Wednesday, February 11

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ग्रीनलैंड पर अमेरिकी दखल: जॉर्जिया मेलोनी की गोलमोल बातें यूरोप के लिए चेतावनी, कंवल सिब्बल ने जताई चिंता
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ग्रीनलैंड पर अमेरिकी दखल: जॉर्जिया मेलोनी की गोलमोल बातें यूरोप के लिए चेतावनी, कंवल सिब्बल ने जताई चिंता

    रोम/वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की योजना ने यूरोप के देशों में हलचल मचा दी है। यूरोप के ज्यादातर देश इस कदम का कड़ा विरोध कर रहे हैं, जबकि कुछ देश अमेरिका के साथ तनाव बढ़ाने से बचते नजर आ रहे हैं।   भारत के पूर्व विदेश सचिव और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार कंवल सिब्बल ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के रुख पर सवाल उठाए हैं। सिब्बल का कहना है कि मेलोनी ग्रीनलैंड मुद्दे पर गोलमोल बयान देकर समस्या टालने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन इससे यूरोप की मुश्किलें कम नहीं होंगी।   सिब्बल ने कहा कि मेलोनी का यह कहना कि ग्रीनलैंड में यूरोपीय नाटो सैनिकों की तैनाती अमेरिका विरोधी नहीं है, अमेरिका को गलतफहमी में डाल सकता है। सिब्बल ने अपने पोस्ट में लिखा, “किसी समस्या से भागने का मतलब यह नहीं कि समस्या दूर चली जाएगी। यूरोप पीछे ह...
दावोस में फिर मिलेंगे डोनाल्ड ट्रंप से शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ असीम मुनीर, अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों पर होगी चर्चा
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दावोस में फिर मिलेंगे डोनाल्ड ट्रंप से शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ असीम मुनीर, अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों पर होगी चर्चा

  इस्लामाबाद/दावोस: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ असीम मुनीर इस हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात कर सकते हैं। यह मुलाकात स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित 56वें वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान होने की संभावना है। WEF की बैठक 19 से 23 जनवरी तक चलेगी, जिसमें पाकिस्तान, अमेरिका और दुनियाभर के नेता शामिल होंगे।   सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान और अमेरिका के बीच हाल के महीनों में रिश्तों में सुधार देखा गया है। बीते साल शहबाज शरीफ और असीम मुनीर ने वाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात की थी। इस बार भी दोनों पक्षों के बीच अफगानिस्तान, गाजा के पीस बोर्ड और रणनीतिक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।   पाकिस्तानी प्रधानमंत्री सोमवार को अपने डेलिगेशन के साथ दावोस के लिए रवाना होंगे, जबकि ट्रंप मंगलवार को वहां पहुंचेंगे। इसके साथ ही अम...
गाजा के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के लिए भारत-पाकिस्तान को ट्रंप का न्योता, मेंबरशिप फीस एक अरब डॉलर
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गाजा के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के लिए भारत-पाकिस्तान को ट्रंप का न्योता, मेंबरशिप फीस एक अरब डॉलर

    वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा के लिए बनाए जा रहे ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में कई देशों को आमंत्रित किया है। यह बोर्ड इजरायल और हमास के बीच हुए सीजफायर समझौते के दूसरे चरण का अहम हिस्सा है और गाजा के पुनर्निर्माण की देखरेख करेगा।   रिपोर्ट के मुताबिक, इस बोर्ड में शामिल होने के लिए प्रत्येक देश को एक अरब डॉलर (लगभग नौ हजार करोड़ रुपये) का भुगतान करना होगा। अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि यह राशि मुख्य रूप से गाजा के पुनर्निर्माण के लिए इस्तेमाल की जाएगी, न कि प्रशासनिक खर्च या कर्मचारियों की सैलरी के लिए। जो सदस्य प्रारंभिक तीन वर्षों में भुगतान नहीं करेंगे, उनका कार्यकाल केवल तीन साल तक ही रहेगा।   इस बोर्ड की अध्यक्षता डोनाल्ड ट्रंप स्वयं करेंगे। इसमें पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और अमेरिकी विदेश म...
ग्रीनलैंड, वेनेजुएला और ईरान के बाद डोनाल्ड ट्रंप का फोकस अब कनाडा पर
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ग्रीनलैंड, वेनेजुएला और ईरान के बाद डोनाल्ड ट्रंप का फोकस अब कनाडा पर

