Friday, February 27

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कांग्रेस ने छत्रपति यादव और आनंद माधव को 6 साल के लिए पार्टी से निकाला, बिहार कांग्रेस में सियासी भूचाल
Bihar, State

कांग्रेस ने छत्रपति यादव और आनंद माधव को 6 साल के लिए पार्टी से निकाला, बिहार कांग्रेस में सियासी भूचाल

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में करारी हार के बाद कांग्रेस के अंदर चल रहा घमासान अब खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी नेतृत्व के खिलाफ लगातार बयानबाजी और अनुशासनहीन गतिविधियों के आरोप में बिहार कांग्रेस ने अपने दो वरिष्ठ नेताओं छत्रपति यादव और आनंद माधव को बड़ा झटका देते हुए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद बिहार कांग्रेस की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राजेश राठौड़ ने निष्कासन की पुष्टि बिहार कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष राजेश राठौड़ ने बुधवार को इस निष्कासन की पुष्टि करते हुए कहा कि राज्य अनुशासन समिति ने यह फैसला दोनों नेताओं के लगातार दिए जा रहे “अवांछनीय और पार्टी विरोधी” बयानों को देखते हुए लिया है। राठौड़ ने कहा कि छत्रपति यादव और आनंद माधव लंबे समय से पार्टी नेतृत्व के खिलाफ नियमित अंतराल पर प्रेस बयान जारी कर रहे थे। ...
इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने पलटा, निजी अंग पकड़ना और नाड़ा खोलना ‘दुष्कर्म के प्रयास’ की श्रेणी में
State, Uttar Pradesh

इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने पलटा, निजी अंग पकड़ना और नाड़ा खोलना ‘दुष्कर्म के प्रयास’ की श्रेणी में

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक फैसले को लेकर हाल के दिनों में देशभर में बहस छिड़ गई थी। हाई कोर्ट ने एक मामले में यह कहते हुए दुष्कर्म के प्रयास की धाराओं को हटाने का आदेश दिया था कि युवती के निजी अंग पकड़ना और कपड़ों के नाड़े से छेड़छाड़ करना ‘दुष्कर्म की कोशिश’ नहीं बल्कि केवल ‘तैयारी’ है। अब इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है और स्पष्ट किया है कि ऐसी हरकतें दुष्कर्म के प्रयास का अपराध बनती हैं। चीफ जस्टिस की पीठ ने सुनाया अहम फैसला इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने की। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्थापित आपराधिक कानून के सिद्धांतों की गलत व्याख्या और गलत इस्तेमाल किया है। शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए कासगंज के व...
कानपुर। उत्तर प्रदेश में भूकंप को लेकर लापरवाही अब भारी पड़ सकती है। साल 2015 में नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के झटके यूपी तक महसूस किए गए थे, जिससे प्रदेश के कई इलाकों में दहशत फैल गई थी। हालांकि उस घटना के बाद भी भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा को लेकर कोई ठोस तैयारी नहीं हो सकी। अब आईआईटी कानपुर की एक विस्तृत रिसर्च ने प्रदेश के लिए गंभीर चेतावनी जारी की है।  आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों के अनुसार यदि गंगा के मैदानी क्षेत्रों में 6.5 या उससे अधिक तीव्रता का भूकंप आता है, तो कानपुर और प्रयागराज में भारी तबाही हो सकती है। रिसर्च के मुताबिक इन दोनों शहरों की मिट्टी की संरचना ऐसी है, जो भूकंप के दौरान लिक्विफेक्शन जैसी खतरनाक प्रक्रिया को बढ़ावा दे सकती है।  लिक्विफेक्शन से सबसे बड़ा खतरा  सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर निहार रंजन पात्रा के अनुसार कानपुर और प्रयागराज की जमीन में बालू की मात्रा अधिक है और इसके कण बेहद महीन हैं। भूकंप के तेज झटकों से मिट्टी की मजबूती कमजोर हो जाती है और जमीन के नीचे मौजूद पानी व सिल्टयुक्त बालू मिलकर ऊपर की ओर आने लगते हैं। इसी प्रक्रिया को लिक्विफेक्शन कहा जाता है।  इस स्थिति में जमीन का व्यवहार लगभग तरल जैसा हो जाता है, जिससे इमारतों की नींव कमजोर पड़ सकती है और बड़े-बड़े पक्के ढांचे धंस सकते हैं या गिर सकते हैं।  इतिहास में भी दर्ज हुई थीं घटनाएं  रिसर्च में यह भी बताया गया कि गंगा के मैदानी क्षेत्रों में 1803 और 1934 के बड़े भूकंपों के बाद लिक्विफेक्शन की घटनाएं दर्ज की गई थीं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह क्षेत्र भूकंपीय फॉल्ट के प्रभाव क्षेत्र में भी आता है, जिससे खतरा और बढ़ जाता है।  30 से 40 मीटर गहराई तक असर की संभावना  आमतौर पर भूकंप के दौरान लिक्विफेक्शन का असर 8 से 10 मीटर की गहराई तक देखा जाता है, लेकिन आईआईटी कानपुर की रिपोर्ट के अनुसार कानपुर और प्रयागराज में यह प्रभाव 30 से 40 मीटर तक जा सकता है।  रिसर्च के लिए दोनों शहरों में 20-20 स्थानों से मिट्टी के नमूने लिए गए। कानपुर में गंगा बैराज के पास 70 से 80 मीटर गहराई तक बोरहोल के जरिए सैंपल इकट्ठे किए गए।  इस अध्ययन में गुजरात, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार के कई हिस्सों में भी सर्वे किया गया। इसके साथ ही लखनऊ और वाराणसी के कुछ इलाकों में भी लिक्विफेक्शन की संभावना का आकलन किया गया।  सिस्मिक जोन-3 और जोन-4 में आते हैं दोनों शहर  रिसर्च में बताया गया कि कानपुर और प्रयागराज सिस्मिक जोन-3 और जोन-4 में आते हैं और हिमालय से लगभग 300 किलोमीटर की परिधि में स्थित हैं। यहां की मिट्टी अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती है, इसलिए निर्माण कार्य के दौरान विशेष सावधानी और आधुनिक ग्राउंड इम्प्रूवमेंट तकनीक अपनाने की जरूरत है।  विशेषज्ञों की चेतावनी  विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते शहरी नियोजन, निर्माण मानकों और भूकंपरोधी तकनीकों को सख्ती से लागू नहीं किया गया, तो भविष्य में आने वाला कोई भी बड़ा भूकंप कानपुर और प्रयागराज के लिए गंभीर तबाही का कारण बन सकता है।  आईआईटी कानपुर की यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि उत्तर प्रदेश के बड़े शहरों में अब भूकंप को लेकर सतर्कता और तैयारी को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी हो गया है।
Rajasthan, State

