ग़ज़लांजलि साहित्यिक संस्था की काव्य गोष्ठी में बहा भावनाओं का सैलाब
“बात जो दिल से निकलती है…” ने बांधा समांउज्जैन। रूपांतरण दशहरा मैदान में ग़ज़लांजलि साहित्यिक संस्था द्वारा आयोजित काव्य गोष्ठी में शब्दों और भावनाओं का सुंदर संगम देखने को मिला। दीप प्रज्ज्वलन और सामूहिक सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. श्रीकृष्ण जोशी ने की।
प्रमुख ग़ज़लकार डॉ. अखिलेश चौरे ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति “ग़ज़ल बात दिल से निकलती है असर रखती है, निकल के दिल से ये दिल का ही सफ़र करती है…” से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
विनोद काबरा ने अपनी कविता “वोट समाज के समत्व, राष्ट्रधर्म, स्वराज है, वोट राष्ट्र रूपिणी पुनीत है, पवित्र है…” के माध्यम से लोकतंत्र का सार प्रस्तुत किया।रामदास समर्थ ने जीवन दर्शन पर आधारित रचना “है सरल जीएना ये जीवन कठिन, आ तू सिर्फ जी ले इंसान बन के…” सुनाकर मन को छू लिया।
सत्यनारायण सत्येन्द्र ...







