पिता की भूमिका भी है बच्चों की परवरिश में अहम पुरुष भी घर संभाल सकते हैं, पिता का योगदान कम नहीं आँका जा सकता
जब बात बच्चों की परवरिश की आती है, तो आमतौर पर सभी का ध्यान माँ की भूमिका पर जाता है। लेकिन पिता अपने बच्चों को बड़ा करने में जितनी मेहनत और समय देते हैं, उस पर चर्चा कम ही होती है।
‘पुरुष पक्ष’ सीरीज में संजीव शर्मा ने अपने अनुभव साझा किए। संजीव ने बेटे के जन्म के बाद वर्क फ्रॉम होम का विकल्प चुना और बच्चे को अपना पूरा समय दिया। उनका मानना है कि बच्चों की परवरिश सिर्फ माँ की जिम्मेदारी नहीं हो सकती।
जॉब हमेशा मां क्यों छोड़े?
समाज में यह मान्यता बनी हुई है कि बच्चे की देखभाल माँ की जिम्मेदारी है। संजीव कहते हैं कि महिला जॉब छोड़ें या न छोड़ें यह उनका व्यक्तिगत फैसला होना चाहिए, उस पर दबाव बनाना सही नहीं। पिता को भी इस जिम्मेदारी को साझा करने का विकल्प होना चाहिए।
मैंने बेटे के लिए खुद को बदला
संजीव की पत्नी मीडिया प्रोफेशनल हैं ...










