Saturday, January 10

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असम CM हिमंता बिस्वा सरमा का बड़ा बयान: अगली जनगणना में बांग्लादेशी मुस्लिम आबादी बढ़कर 40% तक पहुंच सकती है
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असम CM हिमंता बिस्वा सरमा का बड़ा बयान: अगली जनगणना में बांग्लादेशी मुस्लिम आबादी बढ़कर 40% तक पहुंच सकती है

  गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य में मुस्लिम आबादी और जनगणना को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आगामी जनगणना असम के लिए चिंता का विषय साबित होगी, क्योंकि इसमें बांग्लादेशी मूल के मुसलमानों की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।   सरमा ने यह भी कहा कि संदिग्ध लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने सभी विधायकों और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को चिन्हित करें और उचित प्रक्रिया के माध्यम से शिकायत दर्ज कराएं। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि योग्य लोगों के नाम हटाने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है।   जनगणना और डेमोग्राफिक बदलाव: सरमा ने बताया कि 2011 की जनगणना में असम की कुल 3.12 करोड़ आबादी में से 1.07 करोड़ मुसलमान (34.22%) और 1.92 करोड़ हिंदू (61.47%)...
चुनाव से पहले असम सरकार का बड़ा दांव  एमएमयूए योजना को मिली रफ्तार, 40 लाख महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य
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चुनाव से पहले असम सरकार का बड़ा दांव एमएमयूए योजना को मिली रफ्तार, 40 लाख महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य

  गुवाहाटी। विधानसभा चुनावों से पहले असम की भाजपा सरकार ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता अभियान (एमएमयूए) को तेज कर दिया है। राज्य के सभी 35 जिलों में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी महिलाओं को 10 हजार रुपये की शुरुआती पूंजी उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार का लक्ष्य इस योजना के माध्यम से 40 लाख महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।   मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि एक अप्रैल 2025 से शुरू की गई इस योजना के तहत अब तक 15 लाख से अधिक महिलाओं को 10 हजार रुपये की प्रारंभिक सहायता दी जा चुकी है। पहले बजट में योजना का लक्ष्य 32 लाख महिलाओं तक सीमित था, जिसे बढ़ाकर 40 लाख कर दिया गया है।   8 लाख महिलाएं बन चुकी हैं ‘लखपति दीदी’   सरकारी आंकड़ों के अनुसार, एमएमयूए योजना के तहत अब तक करीब 8 लाख महिलाएं ‘लखपति ...
असम में प्रियंका गांधी बनाम अमित शाह: कांग्रेस ने मोर्चा संभाला, चुनावी जंग होगी हाईवोल्टेज
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असम में प्रियंका गांधी बनाम अमित शाह: कांग्रेस ने मोर्चा संभाला, चुनावी जंग होगी हाईवोल्टेज

    गुवाहाटी (असम): पूर्वोत्तर के राज्य असम में कांग्रेस ने सत्ता की वापसी के लिए बड़ा दांव खेला है। पार्टी ने प्रियंका गांधी को असम के विधानसभा चुनाव मोर्चे की जिम्मेदारी सौंपी है। यह पहला मौका है जब किसी राज्य की चुनावी रणनीति की कमान सीधे उनके हाथों में होगी।   केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद ऐसा पहली बार होगा जब बीजेपी के रणनीतिकार और गृह मंत्री अमित शाह का सीधे मुकाबला प्रियंका गांधी से होगा। बीजेपी की ओर से मौजूदा मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा चुनाव मैदान में उतरेंगे, जबकि कांग्रेस ने गौरव गोगोई को उम्मीदवार बनाया है।   प्रियंका गांधी की नियुक्ति के साथ ही कांग्रेस ने असम को राष्ट्रीय राजनीति में फिर से चर्चा का केंद्र बना दिया है। उन्होंने स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्षता संभाली है, जिसमें महाराष्ट्र के यशोमति ठाकुर, इमरान मसूद, सप्तगिरी शंकर उलाका और डॉ....
असम में प्रियंका गांधी की एंट्री से पहले हिमंता बिस्वा सरमा का बड़ा दावा: NDA को 103 सीटें मिलने का अनुमान
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असम में प्रियंका गांधी की एंट्री से पहले हिमंता बिस्वा सरमा का बड़ा दावा: NDA को 103 सीटें मिलने का अनुमान

