
प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भरण-पोषण के मामले में कहा है कि राशि न इतनी अधिक हो कि पति के लिए असहनीय बोझ बन जाए और न ही इतनी कम कि पत्नी और बच्चे अभाव में जीवन बिताने को मजबूर हों। न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की एकलपीठ ने पारिवारिक न्यायालय द्वारा निर्धारित 16 हजार रुपये प्रतिमाह की राशि घटाकर 8 हजार रुपये प्रतिमाह कर दी।
मामला और आदेश
फतेहपुर के पारिवारिक न्यायालय ने 22 अप्रैल 2025 को पति की आय 32 हजार रुपये प्रतिमाह मानते हुए पत्नी को 10 हजार और बेटे को 6 हजार रुपये प्रतिमाह देने का आदेश दिया था। पति अनिल कुमार ने इसे इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी। उनके वकील ने दलील दी कि 16 हजार रुपये उनके लिए बहुत अधिक हैं।
कोर्ट ने माना कि सामान्य तौर पर भरण-पोषण पति की शुद्ध आय का लगभग 25 प्रतिशत तक ही उचित माना जा सकता है। इसी आधार पर कुल भरण-पोषण राशि 8 हजार रुपये प्रतिमाह तय की गई और यह राशि आवेदन की तारीख से देय होगी।
हाई कोर्ट ने बीएचयू प्रोफेसर चयन प्रक्रिया रद्द की
हाई कोर्ट ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कला संकाय के नृत्य विभाग में प्रोफेसर पद की चयन प्रक्रिया को अवैध करार दिया। अदालत ने पाया कि चयन समिति का गठन नियमों के अनुरूप नहीं था। कथक विशेषज्ञों की नई चयन समिति दो महीने के भीतर गठित करने का निर्देश दिया गया।
मोटर दुर्घटना मुआवजा: पेंशन घटाए बिना मिलेगा
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मोटर दुर्घटना मुआवजे की गणना में मृतक या आश्रितों को मिल रही पेंशन को कम नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति संदीप जैन ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि मुआवजा मृतक की वास्तविक आय के आधार पर तय होगा। इस मामले में ट्रिब्युनल द्वारा तय 4.76 लाख रुपये का मुआवजा बढ़ाकर 15.22 लाख रुपये कर दिया गया।
