डियर डैड्स: बेटों को यौवन से जुड़ी ये 5 जरूरी बातें जरूर समझाएं, ताकि इरेक्शन और स्वप्नदोष को लेकर न हो शर्म या डर
नई दिल्ली। जैसे-जैसे बच्चे किशोरावस्था की ओर बढ़ते हैं, उनके शरीर और मन में कई तरह के बदलाव शुरू हो जाते हैं। प्यूबर्टी यानी यौवन की यह अवस्था अक्सर बच्चों के लिए उलझन, डर और शर्म का कारण बन जाती है—खासतौर पर तब, जब उन्हें सही जानकारी और मार्गदर्शन नहीं मिलता। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौर में बेटों से खुलकर बात करने की जिम्मेदारी पिताओं को खुद निभानी चाहिए।
पेरेंटिंग लाइफ कोच शंशाक शर्मा के अनुसार, अगर पिता समय रहते बेटों को यौवन से जुड़ी सामान्य लेकिन जरूरी बातें समझा दें, तो वे इरेक्शन, स्वप्नदोष (वेट ड्रीम्स) और भावनात्मक बदलावों को लेकर खुद को असहज या दोषी महसूस नहीं करेंगे। आइए जानते हैं वे 5 अहम बातें, जो हर पिता को अपने बेटे से साझा करनी चाहिए।
1. सही उम्र में करें बातचीत की शुरुआत
प्यूबर्टी को लेकर बातचीत के लिए 9 से 12 साल की उम्र सबसे उपयुक्त मानी जाती है। इसी दौरा...









