Monday, February 9

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सऊदी अरब में भारतीयों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणी, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
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सऊदी अरब में भारतीयों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणी, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

रियाद: सऊदी अरब में भारतीयों के प्रति असहमति और नस्लीय भेदभाव के मामले हालिया महीनों में लगातार बढ़ते नजर आ रहे हैं। भारत और सऊदी अरब के बीच संबंध अच्छे हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स अलग रवैया अपना रहे हैं। हाल ही में राजधानी रियाद में आयोजित एक बिजनेस एग्ज़िबिशन के दौरान एक भारतीय एग्ज़िबिटर को उसके धर्म के आधार पर निशाना बनाया गया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो क्लिप में एक सऊदी नागरिक भारतीय कंपनी के स्टॉल पर खड़े कर्मचारियों से बहस करता दिख रहा है। वह यह कहते सुने जा सकते हैं कि कंपनी में सभी कर्मचारी हिंदू हैं और किसी मुस्लिम को नहीं रखा गया। यूएई के पॉलिटिकल एनालिस्ट अमजद ताहा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से यह वीडियो साझा किया। उन्होंने इसे खुला नस्लवाद बताया और सऊदी नागरिक के बर्ताव की आलोचना की। ताहा ने कहा, “एक सऊदी नागरिक भारतीय एग्ज़िबिटर के हिंदू होने और रियाद एग्ज़िबिशन ...
रमजान 2026: दुनिया में कब से शुरू होगा पवित्र महीना, जानें भारत, सऊदी, UAE और पाकिस्तान का टाइमटेबल
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रमजान 2026: दुनिया में कब से शुरू होगा पवित्र महीना, जानें भारत, सऊदी, UAE और पाकिस्तान का टाइमटेबल

रियाद/बोगोटा/नई दिल्ली: रमज़ान का पवित्र महीना जैसे-जैसे करीब आ रहा है, मुसलमान रोज़ा रखने और नमाज़ पढ़ने की तैयारी में जुट गए हैं। हर साल की तरह इस बार भी रमज़ान की शुरुआत नए चांद के दिखने पर निर्भर करेगी, जो अलग-अलग देशों में अलग-अलग हो सकता है। सऊदी अरब के एमिरेट्स एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी के मुताबिक, इस साल का “विंटर रमज़ान” गुरुवार, 19 फरवरी 2026 को शुरू होने की उम्मीद है। बुधवार, 18 फरवरी की शाम को रमज़ान 1447 AH का चांद दिखेगा। 1447 AH का मतलब हिजरी कैलेंडर में इस्लामिक साल 1447 है। सोसाइटी के चेयरमैन इब्राहिम अल-जरवान ने बताया कि इस साल रोज़े रखने का समय लगभग 12 घंटे 45 मिनट से शुरू होगा और जैसे-जैसे महीना वसंत की ओर बढ़ेगा, यह धीरे-धीरे बढ़ता जाएगा। क्यों है तारीखों को लेकर भ्रम:इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमी सेंटर (IAC) और अमीरात एस्ट्रोनॉमी सोसाइटी के खगोलीय गणनाओं के अनुसार, 17 फरवरी 20...
स्वीडन के ग्रिपेन फाइटर जेट ने राफेल को छोड़ा पीछे, कोलंबिया ने फ्रांसीसी विमान को रेस से बाहर किया
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स्वीडन के ग्रिपेन फाइटर जेट ने राफेल को छोड़ा पीछे, कोलंबिया ने फ्रांसीसी विमान को रेस से बाहर किया