    गुवाहाटी। असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए कांग्रेस पार्टी ने प्रियंका गांधी वाड्रा को स्क्रीनिंग कमेटी का चेयरपर्सन नियुक्त किया है। प्रियंका गांधी की असम में एंट्री से पहले राज्य के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बीजेपी और एनडीए के पक्ष में बड़ी जीत का दावा किया है।   मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि मार्च-अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनावों में बीजेपी और उसके सहयोगी एनडीए 126 में से 103 सीटें जीत सकते हैं। उन्होंने बताया कि पहले यह अनुमान लगभग 90 सीटों का था, लेकिन हाल ही में सीटों के परिसीमन के बाद यह संख्या 13-15 सीटें बढ़ गई है।   असम में बीजेपी तीन क्षेत्रीय पार्टियों के साथ गठबंधन में है—असम गण परिषद (AGP), यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिबरल (UPPL) और बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट (BPF)। वहीं कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को मोर्चे पर लगाकर बीजेपी को चुनौती देने की रणनीति...
असम में मिया मुस्लिम आरक्षण की मांग से सियासी घमासान, कांग्रेस घिरी, बीजेपी ने बोला तीखा हमला
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असम में मिया मुस्लिम आरक्षण की मांग से सियासी घमासान, कांग्रेस घिरी, बीजेपी ने बोला तीखा हमला

    गुवाहाटी। असम में मिया मुस्लिम समुदाय के लिए विधानसभा सीटों में आरक्षण की मांग को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस से जुड़े एक नेता द्वारा 126 सदस्यीय विधानसभा में 48 सीटें मिया मुस्लिमों के लिए आरक्षित करने की मांग सामने आने के बाद सत्तारूढ़ भाजपा ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। भाजपा ने इसे स्वदेशी समुदायों के हितों के खिलाफ बताते हुए कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।   असम प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता कमल कुमार मेधी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह मांग राज्य की सामाजिक संरचना और स्वदेशी पहचान को कमजोर करने का प्रयास है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस तरह की मांगों के जरिए तुष्टिकरण की राजनीति को बढ़ावा दे रही है और खतरनाक वैचारिक दिशा में आगे बढ़ रही है।   भाजपा प्रवक्ता के अनुसार, यह विवाद कांग्रेस के प्रवक्ता एवं एनएसयूआई के राष्ट्रीय सचिव मोहसिन...
असम सीएम हिमंता बिस्व सरमा का दावा: चाहे 1 लाख दें, मुसलमान वोट नहीं देंगे
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असम सीएम हिमंता बिस्व सरमा का दावा: चाहे 1 लाख दें, मुसलमान वोट नहीं देंगे

गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने मंगलवार को कहा कि असम में मुसलमानों की आबादी तेजी से बढ़ रही है और इस समुदाय के मतदाता किसी भी वित्तीय प्रोत्साहन के बावजूद उन्हें वोट नहीं देंगे। उन्होंने यह टिप्पणी बिहार में महिलाओं को 10,000 रुपये देने वाली योजना के संदर्भ में की थी। सीएम हिमंता ने कहा, "चाहे मैं 10 हजार रुपये दूँ या 1 लाख रुपये, कोई भी मुसलमान मुझे वोट नहीं देगा। असम के चुनाव में मतदान सरकारी योजनाओं या वित्तीय लाभ से नहीं, बल्कि विचारधारा और पहचान से प्रभावित होता है।" उन्होंने आगे कहा कि असम में मूल आबादी जनसांख्यिकीय दबाव के कारण अस्तित्व के संकट का सामना कर रही है। उन्होंने अनुमान लगाया कि वर्ष 2021 में मुस्लिम आबादी लगभग 38 प्रतिशत थी, जो लगातार वृद्धि के बाद 2027 तक 40 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। अगर यह 50 प्रतिशत से ऊपर चली गई तो अन्य समुदायों के अस्तित्व पर...
असम हिंसा की सच्चाई 41 साल बाद खुली: कांग्रेस ने दबाई थी तिवारी आयोग की रिपोर्ट
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असम हिंसा की सच्चाई 41 साल बाद खुली: कांग्रेस ने दबाई थी तिवारी आयोग की रिपोर्ट

गुवाहाटी। असम में जमीन और पहचान को लेकर बनाई गई एक विवादित रिपोर्ट 41 साल बाद सार्वजनिक हुई। यह रिपोर्ट त्रिभुवन प्रसाद तिवारी आयोग द्वारा जनवरी-अप्रैल 1983 में तैयार की गई थी और तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इसे दबाकर रखा था। रिपोर्ट में 1983 के नेल्ली नरसंहार और अन्य उपद्रवों की वास्तविक वजहों का खुलासा किया गया है। तिवारी आयोग की रिपोर्ट: क्या है सच? आयोग ने अवैध आव्रजन, भूमि कब्जा और असमिया पहचान को लेकर कई महत्वपूर्ण सिफारिशें कीं। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि 1983 के दंगे किसी एक धर्म, जाति या भाषाई समूह के खिलाफ नहीं थे। हिंसा का खामियाजा समाज के सभी वर्गों ने भुगता। भूमि विवाद और आर्थिक हित टकराव इन दंगों के प्रमुख कारण थे। अवैध अप्रवासियों द्वारा भूमि पर कब्जा असमिया लोगों के लिए सबसे बड़ी समस्या थी। पूर्व न्यायाधीश तिवारी ने यह भी लिखा कि 1979 के बाद अतिक्रमण क...
3000 मौतों का गुनाहगार कौन? 42 साल बाद खुलीं नेल्ली नरसंहार की दो रिपोर्टें, असम में कांग्रेस घिरी
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3000 मौतों का गुनाहगार कौन? 42 साल बाद खुलीं नेल्ली नरसंहार की दो रिपोर्टें, असम में कांग्रेस घिरी