कानपुर। उत्तर प्रदेश में भूकंप को लेकर लापरवाही अब भारी पड़ सकती है। साल 2015 में नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के झटके यूपी तक महसूस किए गए थे, जिससे प्रदेश के कई इलाकों में दहशत फैल गई थी। हालांकि उस घटना के बाद भी भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा को लेकर कोई ठोस तैयारी नहीं हो सकी। अब आईआईटी कानपुर की एक विस्तृत रिसर्च ने प्रदेश के लिए गंभीर चेतावनी जारी की है। आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों के अनुसार यदि गंगा के मैदानी क्षेत्रों में 6.5 या उससे अधिक तीव्रता का भूकंप आता है, तो कानपुर और प्रयागराज में भारी तबाही हो सकती है। रिसर्च के मुताबिक इन दोनों शहरों की मिट्टी की संरचना ऐसी है, जो भूकंप के दौरान लिक्विफेक्शन जैसी खतरनाक प्रक्रिया को बढ़ावा दे सकती है। लिक्विफेक्शन से सबसे बड़ा खतरा सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर निहार रंजन पात्रा के अनुसार कानपुर और प्रयागराज की जमीन में बालू की मात्रा अधिक है और इसके कण बेहद महीन हैं। भूकंप के तेज झटकों से मिट्टी की मजबूती कमजोर हो जाती है और जमीन के नीचे मौजूद पानी व सिल्टयुक्त बालू मिलकर ऊपर की ओर आने लगते हैं। इसी प्रक्रिया को लिक्विफेक्शन कहा जाता है। इस स्थिति में जमीन का व्यवहार लगभग तरल जैसा हो जाता है, जिससे इमारतों की नींव कमजोर पड़ सकती है और बड़े-बड़े पक्के ढांचे धंस सकते हैं या गिर सकते हैं। इतिहास में भी दर्ज हुई थीं घटनाएं रिसर्च में यह भी बताया गया कि गंगा के मैदानी क्षेत्रों में 1803 और 1934 के बड़े भूकंपों के बाद लिक्विफेक्शन की घटनाएं दर्ज की गई थीं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह क्षेत्र भूकंपीय फॉल्ट के प्रभाव क्षेत्र में भी आता है, जिससे खतरा और बढ़ जाता है। 30 से 40 मीटर गहराई तक असर की संभावना आमतौर पर भूकंप के दौरान लिक्विफेक्शन का असर 8 से 10 मीटर की गहराई तक देखा जाता है, लेकिन आईआईटी कानपुर की रिपोर्ट के अनुसार कानपुर और प्रयागराज में यह प्रभाव 30 से 40 मीटर तक जा सकता है। रिसर्च के लिए दोनों शहरों में 20-20 स्थानों से मिट्टी के नमूने लिए गए। कानपुर में गंगा बैराज के पास 70 से 80 मीटर गहराई तक बोरहोल के जरिए सैंपल इकट्ठे किए गए। इस अध्ययन में गुजरात, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार के कई हिस्सों में भी सर्वे किया गया। इसके साथ ही लखनऊ और वाराणसी के कुछ इलाकों में भी लिक्विफेक्शन की संभावना का आकलन किया गया। सिस्मिक जोन-3 और जोन-4 में आते हैं दोनों शहर रिसर्च में बताया गया कि कानपुर और प्रयागराज सिस्मिक जोन-3 और जोन-4 में आते हैं और हिमालय से लगभग 300 किलोमीटर की परिधि में स्थित हैं। यहां की मिट्टी अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती है, इसलिए निर्माण कार्य के दौरान विशेष सावधानी और आधुनिक ग्राउंड इम्प्रूवमेंट तकनीक अपनाने की जरूरत है। विशेषज्ञों की चेतावनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते शहरी नियोजन, निर्माण मानकों और भूकंपरोधी तकनीकों को सख्ती से लागू नहीं किया गया, तो भविष्य में आने वाला कोई भी बड़ा भूकंप कानपुर और प्रयागराज के लिए गंभीर तबाही का कारण बन सकता है। आईआईटी कानपुर की यह रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि उत्तर प्रदेश के बड़े शहरों में अब भूकंप को लेकर सतर्कता और तैयारी को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी हो गया है।