बोगोटा: कोलंबिया ने फ्रांस को बड़ा झटका देते हुए राफेल लड़ाकू विमान खरीदने से इनकार कर दिया और स्वीडन के ग्रिपेन E/F फाइटर जेट को चुन लिया। कोलंबिया पहले राफेल खरीदने पर विचार कर रहा था, लेकिन तकनीकी, वित्तीय और रणनीतिक कारणों से ग्रिपेन को बेहतर विकल्प माना। कोलंबिया और स्वीडन के बीच 14 नवंबर 2025 को समझौते पर साइन किया गया। इसके तहत 17 नए ग्रिपेन लड़ाकू विमानों की खरीद होगी – 15 सिंगल-सीट ग्रिपेन E और 2 ट्विन-सीट ग्रिपेन F। डील में तकनीकी-ऑपरेशनल ट्रेनिंग, लॉजिस्टिक्स सपोर्ट और हथियार शामिल हैं, जिसकी कीमत करीब 220 मिलियन डॉलर प्रति विमान है। राफेल क्यों हुआ बाहर:ऑडिट रिपोर्ट में बताया गया कि राफेल की कीमत अधिक होने के साथ-साथ किसी भी कंपोनेंट का टेक्नोलॉजी ट्रांसफर फ्रांस तैयार नहीं था। वहीं, स्वीडिश ग्रिपेन डील में सेंसर, एवियोनिक्स, हथियार और इंफ्रास्ट्रक्चर सहित कई महत्वपूर्ण तकनीक...
लीबिया के तानाशाह गद्दाफी के बेटे सैफ अल-इस्लाम की हत्या: पिता की तरह ही क्रूर, विपक्षियों को कहते थे ‘चूहे’
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लीबिया के तानाशाह गद्दाफी के बेटे सैफ अल-इस्लाम की हत्या: पिता की तरह ही क्रूर, विपक्षियों को कहते थे ‘चूहे’

त्रिपोली: उत्तरी अफ्रीका के क्रूर तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी के बेटे सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी को उनके घर में घुसकर गोलियों से भून दिया गया। सैफ 53 साल के थे और उन्हें एक समय अपने पिता के बाद लीबिया का सबसे प्रभावशाली शख्स माना जाता था। उनके कार्यालय ने मंगलवार को बयान जारी कर कहा कि ज़िंटान में चार अज्ञात बंदूकधारियों ने हमला किया और उनकी हत्या कर दी। सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी को अपने पिता से अलग, उदारवादी और पश्चिमी-अनुकूल नेता माना जाता था। उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई की थी और फर्राटेदार अंग्रेज़ी बोलने में माहिर थे। कई अंतरराष्ट्रीय सरकारों की नजर में वे लीबिया का स्वीकार्य चेहरा थे। लेकिन 2011 में अरब स्प्रिंग के दौरान विद्रोह भड़का, तो सैफ ने अपने कबीले की वफादारी दिखाई और विरोधियों पर क्रूर कार्रवाई के लिए जिम्मेदार बने। उन्हें प्रदर्शनकारियों के कत्लेआम और उनके सुरक्षा बलों ...
यूक्रेन में रूसी टैंकों की तबाही: T-72 और T-80 की कब्र, भारत को भी सतर्क रहने की जरूरत
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यूक्रेन में रूसी टैंकों की तबाही: T-72 और T-80 की कब्र, भारत को भी सतर्क रहने की जरूरत

कीव/मॉस्को: यूक्रेन युद्ध ने आधुनिक युद्ध की नई चुनौतियां सामने रख दी हैं। यूक्रेनी सेना ने रूसी टैंकों T-72 और T-80 को बड़े पैमाने पर निशाना बनाकर उन्हें बेकार कर दिया है। यूक्रेन में युद्ध का नया तरीका अपनाते हुए ड्रोन और AI आधारित सिस्टम ने भारी बख्तरबंद टैंकों को भी प्रभावहीन साबित कर दिया है। युद्ध के मैदान में जगह-जगह रूसी टैंकों के कबाड़ देखे जा सकते हैं, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि पारंपरिक टैंकों का युग क्या समाप्त हो रहा है। रूस के मिलिट्री-थिंक टैंक CAST ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रूस का “ऑब्जेक्ट 195” और “आर्माटा” टैंक प्रोग्राम नई पीढ़ी के मेन बैटल टैंक बनाने में असफल रहा है। इसकी वजह से रूस पुराने T-72 और T-80 मॉडल के मॉडर्न वेरिएंट पर निर्भर रहा है। CAST की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन स्वार्म्स और AI आधारित हवाई हमले भारी भरकम टैंकों के लिए सबसे ब...
सऊदी अरब में NSA अजीत डोभाल की अचानक यात्रा: पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौता और मिडिल ईस्ट तनाव होंगे चर्चा का محور
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सऊदी अरब में NSA अजीत डोभाल की अचानक यात्रा: पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौता और मिडिल ईस्ट तनाव होंगे चर्चा का محور

