
नई दिल्ली, 12 फरवरी 2026: रोमांस की दुनिया में अपनी रचनाओं के लिए जाने जाने वाले लेखक दिव्य प्रकाश दुबे का मानना है कि प्यार केवल कहने से नहीं, महसूस करने से होता है। दिव्य ने हाल ही में ‘मैंने इश्क लिखा’ सीरीज में अपने निजी जीवन और लेखन के अनुभव साझा किए।
दिव्य प्रकाश ने बताया कि उनके लिए ‘आई लव यू’ कहना दुनिया का सबसे बड़ा झूठ है। उनका मानना है कि जो लोग रोमांटिक लिखते हैं, उनकी ज़िंदगी में वह रोमांस नहीं होता। “हम अपना रोमांस अपनी राइटिंग में खर्च कर देते हैं,” उन्होंने कहा।
पापा की वजह से प्यार नहीं कर पाया: दिव्य ने अपने निजी जीवन की कहानी साझा करते हुए बताया कि उनकी अरेंज मैरिज हुई। उनके पिता सरकारी अधिकारी थे और ट्रांसफरेबल जॉब के कारण उन्हें कभी ठीक से प्रेम करने का मौका नहीं मिला। स्कूल-कॉलेज में किसी लड़की को पसंद करने के बाद भी पिता के ट्रांसफर की वजह से वे उस लड़की से दूर हो जाते। उन्होंने बताया, “प्यार की गुदगुदी महसूस हुई, लेकिन इश्क तक बात कभी नहीं पहुंची। मैंने पहला प्यार 11वीं क्लास में शाहजहांपुर में महसूस किया।”
प्यार एक फैंटेसी है: दिव्य के अनुसार, असली जिंदगी बोरिंग होती है और प्यार एक फैंटेसी, एक उम्मीद और इंतजार है। उन्होंने कहा, “हम अपनी जिंदगी की खाली जगह को भरने के लिए प्यार की तलाश करते हैं। प्यार का एहसास ‘अच्छा लगना’ है, जिसकी कल्पना हमें दुनिया की हर चीज अच्छी लगने का अहसास कराती है।”
लेखन में इश्क, निजी जिंदगी में कम: दिव्य ने अपने उपन्यास ‘मुसाफिर कैफे’ की उदाहरण दी, जिसमें कपल प्रेम के लिए नहीं बल्कि शादी के लिए मिलते हैं। यह कहानी युवाओं को उनकी वास्तविक भावनाओं से जोड़ती है। उन्होंने बताया कि उनके किताबों के पात्र, जैसे ‘मुसाफिर कैफे’ की सुधा और चंदर, पाठकों के लिए एक नई दुनिया खोलते हैं और उनकी भावनाओं को प्रतिबिंबित करते हैं।
माता-पिता की लव स्टोरी: दिव्य की किताब ‘इब्नेबतूती’ बच्चों और पेरेंट्स के रिश्तों को करीब लाती है। कई माता-पिता अपनी शादी से पहले की प्रेम कहानियां अपने बच्चों के साथ साझा करने लगे। दिव्य कहते हैं, “कहानियां हमें अपने बारे में और दुनिया के बारे में सोचने पर मजबूर करती हैं।”
स्टोरीबाजी का जादू: दिव्य प्रकाश को ऐसी कहानियां लिखना पसंद है जो पाठक के साथ हमेशा रहें। स्टेज पर ‘स्टोरीबाजी’ करते हुए वह युवाओं को जुड़ते हैं और उनकी अपनी कहानियों को महसूस करते हैं। कई युवतियां उनके पात्रों से खुद को जोड़ लेती हैं और कहती हैं, “हमें मुसाफिर कैफे के चंदर से मिलना है।”
दिव्य प्रकाश दुबे की रचनाएँ और उनके विचार यह बताते हैं कि इश्क और प्यार अलग-अलग चीजें हैं, और असली प्यार वह है जिसे महसूस किया जाए, केवल कहा नहीं।
