Saturday, July 18

Opinion

क्या मध्यप्रदेश की राजनीति में उठ रहे सवाल सत्ता के लिए चुनौती बनेंगे?
Editorial, Madhya Pradesh, Opinion, Politics, State

क्या मध्यप्रदेश की राजनीति में उठ रहे सवाल सत्ता के लिए चुनौती बनेंगे?

संपादकीय मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद प्रदेश की राजनीति लगातार नए घटनाक्रमों और विवादों के केंद्र में रही है। बीते कुछ समय से विभिन्न मामलों में अनियमितताओं और कथित घोटालों के आरोप सामने आ रहे हैं। इन आरोपों ने राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि राज्य में एक के बाद एक ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है। इनमें उज्जैन महाकाल मंदिर से जुड़े ट्रस्ट की भूमि आवंटन प्रक्रिया, कथित अस्पताल संचालन, मेडिकल कॉलेज से जुड़े आरोप, सार्वजनिक वितरण प्रणाली से संबंधित कथित चावल घोटाला तथा अन्य मामलों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई है। हालांकि इन मामलों में अंतिम सत्य न्यायिक अथवा सक्षम जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी ...
क्या विजय थलापति भारतीय राजनीति में विपक्ष के नए चेहरे बन सकते हैं?
Editorial, Natioanal, Opinion, Politics, State, Tamil Nadu

क्या विजय थलापति भारतीय राजनीति में विपक्ष के नए चेहरे बन सकते हैं?

संपादकीय दक्षिण भारतीय सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता से राजनेता बने विजय थलापति (थलापति विजय) इन दिनों राजनीति में अपनी सक्रियता और कार्यशैली को लेकर लगातार चर्चा में हैं। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक उनके बयानों, जनसंपर्क अभियानों और सार्वजनिक कार्यक्रमों पर लोगों की नजर बनी हुई है। फिल्मी पर्दे पर नायक की भूमिका निभाने वाले विजय अब वास्तविक राजनीति में भी अपनी अलग पहचान बनाने का प्रयास करते दिखाई दे रहे हैं। पिछले एक दशक में भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर, पश्चिम और पूर्वी भारत के कई राज्यों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की है तथा दक्षिण भारत में भी संगठन के विस्तार के लिए लगातार प्रयास किए हैं। ऐसे राजनीतिक माहौल में विजय का राजनीति में प्रवेश दक्षिण भारत की राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय की सबसे बड़ी ताकत उनकी...
क्या अस्पताल उपचार से जुड़ा ऐसा कानून विजय को राष्ट्रीय राजनीति का नया चेहरा बना सकता है?
Opinion, Politics, State, Tamil Nadu

क्या अस्पताल उपचार से जुड़ा ऐसा कानून विजय को राष्ट्रीय राजनीति का नया चेहरा बना सकता है?

हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से वायरल हुआ कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय अस्पतालों से संबंधित ऐसा कानून लाने की तैयारी कर रहे हैं, जिसके तहत यदि उपचार के दौरान किसी मरीज की मृत्यु हो जाती है तो अस्पताल उसके परिजनों से उपचार शुल्क वसूल नहीं कर सकेंगे। हालांकि, इस दावे की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इसे सरकार द्वारा घोषित नीति या पारित कानून नहीं माना जा सकता। इसलिए इस विषय पर चर्चा पूरी तरह एक संभावित राजनीतिक परिदृश्य के रूप में की जानी चाहिए। यदि भविष्य में विजय वास्तव में ऐसा कोई कानून लाते हैं, तो यह केवल स्वास्थ्य व्यवस्था का विषय नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी व्यापक बहस का कारण बन सकता है। आम नागरिक के दृष्टिकोण से अस्पताल का बढ़ता खर्च आज सबसे बड़ी चिंताओं में से एक है। कई परिवार गंभीर बीमारी के बाद आर्थिक संकट में पहुंच जाते हैं। ऐसे समय...
ज़िंदा है अख़बार।।
Opinion

