Thursday, June 25

West Bengal

पुणे में बंगाली बोलने पर प्रवासी मजदूर की पीट-पीटकर हत्या, ममता बनर्जी ने महाराष्ट्र सरकार को दी चेतावनी
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पुणे में बंगाली बोलने पर प्रवासी मजदूर की पीट-पीटकर हत्या, ममता बनर्जी ने महाराष्ट्र सरकार को दी चेतावनी

कोलकाता/पुणे: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुणे, महाराष्ट्र में बंगाली प्रवासी मजदूर सुखेन महतो की हत्या की निंदा की है। ममता बनर्जी ने इसे हेट क्राइम करार देते हुए दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्दी कार्रवाई नहीं हुई तो अंजाम बुरा होगा। हेट क्राइम की गंभीरता पर जोरममता बनर्जी ने ट्वीट के माध्यम से कहा, “मैं शब्दों से परे विचलित, क्रोधित और आहत हूं। सुखेन महतो, जो अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला था, उसकी पुणे में बर्बर हत्या कर दी गई। यह सीधे-सीधे हेट क्राइम है। एक युवा को उसकी भाषा, पहचान और जड़ों की वजह से निशाना बनाया गया। उसे प्रताड़ित किया गया और मार डाला गया।” परिवार और बंगाल के प्रति सहानुभूतिमुख्यमंत्री ने कहा कि सुखेन के परिवार से बंगाल पूरा खड़ा है और न्याय दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। उन्होंने आरोपियों...
मुर्शिदाबाद में शुरू हुआ ‘बाबरी मस्जिद’ का निर्माण, हुमायूं कबीर ने निकाली बाबरी यात्रा
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मुर्शिदाबाद में शुरू हुआ ‘बाबरी मस्जिद’ का निर्माण, हुमायूं कबीर ने निकाली बाबरी यात्रा

