Wednesday, January 21

पंकज चौधरी के भव्य स्वागत के पीछे क्या है सियासी रणनीति? संगठन साधने से लेकर चुनावी संदेश तक, कई मायनों में अहम माने जा रहे कार्यक्रम

 

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी का जिस तरह जगह-जगह भव्य स्वागत हो रहा है, वह इन दिनों सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। फूलों की वर्षा, लंबा काफिला, दर्जनों स्थानों पर स्वागत और यहां तक कि जेसीबी से पुष्पवर्षा—ये दृश्य सवाल खड़े कर रहे हैं कि क्या यह महज उत्साह है या इसके पीछे कोई सोची-समझी राजनीतिक रणनीति काम कर रही है।

 

14 दिसंबर को प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभालने के बाद पंकज चौधरी लगातार पश्चिम, ब्रज, अवध और गोरखपुर क्षेत्रों में परिचय और संगठनात्मक बैठकें कर चुके हैं। हर बैठक से पहले और बाद में उनका भव्य स्वागत किया जा रहा है। हाल ही में अयोध्या दौरे के दौरान लखनऊ से अयोध्या तक करीब 50 से अधिक स्थानों पर स्वागत हुआ, जिसके चलते यह यात्रा लगभग 10 घंटे में पूरी हुई। इस दौरान उनके काफिले में एक हजार से अधिक वाहन शामिल हो गए। गोरखपुर में भी एयरपोर्ट से पार्टी कार्यालय तक करीब 50 जगह स्वागत किया गया, जहां कार्यकर्ताओं ने जेसीबी से फूलों की वर्षा की।

 

संगठन में पैठ बनाने की कोशिश

पार्टी सूत्रों के अनुसार, पंकज चौधरी भले ही सात बार सांसद रहे हों और केंद्र में मंत्री पद संभाल चुके हों, लेकिन संगठनात्मक राजनीति में यह उनका पहला बड़ा दायित्व है। ऐसे में इन दौरों और स्वागत समारोहों के जरिए वे प्रदेश के हर क्षेत्र के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद स्थापित कर रहे हैं। बैठकों में वह बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं से परिचय कर रहे हैं, जिससे संगठन पर उनकी पकड़ मजबूत हो सके।

 

ओबीसी संदेश और PDA की काट

इन आयोजनों का एक अहम राजनीतिक संदेश भी है। पंकज चौधरी ओबीसी वर्ग, विशेषकर कुर्मी समाज से आते हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को यूपी में झटका लगा था और माना गया कि ओबीसी वोट बैंक में सेंध लगी। ऐसे में उनके नेतृत्व और लोकप्रिय स्वागत के जरिए यह संदेश देने की कोशिश हो रही है कि पार्टी के पास ओबीसी नेतृत्व और जनसमर्थन दोनों मौजूद हैं, जो विपक्ष के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) राजनीति की काट बन सकता है।

 

चुनाव से पहले शक्ति प्रदर्शन

तीसरा बड़ा कारण आगामी विधानसभा चुनाव है, जिसमें अब करीब एक साल का समय बचा है। इन स्वागत समारोहों और बैठकों के जरिए न केवल कार्यकर्ताओं में जोश भरा जा रहा है, बल्कि संभावित उम्मीदवारों और नेताओं की संगठनात्मक ताकत की परख भी हो रही है। चुनाव लड़ने के इच्छुक नेता इन आयोजनों में अपनी पूरी शक्ति झोंकते नजर आ रहे हैं, जिससे पार्टी को जमीनी हालात समझने में भी मदद मिल रही है।

 

कुल मिलाकर, पंकज चौधरी का यह भव्य स्वागत केवल औपचारिक नहीं, बल्कि संगठन विस्तार, सामाजिक संदेश और चुनावी तैयारी—तीनों स्तरों पर भाजपा की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

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