
काबुल, 16 फरवरी 2026: अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज तालिबान ने स्पष्ट किया है कि अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो वह अपने पड़ोसी देश का समर्थन करेगा। तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने रविवार को रेडियो ईरान की पश्तो सेवा को दिए इंटरव्यू में यह बात कही।
मुजाहिद ने कहा, “ईरान अगर अमेरिकी हमले की स्थिति में मदद के लिए काबुल की ओर देखें तो हम उनका साथ देंगे। अफगानिस्तान पूरी तरह से ईरान के साथ सहयोग करेगा। ईरान ने बीते साल जून में इज़राइल के साथ 12 दिन की लड़ाई में सफलता हासिल की थी, और अमेरिकी हमले का भी ईरान जवाब देगा।”
तालिबान ने यह भी कहा कि वह अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष नहीं चाहता। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को डिप्लोमैटिक और बातचीत के जरिए हल किया जाना चाहिए। इसके बावजूद ईरान को किसी भी हमले से अपनी रक्षा करने का अधिकार है।
विशेष रूप से ध्यान देने वाली बात यह है कि अफगान तालिबान का यह रुख महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों देशों के बीच लंबा बॉर्डर है। हालांकि अफगान तालिबान सुन्नी विचारधारा का पालन करता है और ईरान शिया बहुल देश है, बावजूद इसके तालिबान ने ईरान का समर्थन करने का ऐलान किया।
ईरान-अमेरिका तनाव:
इस साल की शुरुआत से ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान में प्रदर्शनों और हमलों के संदर्भ में आक्रामक बयानबाजी और लाल सागर में एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन सहित गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर भेजने से तनाव और बढ़ गया। हालाँकि दोनों देशों के बीच परमाणु वार्ता फिर से शुरू हो चुकी है, फिर भी आक्रामक कदमों से स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
हूतियों का भी साथ:
तालिबान से पहले यमन के हूती विद्रोही भी ईरान का समर्थन कर चुके हैं। हूतियों ने लाल सागर के जलमार्ग पर जहाजों पर हमले की नई धमकी दी है और अमेरिका के संभावित हमलों के बीच ईरान के पक्ष में फिर से सक्रिय होने की चेतावनी दी है।
