Friday, January 23

पिता की भूमिका भी है बच्चों की परवरिश में अहम पुरुष भी घर संभाल सकते हैं, पिता का योगदान कम नहीं आँका जा सकता

 

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जब बात बच्चों की परवरिश की आती है, तो आमतौर पर सभी का ध्यान माँ की भूमिका पर जाता है। लेकिन पिता अपने बच्चों को बड़ा करने में जितनी मेहनत और समय देते हैं, उस पर चर्चा कम ही होती है।

 

‘पुरुष पक्ष’ सीरीज में संजीव शर्मा ने अपने अनुभव साझा किए। संजीव ने बेटे के जन्म के बाद वर्क फ्रॉम होम का विकल्प चुना और बच्चे को अपना पूरा समय दिया। उनका मानना है कि बच्चों की परवरिश सिर्फ माँ की जिम्मेदारी नहीं हो सकती।

 

जॉब हमेशा मां क्यों छोड़े?

 

समाज में यह मान्यता बनी हुई है कि बच्चे की देखभाल माँ की जिम्मेदारी है। संजीव कहते हैं कि महिला जॉब छोड़ें या न छोड़ें यह उनका व्यक्तिगत फैसला होना चाहिए, उस पर दबाव बनाना सही नहीं। पिता को भी इस जिम्मेदारी को साझा करने का विकल्प होना चाहिए।

 

मैंने बेटे के लिए खुद को बदला

 

संजीव की पत्नी मीडिया प्रोफेशनल हैं और अपने करियर में बहुत मेहनत करती हैं। बेटे के जन्म के बाद संजीव ने जॉब छोड़ने की बजाय वर्क फ्रॉम होम चुना और घर पर रहकर बच्चे की परवरिश की।

 

पेरेंटिंग का पैटर्न बदल रहा है

 

आज कई पुरुष बच्चे की परवरिश में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इससे महिलाओं को अपने करियर पर ध्यान देने का अवसर मिलता है और उनका टैलेंट व्यर्थ नहीं जाता। नए जमाने में पिता अपने काम करने का तरीका बदलकर घर और बच्चों के लिए समय निकाल रहे हैं।

 

बदलाव घर से शुरू होता है

 

बच्चे अपने माता-पिता को देखकर सीखते हैं। अगर घर में पुरुष और महिला में भेदभाव नहीं दिखता और दोनों मिलकर घर के काम करते हैं, तो बच्चे भी भविष्य में समानता को अपनाते हैं।

 

संजीव बताते हैं, “हमारे घर में बेटा देखता है कि मां ऑफिस जाती हैं और पापा घर पर रहकर काम और बच्चे की देखभाल करते हैं। अब वह भी घर के कामों में मदद करता है और बड़े होकर पत्नी को वही आज़ादी देगा जो उसकी मां को मिली।”

 

इस तरह छोटे-छोटे बदलाव घर से शुरू होकर समाज में बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।

 

 

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