
इस्लामाबाद/वॉशिंगटन, 16 फरवरी 2026: अमेरिका में लॉबिंग पर रिकॉर्ड खर्च करने वाले पाकिस्तान ने अब इसमें कड़ा बदलाव किया है। बीते साल 2025 में पाकिस्तान ने ट्रंप प्रशासन में अपनी पैठ बनाने के लिए लॉबिंग पर भारत से तीन गुना अधिक पैसा खर्च किया था, लेकिन अब इस खर्च को काफी कम कर दिया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने जेवलिन एडवाइजर्स, सीडेन लॉ, ऑर्किड एडवाइजर्स, स्क्वॉयर पैटन बोग्स और कॉन्शियस पॉइंट कंसल्टिंग जैसी हाई-प्रोफाइल लॉबिंग फर्मों से अपने कॉन्ट्रैक्ट समाप्त कर दिए हैं। अब पाकिस्तान केवल दो लॉबिंग फर्मों — कोर्विस LLC और एर्विन ग्रेव्स स्ट्रैटेजी ग्रुप LLC — की सेवाओं का उपयोग कर रहा है, जिनके लिए वह महीने का 175,000 डॉलर खर्च कर रहा है। यह भारत के लॉबिंग खर्च से कम है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान का यह कदम इस बात का संकेत है कि उसने ट्रंप प्रशासन के साथ आवश्यक संपर्क स्थापित कर लिया है और अब महंगी लॉबिंग की जरूरत नहीं रही। पाकिस्तान के पूर्व डिप्लोमैट और अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व एम्बेसडर हुसैन हक्कानी का कहना है कि असीम मुनीर और पीएम शहबाज शरीफ ने ट्रंप प्रशासन से मिलने वाले समर्थन और तारीफ के बाद यह निर्णय लिया।
पाकिस्तान का बीते साल लॉबिंग पर बढ़ा खर्च मुख्य रूप से अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले और मई में भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुआ था। इस दौरान उसने अमेरिकी पब्लिक ओपिनियन बनाने और व्हाइट हाउस, कांग्रेस जैसे प्रमुख संस्थानों पर असर डालने के लिए पांच फर्मों को हर महीने 50,000 डॉलर तक भुगतान किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में लॉबिंग महज तथ्यों के जरिए नहीं होती, बल्कि इसके लिए भरोसेमंद माध्यमों की आवश्यकता होती है। इसके तहत लॉबिंग फर्में देशों की “कहानी” अमेरिका में प्रभावशाली तरीके से पेश करती हैं।