ज़िंदा है अख़बार।।

अख़बारों में कुछ बचा, ज़िंदा ज़मीर आज।तारीख़ और वार का, रखते जो अंदाज़।। मौत ज़मीरों की हुई, कैसी उठी पुकार।सच को बेचें रोज़ जो, करते वही प्रचार।। कलम हुई व्यापार की, बिकने लगे विचार।सत्ता की चौखट तलक, झुके कई अख़बार।। झूठ सजाकर छापते, बनकर बड़े हुज़ूर।सच की आवाज़ें हुईं, आज बहुत ही दूर।। टीआरपी की भूख में, मरे रोज ही लाज।ख़बरों के बाजार में, बिकता हर अंदाज़।। चमचे बनकर घूमते, कुछ चेहरे दिन-रात।सच की कीमत घट गई, रचता झूठ प्रभात।। विज्ञापन के जाल में, बिक गए समाचार।जनता के विश्वास पर, होता रोज़ प्रहार।। फिर भी कुछ उम्मीद की, जलती हुई मशाल।कुछ चेहरे अब भी रखें, सच का ऊँचा भाल।। अख़बारों में कुछ बचा, ज़िंदा ज़मीर आज।तारीख़ और वार का, रखते जो अंदाज़।। जो सच लिखने पर अड़े, सहते रोज़ प्रहार।उनके दम पर आज भी, ज़िंदा है अख़बार।। ✍️ — डॉ. प्रियंका सौरभ (डॉ. प्रियंका...
न्यायालय की गरिमा और नागरिक मर्यादा लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति
Natioanal, Opinion

न्यायालय की गरिमा और नागरिक मर्यादा लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति

न्यायिक सुधारों के साथ संस्थाओं के सम्मान और संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण पर बल : डॉ. सत्यवान सौरभ नई दिल्ली। न्यायपालिका लोकतंत्र का वह मजबूत स्तंभ है, जहाँ प्रत्येक नागरिक अंतिम उम्मीद लेकर पहुँचता है। इसलिए न्यायालय की गरिमा बनाए रखना केवल न्यायाधीशों या अधिवक्ताओं की ही नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भी संवैधानिक जिम्मेदारी है। यह विचार प्रख्यात कवि, सामाजिक विचारक एवं स्तंभकार डॉ. सत्यवान सौरभ ने अपने विचार लेख "न्याय के मंदिर की गरिमा और नागरिक मर्यादा" में व्यक्त किए हैं। डॉ. सौरभ ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की सफलता न्यायपालिका के प्रति जनता के विश्वास पर आधारित है। यदि न्यायालयों की कार्यवाही के दौरान अमर्यादित व्यवहार, अभद्र भाषा, धमकी या अव्यवस्था का वातावरण बनता है, तो इसका प्रभाव केवल किसी एक अदालत तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे लोकतांत्रिक तंत्र की विश्वसनीयता प्रभावित हो...
पुरस्कारों का अर्थशास्त्र(सम्मान, कारोबार और साहित्य का संकट)
Opinion

पुरस्कारों का अर्थशास्त्र(सम्मान, कारोबार और साहित्य का संकट)

एक साहित्यिक संस्था ने कविता, कहानी, व्यंग्य सहित सात विधाओं में कुल 21 पुरस्कारों की घोषणा की। प्रत्येक विधा में प्रथम पुरस्कार ₹5,100, द्वितीय ₹3,100 तथा तृतीय ₹2,100 निर्धारित किया गया। प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए ₹500 आवेदन शुल्क रखा गया और शर्त यह थी कि प्रतिभागी अपनी पिछले वर्ष प्रकाशित पुस्तक की दो प्रतियाँ आवेदन के साथ भेजें। आकर्षक घोषणा के बाद देशभर से 650 साहित्यकारों ने आवेदन किया, जिससे संस्था को आवेदन शुल्क के रूप में ₹3,25,000 प्राप्त हुए। निर्धारित तिथि पर वातानुकूलित सभागार में भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया, जिसमें कुल ₹72,100 की पुरस्कार राशि वितरित की गई तथा आयोजन पर लगभग ₹32,500 खर्च किए गए। इस प्रकार कुल व्यय ₹1,04,600 रहा, जबकि ₹2,20,400 की राशि शेष बच गई। अगले ही दिन संस्था के अध्यक्ष और सचिव को 1,300 पुस्तकें दान करने के उपलक्ष्य में विश्वविद्यालय द्वारा सम...
मध्यप्रदेश में कांग्रेस के अस्तित्व का संकट: क्या नए नेतृत्व के बिना वापसी संभव है?
BHOPAL, Editorial, INDORE, JABALPUR, Madhya Pradesh, Opinion, Politics, State, UJJAIN

मध्यप्रदेश में कांग्रेस के अस्तित्व का संकट: क्या नए नेतृत्व के बिना वापसी संभव है?

