सिंगल मदर के बच्चे पर पिता की जाति थोपना गलत, बॉम्बे हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने सिंगल मदर से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि जिस बच्ची का पालन-पोषण केवल उसकी मां ने किया हो, उसे जबरन पिता का नाम, उपनाम या जाति धारण करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चे की पहचान पर पिता की जाति थोपना पितृसत्तात्मक सोच को बढ़ावा देता है और यह संविधान द्वारा दिए गए सम्मान व समानता के अधिकार के विरुद्ध है।
यह फैसला 12 वर्षीय बच्ची द्वारा दायर याचिका पर आया, जिसमें उसने अपने स्कूल रिकॉर्ड में दर्ज नाम और जाति प्रविष्टि को बदलने की अनुमति मांगी थी। बच्ची ने स्कूल रिकॉर्ड में अपनी जाति ‘मराठा’ के स्थान पर ‘अनुसूचित जाति’ दर्ज करने की मांग की थी।
स्कूल ने नियमों का हवाला देकर किया था इनकार
मामले में स्कूल प्रशासन ने माध्यमिक विद्यालय संहिता का हवाला देते हुए बच्ची के अनुरोध को अस्वीकार कर...










