
ढाका, 18 फरवरी 2026: बांग्लादेश में राजनीतिक तूफान के 18 महीनों के बाद नया प्रधानमंत्री तारिक रहमान शपथ ले चुके हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस राजनीतिक खेल के असली विजेता हैं पूर्व अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस।
यूनुस की चालाकी और राजनीतिक रणनीति
मोहम्मद यूनुस ने BNP, जमात-ए-इस्लामी और हिफाजत-ए-इस्लाम जैसे कट्टर दक्षिणपंथी और इस्लामिस्ट संगठनों को ज़रूरी मुद्दों पर एक छतरी के नीचे ला दिया। उन्होंने छात्रों के संगठन नेशनल सिटिज़न्स पार्टी (NCP) के माध्यम से नए प्रयोग करने की कोशिश की और विदेशी शक्तियों का भी समर्थन हासिल किया।
यूनुस की रणनीति के चलते पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की संभावित वापसी की आशंका कम हुई और उनका शासन कमजोर पड़ा।
18 महीनों में हासिल किए गए एजेंडे
विशेषज्ञों के अनुसार, मोहम्मद यूनुस ने अपने एजेंडे का अधिकांश हिस्सा केवल 18 महीनों में पूरा कर लिया। इसके तहत शामिल हैं:
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अमेरिका-बांग्लादेश ट्रेड डील
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पाकिस्तान के साथ सैन्य समझौते
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नॉर्थ ईस्ट इंडिया में चीनी प्रभाव बढ़ाना
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म्यांमार मिशन के लिए अमेरिका के साथ समझौता
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तुर्की और अन्य इस्लामिक देशों के साथ करीबी
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बांग्लादेश की इस्लामिस्ट शक्तियों की जेल से रिहाई
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शेख हसीना और अवामी लीग को राजनीतिक तौर पर कमजोर करना
हालांकि ढाका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर आसिफ मोहम्मद शाहन का कहना है कि देश में कानून व्यवस्था कमजोर हुई, अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई और नागरिक अधिकारों की रक्षा में कमी रही।
भविष्य की संभावनाएँ
मोहम्मद यूनुस की अब संभावित भूमिका देश के नए राष्ट्रपति के तौर पर देखी जा रही है। हालांकि BNP और अन्य दल इसे नहीं चाहेंगे। बांग्लादेशी राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूनुस सत्ता का लालच नहीं रखते और संभव है कि वे सरकार की जिम्मेदारी तारिक रहमान के हाथ में सौंप कर अपने पिछले जीवन की ओर लौट जाएँ।
इस तरह मोहम्मद यूनुस की छवि एक ऐसे नेता की बनी है, जिन्होंने राजनीतिक चालाकी और दूरदर्शिता के साथ बांग्लादेश के राजनीतिक परिदृश्य में स्थायी असर डाला।