रियाद: भारत के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) अजीत डोभाल आज सऊदी अरब पहुंचे। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब के बीच तनाव बढ़ा हुआ है और पाकिस्तान के साथ सऊदी अरब की रक्षा साझेदारी पर भी वैश्विक नजरें हैं। अधिकारियों के अनुसार, अजीत डोभाल सऊदी नेतृत्व के साथ मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव, ईरान-अमेरिका रिश्तों की जटिलता, पाकिस्तान-सऊदी रक्षा साझेदारी और डोनाल्ड ट्रंप के गाजा शांति योजना पर संभावित बातचीत कर सकते हैं। भारत और सऊदी अरब के बीच इस दौरे से स्ट्रैटेजिक और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने का संकेत मिलता है। रियाद एयरपोर्ट पर डोभाल का स्वागत भारत के राजदूत डॉ. सुहेल एजाज खान और सऊदी अरब के उप-राजनीतिक मामलों के मंत्री, राजदूत डॉ. सऊद अल-साती ने किया। डोभाल का यह दौरा आतंकवाद विरोधी और सुरक्षा मामलों में द्विपक्षीय सहयोग को लेकर हो रहा है। पिछले 28 जन...
बांग्लादेश चुनाव में भारत, पाकिस्तान और चीन की नजरें, ढाका में हैं तीनों के बड़े हित
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बांग्लादेश चुनाव में भारत, पाकिस्तान और चीन की नजरें, ढाका में हैं तीनों के बड़े हित

ढाका: बांग्लादेश इस महीने 12 फरवरी को आम चुनाव की ओर बढ़ रहा है। यह चुनाव पिछले दो दशकों के चुनावों से काफी अलग माना जा रहा है। इस बार अवामी लीग और शेख हसीना चुनाव मैदान से बाहर हैं, जबकि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी (JIB) मुख्य भूमिका निभा रही हैं। इस चुनाव पर भारत, पाकिस्तान और चीन की भी गहरी नजर है। ढाका के बदलते विदेश संबंध इंडिपेंडेंट यूनिवर्सिटी बांग्लादेश के विशेषज्ञ खोंडाकर ताहमिद रेजवान के अनुसार, शेख हसीना के हटने के बाद ढाका की विदेश नीति बदल गई है। भारत के साथ द्विपक्षीय संबंध कमजोर हुए हैं, पाकिस्तान के साथ गर्मजोशी भरा मेल-मिलाप हुआ है, और चीन के साथ रणनीतिक रिश्ते और गहरे हुए हैं। भारत के लिए चुनाव का महत्व अटलांटिक काउंसिल के सीनियर फेलो माइकल कुगेलमैन कहते हैं कि भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि नई सरकार भारत के साथ रिश्तों को नजरअंदाज न करे...
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यूक्रेन युद्ध में रूसी T-72 और T-80 टैंकों की हार, भारत के लिए चेतावनी

