शहबाज सरकार पर सोशल मीडिया में तंज
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भारत-अमेरिका टैरिफ समझौते से पाकिस्तान में हलचल, शहबाज सरकार पर सोशल मीडिया में तंज

भारत और अमेरिका के बीच हुए नए व्यापार समझौते ने न सिर्फ दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई दिशा दी है, बल्कि पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज कर दी है। अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है, जबकि पाकिस्तान पर 19 प्रतिशत टैरिफ बरकरार रखा गया है। इस फैसले के बाद पाकिस्तान में शहबाज शरीफ सरकार को सोशल मीडिया पर तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई बातचीत के बाद इस समझौते की घोषणा की गई। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि राष्ट्रपति ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी को अपना “बहुत अच्छा मित्र” मानते हैं। इस बयान के बाद पाकिस्तान में राजनीतिक विश्लेषकों और आम लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। पाकिस्तान में उठे सवाल प...
CPEC पर मंडराया बड़ा खतरा: पाकिस्तान में डूब सकता है 62 अरब डॉलर का चीनी निवेश, इटली की रिपोर्ट से बीजिंग में हड़कंप
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CPEC पर मंडराया बड़ा खतरा: पाकिस्तान में डूब सकता है 62 अरब डॉलर का चीनी निवेश, इटली की रिपोर्ट से बीजिंग में हड़कंप

पाकिस्तान में गहराती राजनीतिक अस्थिरता, बढ़ता उग्रवाद और खराब होती सुरक्षा व्यवस्था अब चीन की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना चीन–पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के भविष्य पर भारी पड़ती नजर आ रही है। इटली के प्रतिष्ठित थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल पॉलिटिकल स्टडीज (ISPI) की ताजा रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि हालात ऐसे ही बने रहे, तो पाकिस्तान में चीन का 62 अरब डॉलर से अधिक का निवेश गंभीर संकट में पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में हालात इतने अस्थिर हो चुके हैं कि चीनी अधिकारियों और इंजीनियरों की सुरक्षित आवाजाही तक सवालों के घेरे में है। यदि बीजिंग को अपने नागरिकों और परियोजनाओं की सुरक्षा का भरोसा नहीं मिला, तो चीन को इस्लामाबाद के साथ अपने रणनीतिक जुड़ाव पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है। चीन की रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं को झटका आईएसपीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि अफगानिस...
खुजदार में भीषण संघर्ष: क्या पाकिस्तानी परमाणु ठिकाने तक पहुंच गए बलूच विद्रोही? सेना के हाथ-पांव फूले
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खुजदार में भीषण संघर्ष: क्या पाकिस्तानी परमाणु ठिकाने तक पहुंच गए बलूच विद्रोही? सेना के हाथ-पांव फूले

पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में हालात एक बार फिर विस्फोटक होते नजर आ रहे हैं। खुजदार जिले में पाकिस्तानी सेना और बलूच विद्रोहियों के बीच भीषण संघर्ष की खबरें सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में बलूच सशस्त्र समूहों ने यहां स्थित पाकिस्तानी सैन्य ठिकाने पर हमला किया है। चूंकि खुजदार में सेना का बड़ा कैंटोनमेंट मौजूद है, इसलिए इस हमले को रणनीतिक रूप से बेहद गंभीर माना जा रहा है। कुछ सोशल मीडिया रिपोर्टों और विश्लेषकों के दावों के मुताबिक, खुजदार क्षेत्र में पाकिस्तान की परमाणु मिसाइलों या संवेदनशील सैन्य ढांचे की तैनाती भी हो सकती है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि यह सही साबित होता है तो यह पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा झटका माना जाएगा। रणनीतिक खुजदार में जारी झड़पें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक हैंडल ने दावा किया कि खुजदा...
मोदी से बातचीत, इंडिया गेट की तस्वीर और मैगजीन वाला पोस्ट: ट्रंप को अचानक क्यों आई भारत की याद?
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मोदी से बातचीत, इंडिया गेट की तस्वीर और मैगजीन वाला पोस्ट: ट्रंप को अचानक क्यों आई भारत की याद?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत को लेकर लगातार किए जा रहे सोशल मीडिया पोस्ट और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई फोन बातचीत ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। पहले ट्रंप ने पीएम मोदी के साथ इंडिया टुडे मैगजीन के कवर पेज की तस्वीर साझा की, फिर इंडिया गेट की फोटो पोस्ट कर उसे “भारत का खूबसूरत विजय द्वार” बताया। इसी बीच भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने पुष्टि की कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच बातचीत हुई है। इन घटनाओं के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आखिर ट्रंप को अचानक भारत की याद क्यों आई और दोनों नेताओं के बीच किन अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। दूसरे कार्यकाल में रिश्तों में बढ़ा था तनाव डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भारत-अमेरिका संबंधों में पहले जैसी गर्मजोशी नहीं दिखी। ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया, वहीं पा...
इंडिया गेट की तस्वीर के साथ ट्रंप का पोस्ट: क्या विजय स्मारक के बहाने संदेश देना चाहते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति?
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इंडिया गेट की तस्वीर के साथ ट्रंप का पोस्ट: क्या विजय स्मारक के बहाने संदेश देना चाहते हैं अमेरिकी राष्ट्रपति?

वॉशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इंडिया गेट की तस्वीर साझा किए जाने से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में इंडिया गेट को “भारत का खूबसूरत विजय द्वार” बताते हुए लिखा— “हमारा वाला उन सबमें सबसे महान होगा।” ट्रंप के इस बयान ने अटकलों को जन्म दे दिया है कि वह वॉशिंगटन डीसी में भी किसी भव्य विजय स्मारक के निर्माण की योजना बना रहे हैं। हालांकि ट्रंप ने अपने पोस्ट में किसी योजना का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान उनके नेतृत्व, सैन्य शक्ति और वैश्विक प्रभाव को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है। क्यों इंडिया गेट पर गई ट्रंप की नजर माना जा रहा है कि राष्ट्रपति के दूसरे कार्यकाल में ट्रंप अपने कार्यों को ऐतिहासिक रूप देने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। उन्हों...