जयपुर। बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में जांच एजेंसियों ने सख्ती बढ़ा दी है। करीब 900 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि वह विदेश फरार हो सकते हैं, इसी के मद्देनज़र यह कदम उठाया गया है। जानकारी के अनुसार, एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने 17 फरवरी को सुबोध अग्रवाल के आवास पर तलाशी ली थी, लेकिन वह मौके पर मौजूद नहीं मिले। इसके बाद से उनकी तलाश तेज कर दी गई है। 9 अफसर गिरफ्तार, कोर्ट ने 3 दिन की रिमांड मंजूर ACB ने इस मामले में जलदाय विभाग से जुड़े नौ अधिकारियों को गिरफ्तार कर गुरुवार को अदालत में पेश किया। अदालत ने सभी आरोपियों को तीन दिन की रिमांड पर भेज दिया है। एजेंसी ने पांच दिन की रिमांड की मांग की थी, हालांकि अदालत ने सीमित अवधि ही स्वीकृत की।रिमांड के दौरान घोटाले से जुड़े दस्तावेजो...
IIT कानपुर की रिसर्च से बढ़ी चिंता: बड़े भूकंप में कानपुर और प्रयागराज को सबसे ज्यादा खतरा, लिक्विफेक्शन से भारी नुकसान की आशंका
State, Uttar Pradesh

IIT कानपुर की रिसर्च से बढ़ी चिंता: बड़े भूकंप में कानपुर और प्रयागराज को सबसे ज्यादा खतरा, लिक्विफेक्शन से भारी नुकसान की आशंका

कानपुर। उत्तर प्रदेश में भूकंप को लेकर लापरवाही अब भारी पड़ सकती है। साल 2015 में नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के झटके यूपी तक महसूस किए गए थे, जिससे प्रदेश के कई इलाकों में दहशत फैल गई थी। हालांकि उस घटना के बाद भी भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा को लेकर कोई ठोस तैयारी नहीं हो सकी। अब आईआईटी कानपुर की एक विस्तृत रिसर्च ने प्रदेश के लिए गंभीर चेतावनी जारी की है। आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों के अनुसार यदि गंगा के मैदानी क्षेत्रों में 6.5 या उससे अधिक तीव्रता का भूकंप आता है, तो कानपुर और प्रयागराज में भारी तबाही हो सकती है। रिसर्च के मुताबिक इन दोनों शहरों की मिट्टी की संरचना ऐसी है, जो भूकंप के दौरान लिक्विफेक्शन जैसी खतरनाक प्रक्रिया को बढ़ावा दे सकती है। लिक्विफेक्शन से सबसे बड़ा खतरा सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर निहार रंजन पात्रा के अनुसार कानपुर और प्रयागराज की जमीन में बालू की मात...
घर वापसी के मुद्दे पर अरशद मदनी का विवादित बयान, वीडियो वायरल होने के बाद मचा हंगामा
State, Uttar Pradesh

