
ढाका, 18 फरवरी 2026: बांग्लादेश में मंगलवार को नई सरकार का गठन हो गया। प्रधानमंत्री तारिक रहमान के कैबिनेट में कई नए चेहरे शामिल किए गए हैं। इनमें सबसे चर्चा का विषय है डॉक्टर खलीलुर्रहमान का विदेश मंत्री बनना।
खलीलुर्रहमान की राजनीति और अमेरिकी कनेक्शन
खलीलुर्रहमान ने मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) के रूप में काम किया और अमेरिकी समर्थक के तौर पर देखे जाते रहे हैं। विदेश मंत्री पद मिलने के बाद ढाका की विदेश नीति में बदलाव और देश की अंदरूनी राजनीति में हलचल की उम्मीद जताई जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, खलीलुर्रहमान को यह पद इसलिए भी मिला क्योंकि वह अमेरिका-बांग्लादेश ट्रेड डील और बोइंग एयरक्राफ्ट खरीद में अहम भूमिका निभा चुके हैं। सांसद न होने के बावजूद उन्हें ‘टेक्नोक्रेट’ कोटे से यह पद मिला।
सेना और खलील के बीच पुरानी तनातनी
खलीलुर्रहमान और आर्मी चीफ वकार उज जमां के बीच पुरानी खींचतान रही है। मई 2025 में खलील ने म्यांमार में रखाइन ह्यूमैनिटेरियन कॉरिडोर बनाने की कोशिश की थी, जिसे जनरल जमां ने खुलकर विरोध किया। जमां ने इसे ‘खूनी कॉरिडोर’ कहा और रोक दिया।
तनाव इतना बढ़ा कि ढाका कैंटोनमेंट में खलील की एंट्री पर बैन लगा दिया गया। खलील ने लेफ्टिनेंट जनरल कमरुल हसन को चीफ ऑफ जनरल स्टाफ के पद पर शिफ्ट करने की कोशिश की थी, ताकि आर्मी में अपने लोगों को शीर्ष स्तर पर पहुंचाकर जनरल जमां को कमजोर किया जा सके।
नई सरकार में संभावित प्रभाव
खलीलुर्रहमान को विदेश मंत्री का पद मिलने से साफ है कि वह जनरल जमां की टेंशन बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, खलील सीधे सेना के कामकाज पर असर नहीं डाल पाएंगे, लेकिन जमां के लिए एक कांटे की तरह बने रहेंगे।
जनरल जमां जून 2027 में रिटायर हो रहे हैं। उनके रिटायरमेंट तक वे अपने वफादार अफसरों को मजबूत करने की कोशिश करेंगे ताकि खलीलुर्रहमान जैसे नए खतरे से सामना कर सकें, जो अमेरिकी समर्थन से उनकी मुश्किल को और बढ़ा सकते हैं।
