यूजीसी बिल के खिलाफ सवर्ण समाज का विरोध जारी, मायावती ने तीन पॉइंट में समझाई स्थिति
लखनऊ (राहुल पराशर) – विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा 15 जनवरी 2026 से लागू किए गए नए नियम 'उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026' पर सवर्ण समाज का विरोध लगातार जारी है। इस बिल के तहत सभी कॉलेज और विश्वविद्यालयों में समानता कमिटी का गठन अनिवार्य किया गया है, जिसमें एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग का प्रतिनिधित्व शामिल होगा। वहीं, सवर्ण वर्ग के प्रतिनिधित्व का अभाव इसे उनके खिलाफ माना जा रहा है।
इस मसले पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर तीन प्रमुख बिंदुओं में अपनी स्थिति स्पष्ट की:
1. जातीय मानसिकता के तहत विरोध अनुचितमायावती ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिवाद और भेदभाव को रोकने के लिए ही यह बिल लागू किया गया है। बिल का विरोध केवल उन सवर्ण वर्ग के लोगों की जातिवादी मानसिकता के...