कीव/मॉस्को: यूक्रेन ने युद्ध में रूसी टैंकों का भारी नुकसान किया है। T-72 और T-80 जैसे पुराने मॉडर्न वेरिएंट भी यूक्रेन की आधुनिक युद्ध तकनीक के सामने टिक नहीं पाए। युद्ध के मैदान में यूक्रेन के AI-सक्षम ड्रोन और आधुनिक अनमैनड सिस्टम ने रूस के भारी बख्तरबंद टैंक प्लेटफॉर्म को प्रभावी रूप से नष्ट किया। रूस के पुराने टैंक क्यों हो रहे नाकाम रूसी टैंक विशेषज्ञ और CAST (सेंटर फॉर एनालिसिस ऑफ स्ट्रैटेजीज एंड टेक्नोलॉजीज़) की रिपोर्ट के अनुसार, रूस का "ऑब्जेक्ट 195" और "आर्माटा" टैंक प्रोग्राम नई पीढ़ी के मेन बैटल टैंक बनाने में सफल नहीं हो पाया। इसकी कमी के कारण रूस T-72 और T-80 जैसे पुराने टैंकों पर निर्भर रहा। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि भारी टैंक और अटैक हेलीकॉप्टर अब आधुनिक युद्ध में ड्रोन स्वार्म्स के सामने कमजोर साबित हो रहे हैं। यूक्रेन के छोटे, कम लागत वाले AI-ड्रोन ने रूसी टैंको...
अरब सागर में अमेरिकी F-35C ने मार गिराया ईरानी ड्रोन, USS अब्राहम लिंकन के पास बढ़ रहा था खतरा
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अरब सागर में अमेरिकी F-35C ने मार गिराया ईरानी ड्रोन, USS अब्राहम लिंकन के पास बढ़ रहा था खतरा

वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अरब सागर में अमेरिकी नौसेना के अत्याधुनिक F-35C स्टील्थ फाइटर जेट ने एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि यह कार्रवाई आत्मरक्षा के तहत की गई। प्रवक्ता के अनुसार, ईरानी ड्रोन अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन के करीब पहुंच रहा था, जिसके बाद वहां तैनात F-35C फाइटर जेट ने उसे हवा में ही नष्ट कर दिया। मिडिल ईस्ट में तैनात है USS अब्राहम लिंकन USS अब्राहम लिंकन को अमेरिका ने पश्चिम एशिया क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति को देखते हुए तैनात किया हुआ है। इस कैरियर पर कैरियर एयर विंग-9 (CVW-9) मौजूद है, जिसमें कुल आठ स्क्वाड्रन शामिल हैं। इनमें F-35C, F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट, EA-18G ग्राउलर, E-2D हॉकआई, CMV-22B ऑस्प्रे और MH-60R/S सीहॉक जैसे विमान औ...
पाकिस्तान को दरकिनार कर एर्दोगन ने सऊदी प्रिंस से की मुलाकात, रक्षा सहयोग पर बढ़ेंगे रिश्ते
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पाकिस्तान को दरकिनार कर एर्दोगन ने सऊदी प्रिंस से की मुलाकात, रक्षा सहयोग पर बढ़ेंगे रिश्ते

रियाद: तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने रियाद में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) से मुलाकात की। इस दौरे ने न केवल दुनिया का ध्यान खींचा, बल्कि खासतौर से पाकिस्तान के लिए यह एक बड़ा झटका साबित हुआ। पाकिस्तान की कोशिश थी कि तुर्की को अपने और सऊदी अरब के रक्षा समझौते में शामिल कर ‘इस्लामिक नाटो’ का निर्माण किया जाए। लेकिन एर्दोगन ने पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए सीधे एमबीएस से बातचीत की। तुर्की-सऊदी रक्षा समझौते पर जोर मुलाकात के बाद जारी जॉइंट डिक्लेरेशन में दोनों देशों ने मौजूदा रक्षा सहयोग समझौतों को सक्रिय करने और क्षेत्रीय सुरक्षा व स्थिरता को मजबूत करने पर सहमति जताई। इसके अलावा आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और साइबर सुरक्षा मामलों में मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता भी सामने आई। प्रतिद्वंद्वी से सहयोगी बने सऊदी-तुर्की यह एर्दोगन की दो साल में पहली रियाद यात्र...