    वॉशिंगटन/कनाडा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के हफ्तों में कनाडा पर अपनी निगाहें गहरा दी हैं। यह कदम ऐसे समय में आया है, जब ट्रंप पहले ही ग्रीनलैंड, वेनेजुएला और ईरान जैसे देशों के साथ तनावपूर्ण संबंधों को लेकर सुर्खियों में हैं।   एनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप को आर्कटिक क्षेत्र में कनाडा की सुरक्षा क्षमता पर चिंता है। उनका मानना है कि चीन और रूस जैसे देशों के बढ़ते प्रभाव के सामने कनाडा कमजोर दिखाई दे रहा है। इसीलिए ट्रंप निजी तौर पर चाहते हैं कि कनाडा अपनी रक्षा क्षमता और खर्च में बढ़ोतरी करे।   अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल कनाडा पर किसी सैन्य कार्रवाई या आक्रामक कदम की कोई योजना नहीं है। मुख्य विचार कनाडा के साथ समझौता कर उसकी उत्तरी सीमा की सुरक्षा को मजबूत करने का है।   कनाडा ने हाल ही में चीन के साथ अपने संबंधों को बेहतर...
ईरान में उथल-पुथल के बाद खामेनेई का अमेरिका पर सीधा हमला, बोले– ईरान को निगलने की साजिश रच रहे हैं ट्रंप
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ईरान में उथल-पुथल के बाद खामेनेई का अमेरिका पर सीधा हमला, बोले– ईरान को निगलने की साजिश रच रहे हैं ट्रंप

तेहरान। ईरान में बीते तीन हफ्तों से जारी विरोध प्रदर्शनों और हिंसा के दौर के बाद हालात अब धीरे-धीरे सामान्य होते दिख रहे हैं, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी और तीखी हो गई है। इसी बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई सार्वजनिक मंच पर सामने आए और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोला। ईद अल-मबथ के अवसर पर हजारों लोगों को संबोधित करते हुए खामेनेई ने हालिया विरोध प्रदर्शनों को “अमेरिकी साजिश” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका का असली मकसद ईरान को हड़पना और तेहरान को कमजोर करना है। खामेनेई ने कहा कि ट्रंप के उकसावे और दखल की वजह से ही देश में हिंसा फैली, जिसमें जान-माल का भारी नुकसान हुआ। खामेनेई ने कहा, “ईरान में हालिया दंगे एक सुनियोजित अमेरिकी साजिश थे। अमेरिका का उद्देश्य ईरान को निगलना है। तेहरान को खत्म करने के लिए उन्होंने योजनाएं बनाईं और उन पर काम...
अली खामेनेई के विदेशी शिया लड़ाके, 5000 की फौज ने ईरान में प्रदर्शन कुचला
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अली खामेनेई के विदेशी शिया लड़ाके, 5000 की फौज ने ईरान में प्रदर्शन कुचला

तेहरान: ईरान में करीब तीन हफ्ते से जारी विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए अयातुल्ला अली खामेनेई के शासन ने कथित तौर पर विदेश से आए शिया मिलिशिया लड़ाकों की मदद ली। रिपोर्टों के अनुसार, इराक से आए करीब 5,000 शिया लड़ाके धार्मिक तीर्थयात्रियों का बहाना बनाकर ईरान में दाखिल हुए और प्रदर्शनकारियों को कुचलने में सक्रिय भूमिका निभाई। मानवाधिकार समूहों और स्थानीय सूत्रों के हवाले से खबर है कि इन मिलिशिया लड़ाकों ने आक्रामक कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिससे करीब 2,600 लोगों की मौत हुई। ईरानी सुरक्षा बलों के कुछ हिस्सों ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने से हिचकिचाई, लेकिन विदेशी लड़ाकों ने यह कार्य सौंपे जाने के बाद बिना किसी रोक-टोक के कार्रवाई की। विदेशी मिलिशिया की भूमिका ये लड़ाके इराक के पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) से जुड़े समूहों—जैसे कताइब हिजबुल्लाह, हरकत हिजबुल्ल...
ग्रीनलैंड में कोल्ड वार 2.0: आर्कटिक में बन रहे नए कॉरिडोर, अमेरिका, चीन और रूस की टकराहट
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ग्रीनलैंड में कोल्ड वार 2.0: आर्कटिक में बन रहे नए कॉरिडोर, अमेरिका, चीन और रूस की टकराहट

वॉशिंगटन/नई दिल्ली: आर्कटिक में पिघलती बर्फ ने दुनिया के भू-राजनीतिक नक्शे को बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस क्षेत्र में बनने वाले नए समुद्री रास्ते—विशेषकर ग्रीनलैंड के पास—भविष्य की ग्लोबल सप्लाई चेन और शक्ति संतुलन पर गहरा असर डाल सकते हैं। इसी कारण अमेरिका, चीन और रूस ग्रीनलैंड और इसके आसपास के क्षेत्रों पर अपनी पकड़ मजबूत करने में जुट गए हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की महत्वाकांक्षा रखते हैं। उनका मकसद केवल रणनीतिक रूप से पश्चिमी गोलार्ध को सुरक्षित करना ही नहीं, बल्कि चीन और रूस को आर्कटिक में बढ़ते प्रभाव से रोकना भी है। अमेरिकी योजना के तहत तकनीकी श्रेष्ठता, वित्तीय लाभ और सुरक्षा आधारित व्यापार को मजबूती देना प्राथमिक लक्ष्य है। आर्कटिक कॉरिडोर: नया ग्लोबल हब ग्रीनलैंड से होकर गुजरने वाले दो प्रमुख मार्ग इस क्षेत्र की महत्वाकांक्षा...
कश्मीर में मस्जिदों का डेटा जुटाने पर पाकिस्तान ने उगला जहर, कहा- मुस्लिमों को डराने की कोशिश
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कश्मीर में मस्जिदों का डेटा जुटाने पर पाकिस्तान ने उगला जहर, कहा- मुस्लिमों को डराने की कोशिश

