
लखनऊ।
उत्तर प्रदेश में यूजीसी के नए नियमों और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद को लेकर प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट पद पर तैनात पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री द्वारा दिए गए इस्तीफे को शासन ने नामंजूर कर दिया है। इसके साथ ही उन्हें निलंबित करते हुए उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
This slideshow requires JavaScript.
सोमवार को अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी के नियमों और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के कथित अपमान के विरोध में इस्तीफा देने का ऐलान किया था। इसी क्रम में मंगलवार को अयोध्या में तैनात राज्य कर विभाग के उपायुक्त प्रशांत कुमार ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ की गई टिप्पणियों से आहत होकर त्यागपत्र सौंपा था। हालांकि, शासन ने दोनों ही अधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार नहीं किए।
निलंबन के साथ जांच, कमिश्नर बने जांच अधिकारी
शासन के फैसले के तहत बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं, जिसके लिए कमिश्नर, बरेली मंडल को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान पीसीएस अधिकारी को जिलाधिकारी कार्यालय, शामली से संबद्ध किया गया है। सूत्रों के अनुसार, उन्हें शीघ्र ही आरोप पत्र भी सौंपा जाएगा।
आचरण नियमावली के उल्लंघन का आरोप
नियुक्ति विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, अलंकार अग्निहोत्री पर उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली के उल्लंघन का आरोप है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी पद पर रहते हुए कोई भी अधिकारी सीधे तौर पर किसी राजनीतिक दल या सरकार की नीतियों के खिलाफ सार्वजनिक रूप से मोर्चा नहीं खोल सकता। पीसीएस अधिकारी द्वारा राजनीतिक दल और सरकारी नीतियों के विरोध को नियमों के विपरीत माना गया है।
इस्तीफे के लिए तय है प्रोटोकॉल
नियुक्ति विभाग के सूत्रों ने बताया कि सरकारी सेवा में इस्तीफा देने की एक निर्धारित प्रक्रिया होती है। किसी भी अधिकारी को अपना त्यागपत्र सीधे नियुक्ति प्राधिकारी को भेजना होता है। तय प्रोटोकॉल का पालन न किए जाने को भी शासन ने गंभीरता से लिया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सरकारी सेवकों के आचरण, अभिव्यक्ति की सीमाओं और प्रशासनिक अनुशासन को लेकर बहस तेज कर दी है। शासन के कड़े रुख से साफ संकेत है कि सेवा नियमों की अनदेखी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।