
ब्रसेल्स। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को समाप्त कराने के लिए यूरोपीय संघ ने भारत से अहम भूमिका निभाने की अपील की है। यूरोपीय संघ की विदेश मामलों की उच्च प्रतिनिधि एवं यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कैलस ने कहा है कि भारत अपने रूस के साथ घनिष्ठ संबंधों का उपयोग कर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर युद्धविराम के लिए दबाव बनाए।
काजा कैलस का यह बयान भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर हुई बातचीत के बाद सामने आया है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ रूस से अस्तित्व का खतरा महसूस कर रहा है और चाहता है कि यह युद्ध जल्द से जल्द समाप्त हो।
16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कैलस ने कहा,
“हम चाहते हैं कि यह युद्ध खत्म हो। यूक्रेन एक साल पहले ही बिना किसी शर्त के युद्धविराम के लिए सहमत हो गया था, लेकिन रूस केवल बातचीत का नाटक कर रहा है। वास्तविक रूप से कोई गंभीर प्रयास नहीं दिख रहा।”
रूस पर नागरिक ढांचे को निशाना बनाने के गंभीर आरोप
यूरोपीय संघ ने रूस पर यूक्रेन के नागरिक बुनियादी ढांचे को जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप लगाया है। कैलस के अनुसार, रूस के लगभग 93 प्रतिशत हमले स्कूलों, अस्पतालों, आवासीय इलाकों और ऊर्जा ढांचे जैसे नागरिक ठिकानों पर किए गए हैं। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का खुला उल्लंघन बताया।
कैलस ने कहा कि रूस का उद्देश्य युद्ध के मैदान में जीत हासिल करने के बजाय यूक्रेनी नागरिकों को अधिकतम पीड़ा पहुंचाकर उन्हें आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करना है। उन्होंने इसे शांति स्थापना के प्रयासों के खिलाफ बताया।
भारत से दबाव बनाने की स्पष्ट मांग
यूरोपीय संघ का मानना है कि भारत के रूस के साथ पारंपरिक और मजबूत रिश्ते हैं, जिनका उपयोग शांति बहाली के लिए किया जा सकता है। इसी वजह से भारत से आग्रह किया गया है कि वह रूस पर युद्ध रोकने के लिए कूटनीतिक दबाव बनाए।
हालांकि, भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते के बाद जारी संयुक्त बयान में रूस या यूक्रेन युद्ध का प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं किया गया, लेकिन काजा कैलस के बयान से यह साफ है कि यूरोपीय संघ भारत को इस संकट में एक अहम मध्यस्थ के रूप में देख रहा है।
यूरोपीय संघ ने यह भी कहा कि यह युद्ध केवल यूरोप के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए भी नुकसानदेह है और स्थायी शांति सभी के हित में है।