इस्लामाबाद/श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में मस्जिदों, इमामों और मस्जिद कमेटियों के अधिकारियों का डेटा जुटाने को लेकर पाकिस्तान ने भारत पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने शनिवार को बयान जारी कर इसे धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया और कहा कि इसका मकसद मुस्लिम आबादी को डराना और उन्हें हाशिए पर धकेलना है। पाकिस्तान ने इस कदम को “धर्म और विश्वास की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन” करार दिया। मंत्रालय ने कहा कि धार्मिक अधिकारियों की निजी जानकारी, तस्वीरें और सांप्रदायिक जुड़ाव का डेटा इकठ्ठा करना व्यवस्थित उत्पीड़न के बराबर है। पाकिस्तान ने एक बार फिर कहा कि वह कश्मीरियों के साथ खड़ा रहेगा और उनके खिलाफ होने वाले किसी भी प्रकार के धार्मिक उत्पीड़न का विरोध करेगा। क्या है मामला? जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मस्जिदों और इमामों से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए चार पन्नों का फॉ...
ट्रंप अहंकारी राजा, 1000 हाथियों से स्वागत करें: फरीद जकारिया ने बताया भारत-अमेरिका रिश्तों को सुधारने का तरीका
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ट्रंप अहंकारी राजा, 1000 हाथियों से स्वागत करें: फरीद जकारिया ने बताया भारत-अमेरिका रिश्तों को सुधारने का तरीका

वॉशिंगटन: अमेरिका के दिग्गज पत्रकार फरीद जकारिया ने डोनाल्ड ट्रंप की भारत नीति और पाकिस्तान को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप की सोच एक अहंकारी राजा जैसी है, लेकिन भारत-अमेरिका संबंध सुधारने की पहल प्रधानमंत्री मोदी को करनी होगी। बरखा दत्त को दिए इंटरव्यू में फरीद जकारिया ने बताया कि ट्रंप को तारीफ और भव्य स्वागत पसंद है। उन्होंने कहा, "उन्हें 1000 हाथियों, महाराजाओं, अंबानी-अडानी के साथ शानदार दावत दीजिए!" जकारिया ने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका के संबंधों में हुए नुकसान की भरपाई अभी भी संभव है, लेकिन इसके लिए मोदी को ही पहल करनी होगी। ट्रंप से कैसे बढ़ा सकते हैं भारत का फायदा फरीद जकारिया ने कहा कि ट्रंप बहुत अच्छी तरह समझते हैं कि उनके हाथ में कौन सा कार्ड है और कहां उन्हें बढ़त मिल सकती है। चीन के खिलाफ लगाए गए टैरिफ और उसकी प्रतिक्रिया के उदाहरण के जरिए उन्होंने स्...
यूक्रेन में तबाही मचाने वाले शाहेद-136 से लेकर हदीद-110 तक, ईरान के ये 5 घातक ड्रोन बने अमेरिका की चिंता
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यूक्रेन में तबाही मचाने वाले शाहेद-136 से लेकर हदीद-110 तक, ईरान के ये 5 घातक ड्रोन बने अमेरिका की चिंता

तेहरान: भले ही ईरान अब तक परमाणु हथियार बनाने में सफल न हो पाया हो, लेकिन उसकी सैन्य ताकत लगातार बढ़ती जा रही है। खासतौर पर ड्रोन और मिसाइल तकनीक के क्षेत्र में ईरान ने ऐसी क्षमता विकसित कर ली है, जिसने अमेरिका और उसके सहयोगियों की चिंता बढ़ा दी है। ईरान के हथियार भंडार में मौजूद अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स (UAV) इतने घातक माने जा रहे हैं कि किसी भी संभावित हमले से पहले अमेरिका को सौ बार सोचने पर मजबूर कर रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, ईरान के ये ड्रोन न केवल इजरायल बल्कि मिडिल ईस्ट में तैनात अमेरिकी सैन्य ठिकानों और यहां तक कि एयरक्राफ्ट कैरियर तक को गंभीर नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखते हैं। ईरान ने अपनी रणनीतिक सैन्य नीति में ड्रोन को अहम स्थान दिया है और इन्हें खासतौर पर लंबी दूरी के हमलों के लिए डिजाइन किया गया है। आत्मघाती ड्रोन में ईरान की बड़ी ताकत ईरान के पास कम से कम 10 तरह के आत्म...