Thursday, February 19

चागोस डील पर ट्रंप नाराज, ब्रिटेन को चेतावनी- ‘डिएगो गार्सिया मत छोड़ना, यह ऐतिहासिक गलती होगी’

वॉशिंगटन/लंदन। हिंद महासागर में स्थित रणनीतिक रूप से बेहद अहम डिएगो गार्सिया द्वीप को लेकर अमेरिका और ब्रिटेन के बीच तनाव गहराता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच हुए चागोस द्वीपसमूह समझौते पर कड़ी नाराजगी जताते हुए ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर को खुली चेतावनी दी है कि ब्रिटेन को यह द्वीप मॉरीशस के हाथों नहीं सौंपना चाहिए।

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ट्रंप ने कहा है कि डिएगो गार्सिया का नियंत्रण खोना न केवल ब्रिटेन के लिए एक बड़ी रणनीतिक भूल होगी, बल्कि यह यूके की वैश्विक प्रतिष्ठा पर भी “धब्बा” साबित होगा।

ट्रंप का तीखा बयान- ‘लीज कोई अच्छी चीज नहीं’

डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा,
“मैं यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से कहना चाहता हूं कि देशों के मामलों में लीज कोई अच्छी चीज नहीं होती। 100 साल की लीज पर जाना एक बड़ी गलती है। डिएगो गार्सिया हिंद महासागर में रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। उसे खोना सही फैसला नहीं होगा।”

ट्रंप ने आगे कहा कि यह जमीन ब्रिटेन से दूर नहीं जानी चाहिए और यदि ऐसा हुआ तो यह ब्रिटेन जैसे मजबूत सहयोगी देश के लिए शर्मनाक स्थिति होगी।

ब्रिटेन ने दी सफाई- सुरक्षा के लिए जरूरी है डील

ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह समझौता यूके और उसके सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिहाज से आवश्यक है। ब्रिटेन ने दावा किया कि यह डील डिएगो गार्सिया में स्थित सैन्य अड्डे के भविष्य को सुरक्षित रखने का एकमात्र रास्ता है।

ब्रिटेन ने कहा कि इस समझौते से न केवल सैन्य बेस का संचालन जारी रहेगा, बल्कि ब्रिटिश नागरिकों और मित्र देशों की सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।

स्टार्मर का तर्क- बेस बचाने के लिए जरूरी समझौता

ब्रिटिश प्रधानमंत्री सर कीर स्टार्मर पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि डिएगो गार्सिया में सैन्य बेस के निरंतर संचालन को सुनिश्चित करने के लिए यह समझौता जरूरी है।

डिएगो गार्सिया चागोस द्वीपसमूह का सबसे बड़ा द्वीप है, जिसे लंबे समय से अमेरिका और ब्रिटेन की सेनाएं संयुक्त रूप से सैन्य ठिकाने के तौर पर इस्तेमाल करती रही हैं।

डिएगो गार्सिया क्यों है इतना अहम?

डिएगो गार्सिया द्वीप पर मौजूद सैन्य अड्डा अमेरिका के लिए बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक केंद्र माना जाता है। अमेरिकी सेना ने इस बेस का इस्तेमाल—

  • वियतनाम युद्ध

  • इराक युद्ध

  • अफगानिस्तान ऑपरेशन

जैसे बड़े सैन्य अभियानों में किया है।

अमेरिका के अनुसार यह बेस मिडिल ईस्ट, दक्षिण एशिया और पूर्वी अफ्रीका में सैन्य अभियानों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है।

यूके-मॉरीशस समझौते की कहानी

ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच चागोस द्वीपसमूह को लेकर बातचीत की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई थी। लंबे विचार-विमर्श के बाद मई 2025 में दोनों देशों के बीच समझौते पर हस्ताक्षर हुए।

इस समझौते के तहत ब्रिटेन चागोस द्वीपसमूह मॉरीशस को सौंपेगा, लेकिन बदले में डिएगो गार्सिया को कम से कम 99 साल की लीज पर वापस लेकर सैन्य अड्डे का संचालन जारी रखेगा।

पुराना विवाद भी बना वजह

दरअसल, ब्रिटेन ने 1965 में मॉरीशस की आजादी से तीन साल पहले चागोस द्वीपसमूह को मॉरीशस से अलग कर लिया था। यही कारण है कि वर्षों से मॉरीशस इस द्वीपसमूह पर अपना दावा करता रहा है और इसे लेकर ब्रिटेन के साथ विवाद भी जारी रहा है।

संयुक्त राष्ट्र भी चिंतित

इस डील को लेकर केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र से जुड़े पैनल ने भी चिंता जताई है। यूएन पैनल ने ब्रिटेन से इस समझौते पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।

निष्कर्ष: चागोस डील बन सकती है यूएस-यूके टकराव की वजह

डिएगो गार्सिया जैसे रणनीतिक द्वीप को लेकर ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच हुई यह डील अब अमेरिका और ब्रिटेन के रिश्तों में भी खटास पैदा कर रही है। ट्रंप की सख्त चेतावनी के बाद यह मुद्दा वैश्विक राजनीति में बड़ा विवाद बनता जा रहा है और आने वाले दिनों में यह अमेरिका-यूके संबंधों के लिए नई चुनौती साबित हो सकता है।

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