विशेष राजनीतिक विश्लेषण मध्यप्रदेश की राजनीति में कभी कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर हुआ करती थी। एक समय था जब प्रदेश के अनेक जिले कांग्रेस के मजबूत गढ़ माने जाते थे। लेकिन पिछले डेढ़ दशक में राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदला है और आज कांग्रेस संगठनात्मक एवं चुनावी दोनों स्तरों पर गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। यदि हाल के चुनावी परिणामों पर नजर डालें तो मध्यप्रदेश में भाजपा का प्रभाव लगातार मजबूत हुआ है। विधानसभा, लोकसभा, नगर निगम, नगर पालिका और पंचायत स्तर पर भी भाजपा ने व्यापक बढ़त बनाई है। प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में लंबे समय से भाजपा का मजबूत संगठन और जनाधार दिखाई देता है, जबकि कांग्रेस यहां लगातार कमजोर होती गई है। क्या पुराने नेतृत्व पर जनता का भरोसा कम हुआ है? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल चुनाव हारना नहीं, बल्कि...
मध्यप्रदेश की राजनीति में ‘भूमि विवाद’ और मुख्यमंत्री की चुप्पी: क्या संकेत देती है यह स्थिति?
Editorial, INDORE, Madhya Pradesh, Opinion, State, UJJAIN

मध्यप्रदेश की राजनीति में ‘भूमि विवाद’ और मुख्यमंत्री की चुप्पी: क्या संकेत देती है यह स्थिति?

विशेष राजनीतिक विश्लेषण मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिजनों से जुड़े कथित भूमि सौदों को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है, वहीं विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और राजनीतिक बयानों के बाद भी मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से इस विषय पर सीमित सार्वजनिक प्रतिक्रिया देखने को मिली है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में कई तरह के प्रश्न उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री की चुप्पी राजनीतिक रणनीति है, या भाजपा नेतृत्व को अपने मुख्यमंत्री पर पूरा विश्वास है? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी गंभीर आरोप पर दो प्रकार की रणनीतियां अपनाई जाती हैं। पहली, तत्काल सार्वजनिक स्पष्टीकरण देना। दूसरी, आरोपों को राजनीतिक मानते हुए उन्हें अधिक महत्व न देना। भाजपा फिलहाल दूसरे रास्ते पर चलती दिखाई देती...
मध्यप्रदेश में नशे के खिलाफ मुख्यमंत्री की मुहिम और कांग्रेस के सामने नई राजनीतिक चुनौती?
Editorial, Opinion

मध्यप्रदेश में नशे के खिलाफ मुख्यमंत्री की मुहिम और कांग्रेस के सामने नई राजनीतिक चुनौती?

क्या विपक्ष के एक बयान को भाजपा चुनावी मुद्दा बनाएगी? विशेष राजनीतिक विश्लेषण मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में नशे के विरुद्ध अभियान को सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है। राज्य सरकार लगातार अवैध मादक पदार्थों की तस्करी पर कार्रवाई, नशा मुक्ति अभियान, जनजागरूकता कार्यक्रम तथा युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए विशेष अभियान चला रही है। सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य प्रदेश को नशामुक्त बनाना और युवाओं का भविष्य सुरक्षित करना है। मुख्यमंत्री कई मंचों से यह संदेश दे चुके हैं कि मध्यप्रदेश में नशे के कारोबार के प्रति "जीरो टॉलरेंस" की नीति अपनाई जाएगी। इसी बीच हाल ही में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई नाना पटवारी से जुड़ा मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया। मीडिया में सामने आए उनके सार्वजनिक बयान में उन्होंने स्वीकार किया कि वे एक...
मध्यप्रदेश भाजपा में आंतरिक असंतोष की आहट? नारोत्तम मिश्रा प्रकरण ने खड़े किए कई सवाल
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मध्यप्रदेश भाजपा में आंतरिक असंतोष की आहट? नारोत्तम मिश्रा प्रकरण ने खड़े किए कई सवाल

लेखक : सच्‍चा दोस्त के मुख्य संपादक के राजनीतिक विश्लेषण पर आधारित मध्यप्रदेश की राजनीति में हाल के दिनों में एक नया राजनीतिक विमर्श उभरता दिखाई दे रहा है। दतिया उपचुनाव में वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. नारोत्तम मिश्रा को टिकट न मिलने के बाद उनके समर्थकों द्वारा विरोध प्रदर्शन, नारेबाजी और कथित नाराजगी ने भाजपा के भीतर चल रही संभावित आंतरिक खींचतान को लेकर चर्चाओं को तेज कर दिया है। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह केवल स्थानीय स्तर की नाराजगी है, या फिर भाजपा के भीतर नेतृत्व, पद और भविष्य की भूमिका को लेकर कोई गहरा असंतोष पनप रहा है। हालांकि स्वयं डॉ. मिश्रा ने सार्वजनिक रूप से इसे कार्यकर्ताओं की भावनात्मक प्रतिक्रिया बताया है और विवाद को शांत करने की कोशिश की है, लेकिन उनका अपेक्षाकृत शांत रुख भी राजनीतिक विश्लेषकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। 30 वर्षों का राजनी...