घर वापसी के मुद्दे पर अरशद मदनी का विवादित बयान, वीडियो वायरल होने के बाद मचा हंगामा

सहारनपुर। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष और दारुल उलूम देवबंद के प्रिंसिपल मौलाना अरशद मदनी का एक बयान इन दिनों राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। सहारनपुर में आयोजित एक यूनिटी कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कथित तौर पर ‘घर वापसी’ को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसे कई लोग भड़काऊ और विवादित बता रहे हैं। उनके भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद विरोध और समर्थन दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। 20 करोड़ मुसलमानों और 6 करोड़ ईसाइयों की घर वापसी पर टिप्पणीमौलाना अरशद मदनी ने अपने संबोधन में कहा कि आज कुछ संगठन और लोग यह दावा कर रहे हैं कि देश के 20 करोड़ मुसलमानों और 6 करोड़ ईसाइयों की ‘घर वापसी’ कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि इसका सीधा मतलब यह है कि इन समुदायों को हिंदू बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ...
बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा में सॉल्वर गैंग का खुलासा, 10 हजार में गणित पास कराने का सौदा, दो ‘इंजन’ गिरफ्तार
Bihar, State

बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा में सॉल्वर गैंग का खुलासा, 10 हजार में गणित पास कराने का सौदा, दो ‘इंजन’ गिरफ्तार

बांका। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) की ओर से आयोजित मैट्रिक (10वीं) परीक्षा के दौरान बांका जिले में सॉल्वर गैंग का मामला सामने आया है। परीक्षा के दूसरे दिन जांच के दौरान दो फर्जी परीक्षार्थियों को पकड़ा गया, जो असली छात्रों की जगह परीक्षा दे रहे थे। इन फर्जी परीक्षार्थियों को स्थानीय भाषा में ‘इंजन’ कहा जाता है। जानकारी के अनुसार, यह मामला तब उजागर हुआ जब परीक्षा केंद्रों पर कड़ी जांच के दौरान एडमिट कार्ड और पहचान पत्र का मिलान किया गया। जांच में सामने आया कि कुछ छात्रों ने खुद ही अपने लिए सॉल्वर की व्यवस्था कर ली थी और परीक्षा में अपनी जगह दूसरे व्यक्ति को बैठा दिया था। आरएमके इंटर स्कूल में पकड़ा गया फर्जी परीक्षार्थीपहला मामला बांका टाउन स्थित आरएमके इंटर स्कूल परीक्षा केंद्र का है। यहां मैट्रिक परीक्षार्थी ओम कुमार की जगह बादल कुमार नामक युवक परीक्षा देने पहुंचा था। लेकिन वीक्...
पुणे के शिवनेरी किले में भगदड़, शिवाजी जयंती पर 20 घायल
Maharashtra, State

पुणे के शिवनेरी किले में भगदड़, शिवाजी जयंती पर 20 घायल

पुणे: छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर पुणे के शिवनेरी किले में बुधवार रात भगदड़ की घटना हुई। इस दौरान महिला और छोटे बच्चों सहित लगभग 20 लोग घायल हो गए। सभी घायलों को जुन्नार के सरकारी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। भगदड़ कैसे हुई शिवाजी जयंती पर हजारों श्रद्धालु शिव ज्योत और भगवा झंडे लेकर किले में दर्शन करने आए थे। अचानक भारी भीड़ के कारण किले के हाथी दरवाजा और अंबरखाना के नीचे गणेश दरवाजा जैसी एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स पर जाम लग गया। भीड़ में फंसे लोग दम घुटने के कारण किले की टूट-फूटे संरचनाओं पर चढ़ने और दरारों में छिपने लगे। इससे भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। अधिकारियों ने बताया कि भीड़ के हिसाब से पुलिस की तैनाती पर्याप्त नहीं थी, जिससे हालात नियंत्रण से बाहर हो गए। पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया घटना के तुरंत बाद इमरजेंसी सर्विस ने सभी घायलों को अस्पताल पहुँचाया। हालांकि पुण...
हाई कोर्ट लखनऊ का बड़ा आदेश: खतरनाक ‘चाइनीज मांझे’ के निर्माण-प्रयोग पर कानून बनाएं
State, Uttar Pradesh