असम की हिमंत बिस्व सरमा सरकार ने राज्य विधानसभा में नेल्ली नरसंहार से जुड़ी दो अहम जांच रिपोर्टों को सार्वजनिक कर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। 1983 के विधानसभा चुनावों के दौरान हुए इस भयावह नरसंहार में सरकारी आंकड़ों के अनुसार 1,800 लोग मारे गए थे, जबकि गैर-सरकारी रिपोर्टों में यह संख्या 3,000 तक बताई गई। मरने वालों में अधिकांश बंगाली भाषी मुसलमान थे। सरकार द्वारा पेश की गई टी.पी. तिवारी आयोग और जस्टिस टी.यू. मेहता आयोग की रिपोर्टों के निष्कर्ष एक-दूसरे के विपरीत हैं। तिवारी आयोग ने जहां तत्कालीन कांग्रेस सरकार और चुनाव कराने के फैसले को जिम्मेदार नहीं माना, वहीं मेहता आयोग ने सीधे तौर पर इंदिरा गांधी सरकार के चुनाव कराने के निर्णय को नरसंहार की वजह बताया। आंदोलन, तनाव और चुनाव का फैसला 1979 से 1985 के बीच असम में बांग्लादेशी घुसपैठ को लेकर बड़ा आंदोलन चला। असमिया संगठनों—AASU और A...
असम में बहुविवाह पर सख्ती: विधानसभा में बिल पेश, दोषी को 7 से 10 साल की जेल का प्रावधान
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असम में बहुविवाह पर सख्ती: विधानसभा में बिल पेश, दोषी को 7 से 10 साल की जेल का प्रावधान

गुवाहाटी। असम सरकार ने राज्य में बहुविवाह की प्रथा पर पूर्ण रोक लगाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को विधानसभा में 'द असम प्रोहिबिशन ऑफ पॉलीगैमी बिल, 2025' पेश किया। इस प्रस्तावित कानून के तहत पहली बार बहुविवाह करते पकड़े जाने पर सात साल तक की जेल और दोबारा अपराध करने पर दस साल तक की सजा का प्रावधान रहेगा। स्पीकर विश्वजीत दैमरी की अनुमति के बाद सीएम ने यह बिल सदन में रखा। हालांकि विपक्षी दलों कांग्रेस, सीपीआई(एम) और रायजोर दल के विधायक इस बीच बिल का विरोध करते हुए सदन से वॉकआउट कर गए। किन क्षेत्रों में लागू होगा कानून? बिल के अनुसार यह कानून पूरे असम में लागू होगा, लेकिन छठी अनुसूची वाले स्वायत्त क्षेत्रों और संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत परिभाषित अनुसूचित जनजातियों को इससे छूट दी गई है। बहुविवाह होगा आपराधिक जुर्म बिल में स्पष्ट क...
असम में मतदाता सूची का ‘स्पेशल रिविजन’, NRC की पृष्ठभूमि में बड़ा फैसला SIR नहीं, चुनाव आयोग करेगा विशेष पुनरीक्षण—जानिए दोनों में क्या अंतर
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असम में मतदाता सूची का ‘स्पेशल रिविजन’, NRC की पृष्ठभूमि में बड़ा फैसला SIR नहीं, चुनाव आयोग करेगा विशेष पुनरीक्षण—जानिए दोनों में क्या अंतर

गुवाहाटी। असम में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग (ECI) ने मतदाता सूचियों का ‘विशेष पुनरीक्षण’ (Special Revision – SR) कराने का निर्णय लिया है। यह कदम राज्य की विशिष्ट नागरिकता व्यवस्था और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) की स्थिति को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) से अलग होगी। क्यों लिया गया यह निर्णय? असम में नागरिकता से जुड़े कानूनी प्रावधान अन्य राज्यों की तुलना में भिन्न हैं। 2019 में तैयार हुआ NRC अभी अंतिम रूप से प्रकाशित नहीं हो सका है और मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। ऐसे में SIR जैसी प्रक्रिया, जिसमें पात्रता की जांच के लिए दस्तावेज़ मांगे जाते हैं, NRC डेटा के साथ टकराव पैदा कर सकती थी।इसी वजह से आयोग ने SR को अपनाया ह...