Thursday, February 19

हाई कोर्ट लखनऊ का बड़ा आदेश: खतरनाक ‘चाइनीज मांझे’ के निर्माण-प्रयोग पर कानून बनाएं

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में चाइनीज मांझे के प्रयोग और उनसे होने वाली घटनाओं पर लखनऊ बेंच ने कड़ा रुख अपनाया है। हाई कोर्ट ने कहा कि केवल सरकार के आदेश जारी कर देना पर्याप्त नहीं है। खतरनाक मांझों की निर्माण, बिक्री और उपयोग पर रोक लगाने के लिए कानून बनाना आवश्यक है।

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मामले का सार

हाई कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि चाइनीज मांझों का निर्माण, बिक्री या प्रयोग जारी रहा, तो पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश भी जारी किया जा सकता है। अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी, जब राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करना होगा। जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस ए.के. चौधरी की खंडपीठ ने यह आदेश स्थानीय वकील मोतीलाल यादव की जनहित याचिका पर दिया।

हाल के हादसे

याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि फरवरी में 9 दिन में एक मौत और 8 लोग घायल हुए हैं। सबसे अधिक घटनाएं फ्लाईओवर और मुख्य सड़कों पर हुईं। कुछ प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं:

  • 12 फरवरी: नाका फ्लाईओवर पर मो. मुशर्रफ की मांझे से गर्दन कट गई।

  • 8 फरवरी: दोपहर में व्यापारी मुकेश वर्मा की दोनों भौंह कट गई; 12वीं के छात्र आकिब और पोर्टर गुड्ड घायल।

  • 7 फरवरी: बिमलेश और हाईस्कूल छात्र नजम खान घायल।

  • 6 फरवरी: बिजली विभाग के कर्मचारी सुधीर कुमार घायल।

  • 5 फरवरी: रिटायर फौजी ब्रजेश राय का चेहरा कट गया।

  • 4 फरवरी: हैदरगंज ओवरब्रिज पर एमआर मोहम्मद शोएब (33) की मौत।

कोर्ट की सख्त चेतावनी

हाई कोर्ट ने कहा कि केवल आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं। नियंत्रण और निगरानी का एक स्थायी तंत्र स्थापित करना होगा। कानून में कठोर प्रावधान किए जाएं और उन अधिकारियों-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाए जो अपने वैधानिक कर्तव्यों में विफल रहते हैं।

कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि कानून का उल्लंघन करने वालों को कैसे उत्तरदायी बनाया जाएगा

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