ज्योतिष पीठ शंकराचार्य विवाद: अविमुक्तेश्वरानंद के गुरु स्वरूपानंद की नियुक्ति पर भी था मतभेद माघ मेले में स्नान रोकने पर बढ़ा विवाद, सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामला
वाराणसी। माघ मेले के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के स्नान नहीं करने देने की घटना ने फिर से ज्योतिष पीठ शंकराचार्य को लेकर विवाद को तूल दे दिया है। इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं कि अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने नाम के साथ ‘शंकराचार्य’ उपाधि क्यों लगाई, जबकि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
ज्योतिष पीठ, जो काशी से सीधे जुड़ा हुआ मठ है, आदि शंकराचार्य की अद्वैत परंपरा का हिस्सा है। पीठ का शंकराचार्य बनने को लेकर वर्षों से विवाद चल रहा है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के गुरु स्वरूपानंद सरस्वती के शंकराचार्य बनने पर भी विवाद था।
इतिहास और चयन प्रक्रिया
1941 में स्वामी ज्ञानानंद ने काशी में लुप्त ज्योतिष पीठ की खोज की और शास्त्रार्थ के माध्यम से पहले शंकराचार्य का चयन किया। इसके बाद कई शंकराचार्यों का नामांकन हुआ, लेकिन अदालतों में कई बार उनका चयन अमान्य ठहराया गया। 25...










