
ढाका: चीन और बांग्लादेश के बीच रक्षा सहयोग को नई दिशा देते हुए ड्रोन और अनमैन्ड एरियल व्हीकल (UAV) निर्माण को लेकर एक अहम समझौता किया गया है। इस समझौते के तहत बांग्लादेश में UAV के निर्माण और असेंबली के लिए एक अत्याधुनिक संयंत्र स्थापित किया जाएगा, जिसमें तकनीक हस्तांतरण (टेक्नोलॉजी ट्रांसफर) का भी प्रावधान शामिल है। इस कदम को दक्षिण एशिया की रणनीतिक स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह समझौता बांग्लादेश वायुसेना (BAF) और चीन की सरकारी रक्षा कंपनी चाइना इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी ग्रुप कॉर्पोरेशन (CETC) के बीच हुआ है। समझौते का उद्देश्य बांग्लादेश में स्वदेशी UAV निर्माण क्षमता विकसित करना है।
ढाका में लगेगा UAV मैन्युफैक्चरिंग प्लांट
इस समझौते के तहत BAF और CETC मिलकर ढाका में एक आधुनिक UAV निर्माण एवं असेंबली प्लांट स्थापित करेंगे। बांग्लादेश वायुसेना ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर भी इस समझौते की पुष्टि की है। समझौता हस्ताक्षर समारोह वायुसेना मुख्यालय में आयोजित किया गया, जिसमें एयर चीफ मार्शल हसन महमूद खान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
बयान में कहा गया है कि इस सहयोग में तकनीक हस्तांतरण, क्षमता निर्माण, औद्योगिक कौशल विकास और संयुक्त तकनीकी अनुसंधान शामिल होंगे। इससे बांग्लादेश को UAV उत्पादन के क्षेत्र में दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद मिलेगी।
लड़ाकू और बहुउद्देश्यीय ड्रोन का होगा निर्माण
शुरुआती चरण में बांग्लादेश वायुसेना के लिए वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग (VTOL) क्षमता वाले मीडियम-एल्टीट्यूड लॉन्ग-एंड्योरेंस (MALE) UAV का निर्माण और असेंबली की जाएगी। भविष्य में बांग्लादेश अपने स्वयं के UAV विकसित करेगा, जिनका उपयोग सैन्य अभियानों के साथ-साथ मानवीय सहायता और आपदा प्रबंधन कार्यों में भी किया जाएगा।
भारत की सुरक्षा पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन-बांग्लादेश रक्षा सहयोग का क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन पर असर पड़ सकता है। शेख हसीना सरकार के पतन के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने चीन के साथ सैन्य और रणनीतिक संबंध तेज़ी से बढ़ाए हैं। भारत पहले से ही चीन और पाकिस्तान के साथ सीमाओं पर सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है और ऐसे में बांग्लादेश की दिशा में बढ़ते चीन के प्रभाव को नई चिंता के रूप में देखा जा रहा है।
हाल के वर्षों में चीन ने बांग्लादेश में अपने रक्षा और बुनियादी ढांचा निवेश को बढ़ाया है। इसे पूर्वोत्तर भारत के सामरिक परिदृश्य से जोड़कर भी देखा जा रहा है।