हाई कोर्ट लखनऊ का बड़ा आदेश: खतरनाक ‘चाइनीज मांझे’ के निर्माण-प्रयोग पर कानून बनाएं

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में चाइनीज मांझे के प्रयोग और उनसे होने वाली घटनाओं पर लखनऊ बेंच ने कड़ा रुख अपनाया है। हाई कोर्ट ने कहा कि केवल सरकार के आदेश जारी कर देना पर्याप्त नहीं है। खतरनाक मांझों की निर्माण, बिक्री और उपयोग पर रोक लगाने के लिए कानून बनाना आवश्यक है। मामले का सार हाई कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि चाइनीज मांझों का निर्माण, बिक्री या प्रयोग जारी रहा, तो पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश भी जारी किया जा सकता है। अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी, जब राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करना होगा। जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस ए.के. चौधरी की खंडपीठ ने यह आदेश स्थानीय वकील मोतीलाल यादव की जनहित याचिका पर दिया। हाल के हादसे याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि फरवरी में 9 दिन में एक मौत और 8 लोग घायल हुए हैं। सबसे अधिक घटनाएं फ्लाईओवर और मुख्य सड़कों पर हुईं। कुछ प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं: 1...
इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा निर्देश: भरण-पोषण इतनी राशि न हो कि पति पर बोझ पड़े
State, Uttar Pradesh

इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा निर्देश: भरण-पोषण इतनी राशि न हो कि पति पर बोझ पड़े

प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भरण-पोषण के मामले में कहा है कि राशि न इतनी अधिक हो कि पति के लिए असहनीय बोझ बन जाए और न ही इतनी कम कि पत्नी और बच्चे अभाव में जीवन बिताने को मजबूर हों। न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की एकलपीठ ने पारिवारिक न्यायालय द्वारा निर्धारित 16 हजार रुपये प्रतिमाह की राशि घटाकर 8 हजार रुपये प्रतिमाह कर दी। मामला और आदेश फतेहपुर के पारिवारिक न्यायालय ने 22 अप्रैल 2025 को पति की आय 32 हजार रुपये प्रतिमाह मानते हुए पत्नी को 10 हजार और बेटे को 6 हजार रुपये प्रतिमाह देने का आदेश दिया था। पति अनिल कुमार ने इसे इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी। उनके वकील ने दलील दी कि 16 हजार रुपये उनके लिए बहुत अधिक हैं। कोर्ट ने माना कि सामान्य तौर पर भरण-पोषण पति की शुद्ध आय का लगभग 25 प्रतिशत तक ही उचित माना जा सकता है। इसी आधार पर कुल भरण-पोषण राशि 8 हजार रुपये प्रतिमाह तय की गई और यह रा...
छत्तीसगढ़ में होली और मुहर्रम पर खुलेंगी शराब की दुकानें, आबकारी नीति में बदलाव पर विरोध
Chhattisgarh, State

छत्तीसगढ़ में होली और मुहर्रम पर खुलेंगी शराब की दुकानें, आबकारी नीति में बदलाव पर विरोध

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने आबकारी नीति में बड़ा बदलाव किया है। नई नीति के अनुसार अब राज्य में सात की बजाय सिर्फ तीन दिन ही ड्राई डे रहेंगे। इसके अलावा होली, मुहर्रम और गांधी निर्वाण दिवस जैसे अवसरों पर शराब की दुकानें खुली रहेंगी, जबकि पुरानी नीति में ये दिन ड्राई डे होते थे। सरकार का तर्क आबकारी विभाग का कहना है कि इस कदम से राज्य का रेवेन्यू बढ़ेगा और गैरकानूनी बिक्री एवं कालाबाजारी पर रोक लगेगी। मंत्री खुशवंत साहेब ने बताया कि ड्राई डे घटाकर तीन करने का निर्णय बदलते समय के अनुसार लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार पब्लिक वेलफेयर और नशे के खिलाफ जागरूकता अभियानों पर भी ध्यान दे रही है। विरोध की वजह विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने इस फैसले का विरोध किया है। गांधी जी से प्रेरित एक समूह ने गांधी निर्वाण दिवस पर शराब की बिक्री को गांधीजी के मूल्यों और नशा-विरोधी आदर्शों के खिलाफ बताया...