
इस्लामाबाद, 16 फरवरी 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गाजा के लिए बनाई जा रही इंटरनेशनल स्टैबिलाइजेशन फोर्स (ISF) में पाकिस्तान की हिस्सेदारी पर पाकिस्तान फंसा हुआ है। पाकिस्तानी सेना और सरकार के बीच स्पष्ट रुख न होने के कारण आर्मी चीफ असीम मुनीर और पीएम शहबाज शरीफ पर दबाव बढ़ गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन जल्द ही ISF की डिटेल और गाजा के लिए अरबों डॉलर के रिकंस्ट्रक्शन ब्लूप्रिंट की घोषणा करेगा। बोर्ड ऑफ पीस की पहली फॉर्मल मीटिंग 19 फरवरी को वॉशिंगटन में होने वाली है, जिसमें पाक पीएम शहबाज शरीफ के शामिल होने की संभावना है।
पाकिस्तान की दुविधा:
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अमेरिका को खुश करना या घरेलू विरोध से बचना: अगर पाकिस्तानी सैनिक ISF में शामिल हुए तो घरेलू स्तर पर गुस्सा भड़क सकता है, क्योंकि जनता में इजरायल और अमेरिका की गाजा नीति को लेकर नाराजगी है।
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सीमित भूमिका की शर्तें: पाकिस्तान चाहता है कि उसका रोल केवल पीसकीपिंग और ह्यूमन स्टेबिलाइजेशन तक सीमित रहे। पाक सेना हमास को डिसआर्म या किसी अन्य फिलीस्तीनी ग्रुप को टारगेट नहीं करेगी।
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अमेरिका के दबाव के बावजूद चुप्पी: पाकिस्तानी अफसर इस मुद्दे पर बयानबाजी में बहुत एहतियात बरत रहे हैं।
बीते हफ्ते म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में असीम मुनीर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच कथित तौर पर ISF में पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती पर चर्चा हुई, लेकिन दोनों पक्षों ने कोई जानकारी साझा नहीं की।
विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान इस स्थिति में अमेरिका को नाराज किए बिना गृह राजनीति और जनभावनाओं का संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। अगर पाकिस्तान ISF में शामिल होता है तो यह संदेश जाएगा कि वह हमास या फिलीस्तीनी जनता के खिलाफ काम कर रहा है, जो देश के अंदर राजनीतिक और सामाजिक दबाव को और बढ़ा सकता है।
