राजाओं की पसंद से विदेशी थालियों तक: किसानों के लिए मुनाफे का सौदा बना ‘मगही पान’
औरंगाबाद (बिहार): बिहार का मगही पान अब केवल राज्य तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि यह विदेशी थालियों तक अपनी खास खुशबू और स्वाद के कारण पहुंच चुका है। राजाओं-महाराजाओं और नवाबों की महफिलों से लेकर आम घरों के पूजा-पाठ और त्योहारों तक इसकी जगह रही है। बिहार सरकार की पान विकास योजना और किसानों की मेहनत ने इसे किसानों के लिए लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया है।
मगही पान की खासियत और इतिहास
इसका नामकरण मगध क्षेत्र के आधार पर हुआ।
मुख्य रूप से मगध प्रमंडल में इसकी खेती होती है।
बिहार के लगभग 27 जिलों में इसकी खेती प्रचलित है, जिनमें औरंगाबाद, गया, नालंदा, मधुबनी, वैशाली, मुंगेर, भागलपुर, अररिया, पूर्णिया और जमुई प्रमुख हैं।
औरंगाबाद जिला इसका मुख्य केंद्र है, विशेष रूप से देव, मदनपुर और रफीगंज प्रखंड।
किसानों के लिए क्यों लाभकारी
पान की खेती नकदी फसल है, जिससे कम जगह म...










