
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक फैसले को लेकर हाल के दिनों में देशभर में बहस छिड़ गई थी। हाई कोर्ट ने एक मामले में यह कहते हुए दुष्कर्म के प्रयास की धाराओं को हटाने का आदेश दिया था कि युवती के निजी अंग पकड़ना और कपड़ों के नाड़े से छेड़छाड़ करना ‘दुष्कर्म की कोशिश’ नहीं बल्कि केवल ‘तैयारी’ है। अब इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है और स्पष्ट किया है कि ऐसी हरकतें दुष्कर्म के प्रयास का अपराध बनती हैं।
चीफ जस्टिस की पीठ ने सुनाया अहम फैसला
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने की। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्थापित आपराधिक कानून के सिद्धांतों की गलत व्याख्या और गलत इस्तेमाल किया है।
शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए कासगंज के विशेष न्यायाधीश द्वारा जारी समन को बहाल कर दिया। यह समन आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 (दुष्कर्म/दुष्कर्म का प्रयास) के तहत जारी किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट शब्दों में कहा कि—
“किसी युवती के निजी अंग को पकड़ना और उसके कपड़ों का नाड़ा खोलना दुष्कर्म के प्रयास की श्रेणी में आता है।”
पीठ ने कहा कि इस मामले में लगाए गए आरोपों को सरसरी तौर पर देखने पर भी यह स्पष्ट है कि आरोपियों की मंशा दुष्कर्म करने की थी, और उन्होंने इसी उद्देश्य से यह हरकत की।
हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि उसकी टिप्पणियां केवल प्रथम दृष्टया (Prima Facie) आधार पर हैं और इन्हें आरोपियों की दोषसिद्धि पर अंतिम राय नहीं माना जाना चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
मामला उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले से जुड़ा है। याचिका के अनुसार, 10 नवंबर 2021 को शाम करीब 5 बजे एक महिला अपनी 14 वर्षीय बेटी के साथ ननद के घर से लौट रही थी। रास्ते में गांव के तीन युवक मिले और उन्होंने लड़की को बाइक से घर छोड़ने की पेशकश की।
आरोप है कि बाइक पर बैठाने के बाद आरोपियों ने रास्ते में लड़की के निजी अंग पकड़ लिए। शिकायत के अनुसार, तीन में से एक आरोपी आकाश ने लड़की को खींचकर पुलिया के नीचे ले जाने की कोशिश की और उसका नाड़ा भी खींच दिया।
पीड़िता की चीख सुनकर जब दो लोग मौके पर पहुंचे तो आरोपी भाग निकले।
हाई कोर्ट ने क्यों हटाई थी धारा?
इस घटना के बाद कासगंज की पॉक्सो कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ दुष्कर्म के प्रयास के तहत समन जारी किया था। लेकिन आरोपी इस आदेश को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचे।
हाई कोर्ट ने कहा था कि निजी अंग पकड़ना और नाड़ा खोलना ‘दुष्कर्म का प्रयास नहीं, केवल तैयारी’ है। इस टिप्पणी के बाद यह फैसला विवादों में आ गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने बहाल किया समन
अब सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा कि ऐसे मामलों में आरोपी के इरादे और किए गए कृत्य को देखते हुए इसे दुष्कर्म के प्रयास के रूप में ही देखा जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ अपराधों में न्याय व्यवस्था के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण और सख्त संदेश माना जा रहा है।
