
सहारनपुर। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष और दारुल उलूम देवबंद के प्रिंसिपल मौलाना अरशद मदनी का एक बयान इन दिनों राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। सहारनपुर में आयोजित एक यूनिटी कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कथित तौर पर ‘घर वापसी’ को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसे कई लोग भड़काऊ और विवादित बता रहे हैं। उनके भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद विरोध और समर्थन दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
20 करोड़ मुसलमानों और 6 करोड़ ईसाइयों की घर वापसी पर टिप्पणी
मौलाना अरशद मदनी ने अपने संबोधन में कहा कि आज कुछ संगठन और लोग यह दावा कर रहे हैं कि देश के 20 करोड़ मुसलमानों और 6 करोड़ ईसाइयों की ‘घर वापसी’ कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि इसका सीधा मतलब यह है कि इन समुदायों को हिंदू बनाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तरह की बातें करने वाले क्या सोचते हैं। मदनी ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, “ऐसा लगता है कि केवल उन्होंने ही अपनी मां का दूध पिया है, हम लोगों ने नहीं पिया है।” उनके इस बयान पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने तालियां बजाईं।
देश में नफरत फैलाने का आरोप
मौलाना मदनी ने अपने भाषण में देश में बढ़ती सांप्रदायिकता और हिंसा पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज देश में नफरत की आग भड़काई जा रही है और हत्या-हिंसा का माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने लिंचिंग की घटनाओं और गाय के नाम पर होने वाली हिंसा का भी जिक्र करते हुए कहा कि बेगुनाहों को मौत के घाट उतारा जा रहा है, जबकि सरकार इस पर खामोश नजर आती है।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग खुलेआम यह ऐलान कर रहे हैं कि देश में वही रहेगा जो उनकी विचारधारा के अनुसार चलेगा, जो लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
संविधान के उल्लंघन की चेतावनी
अरशद मदनी ने कहा कि धर्म के आधार पर किसी समुदाय को निशाना बनाना या जबरन किसी की ‘घर वापसी’ कराने की सोच भारतीय संविधान का खुला उल्लंघन है। उन्होंने इसे देश की एकता, अखंडता और शांति के लिए गंभीर खतरा बताया।
मदनी ने स्पष्ट किया कि जमीयत उलमा-ए-हिंद शुरू से ही सांप्रदायिक सोच और नफरत फैलाने वाली मानसिकता के खिलाफ रहा है और आगे भी इसका विरोध करता रहेगा।
धर्मनिरपेक्षता और भाईचारे की अपील
अपने संबोधन के अंत में मौलाना मदनी ने कहा कि देश में शांति, भाईचारा और सौहार्द केवल धर्मनिरपेक्ष संविधान के तहत ही संभव है। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर हिंसा किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जा सकती। सभी धर्म मानवता, प्रेम, सहिष्णुता और एकता का संदेश देते हैं।
उन्होंने जनता से अपील की कि जो लोग धर्म का इस्तेमाल नफरत और हिंसा फैलाने के लिए कर रहे हैं, उनकी निंदा और विरोध हर स्तर पर किया जाना चाहिए।
फिलहाल, इस बयान के वायरल होने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है और कई संगठनों ने इसे भड़काऊ करार देते हुए कार्रवाई की मांग भी शुरू कर दी है।