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में बहुचर्चित ‘बाबरी मस्जिद’ का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। तृणमूल कांग्रेस से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने बेलडांगा के रेजिनगर में इस मस्जिद की पहली ईंट रखकर निर्माण की औपचारिक शुरुआत की। यह मस्जिद उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित मूल बाबरी मस्जिद से प्रेरित है, जिसे 6 दिसंबर 1992 को ध्वस्त कर दिया गया था। मस्जिद निर्माण में होगा लगभग 55 करोड़ रुपये का खर्चकबीर ने बताया कि मस्जिद का निर्माण दो साल में पूरा किया जाएगा और इसकी कुल अनुमानित लागत लगभग 50-55 करोड़ रुपये होगी। मस्जिद के मुख्य द्वार की ऊँचाई 14 मीटर और चौड़ाई 5 मीटर होगी, जबकि अकेले द्वार के निर्माण पर करीब 5 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मस्जिद की नींव 6 दिसंबर, 2025 को रखी गई थी। बाबरी यात्रा 22 किलोमीटर तक सीमितमस्जिद निर्माण की जानकारी और गलतफहमियों को दूर करने के लिए कबीर ने बाबरी ...
गुवाहाटी। असम में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी हो गई है और राज्य की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई है। असम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनुराग गोयल ने जानकारी दी कि यह प्रक्रिया 10 फरवरी को समाप्त हुई, जो नवंबर से राज्य के सभी 35 जिलों में चल रही थी।  इस विशेष अभियान के तहत बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने घर-घर जाकर सत्यापन किया, ताकि मतदाता सूची को त्रुटिरहित और पारदर्शी बनाया जा सके।  5.86 लाख नए नाम जुड़े, 2.43 लाख नाम हटाए गए  मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार सत्यापन अभियान में लगभग 6.27 लाख ऐसे युवाओं की पहचान हुई जिनकी उम्र 18 वर्ष हो चुकी है या होने वाली है।  इसके अलावा अंतिम सूची में:  5.86 लाख नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए  2.43 लाख नाम मसौदा सूची से हटाए गए  उन्होंने बताया कि यह हटाए गए नाम कुल मसौदा सूची का लगभग 0.97 प्रतिशत हैं।  35 में से 24 जिलों में मतदाता संख्या घटी  निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर उपलब्ध जिलेवार आंकड़ों के अनुसार, असम के 35 जिलों में से 24 जिलों में अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या में कमी दर्ज की गई, जबकि 11 जिलों में मतदाता संख्या बढ़ी है।  आंकड़ों में यह बदलाव कुछ सौ से लेकर 30 हजार से अधिक तक दर्ज किया गया।  आदिवासी और पहाड़ी जिलों में बड़ी गिरावट  रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के तीन पहाड़ी जिलों और बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र (BTR) के अंतर्गत आने वाले पांच जिलों में मतदाता संख्या में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई।  इसके साथ ही कामरूप और कामरूप (मेट्रोपॉलिटन) जिलों में भी वोटरों की संख्या कम हुई है, जहां राज्य की राजधानी गुवाहाटी स्थित है।  मुस्लिम बहुल जिलों में वोटर बढ़े  सबसे अहम बात यह सामने आई है कि असम के अधिकांश मुस्लिम बहुल जिलों में मसौदा सूची की तुलना में अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, बहुसंख्यक आदिवासी जनसंख्या वाले जिलों में वोटरों की संख्या घटने से इस प्रक्रिया को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।  निर्वाचन अधिकारी बोले—विशेष पुनरीक्षण में गिरावट सामान्य  मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनुराग गोयल ने कहा कि अधिकारियों ने पूरी सतर्कता के साथ मतदाता सूची को अपडेट किया है और यह सुनिश्चित किया गया कि सूची अधिकतम त्रुटिरहित हो।  उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में भी जब विशेष पुनरीक्षण होता है, तो आमतौर पर मतदाता संख्या में गिरावट देखने को मिलती है, क्योंकि मृत, स्थानांतरित या फर्जी नाम हटाए जाते हैं।  जनता से अपील—मतदाता सूची में नाम जरूर जांचें  मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राज्य की जनता से अपील की है कि अंतिम सूची प्रकाशित हो चुकी है, इसलिए हर नागरिक को अपना नाम दोबारा जांच लेना चाहिए।  उन्होंने कहा कि लोग:  Voter Helpline App  voters.eci.gov.in पोर्टल  या अपने BLO से संपर्क कर सूची में अपना नाम सत्यापित कर सकते हैं।  उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी कारणवश किसी मतदाता का नाम सूची में नहीं है, तो अपडेट की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और नामांकन की अंतिम तिथि तक सूची में सुधार जारी रहेगा।
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गुवाहाटी। असम में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी हो गई है और राज्य की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई है। असम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनुराग गोयल ने जानकारी दी कि यह प्रक्रिया 10 फरवरी को समाप्त हुई, जो नवंबर से राज्य के सभी 35 जिलों में चल रही थी। इस विशेष अभियान के तहत बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने घर-घर जाकर सत्यापन किया, ताकि मतदाता सूची को त्रुटिरहित और पारदर्शी बनाया जा सके। 5.86 लाख नए नाम जुड़े, 2.43 लाख नाम हटाए गए मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार सत्यापन अभियान में लगभग 6.27 लाख ऐसे युवाओं की पहचान हुई जिनकी उम्र 18 वर्ष हो चुकी है या होने वाली है। इसके अलावा अंतिम सूची में: 5.86 लाख नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए 2.43 लाख नाम मसौदा सूची से हटाए गए उन्होंने बताया कि यह हटाए गए नाम कुल मसौदा सूची का लगभग 0.97 प्रतिशत हैं। 35 में से 24 जिलों में मतदाता संख्या घटी निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर उपलब्ध जिलेवार आंकड़ों के अनुसार, असम के 35 जिलों में से 24 जिलों में अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या में कमी दर्ज की गई, जबकि 11 जिलों में मतदाता संख्या बढ़ी है। आंकड़ों में यह बदलाव कुछ सौ से लेकर 30 हजार से अधिक तक दर्ज किया गया। आदिवासी और पहाड़ी जिलों में बड़ी गिरावट रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के तीन पहाड़ी जिलों और बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र (BTR) के अंतर्गत आने वाले पांच जिलों में मतदाता संख्या में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई। इसके साथ ही कामरूप और कामरूप (मेट्रोपॉलिटन) जिलों में भी वोटरों की संख्या कम हुई है, जहां राज्य की राजधानी गुवाहाटी स्थित है। मुस्लिम बहुल जिलों में वोटर बढ़े सबसे अहम बात यह सामने आई है कि असम के अधिकांश मुस्लिम बहुल जिलों में मसौदा सूची की तुलना में अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, बहुसंख्यक आदिवासी जनसंख्या वाले जिलों में वोटरों की संख्या घटने से इस प्रक्रिया को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। निर्वाचन अधिकारी बोले—विशेष पुनरीक्षण में गिरावट सामान्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनुराग गोयल ने कहा कि अधिकारियों ने पूरी सतर्कता के साथ मतदाता सूची को अपडेट किया है और यह सुनिश्चित किया गया कि सूची अधिकतम त्रुटिरहित हो। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में भी जब विशेष पुनरीक्षण होता है, तो आमतौर पर मतदाता संख्या में गिरावट देखने को मिलती है, क्योंकि मृत, स्थानांतरित या फर्जी नाम हटाए जाते हैं। जनता से अपील—मतदाता सूची में नाम जरूर जांचें मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राज्य की जनता से अपील की है कि अंतिम सूची प्रकाशित हो चुकी है, इसलिए हर नागरिक को अपना नाम दोबारा जांच लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोग: Voter Helpline App voters.eci.gov.in पोर्टल या अपने BLO से संपर्क कर सूची में अपना नाम सत्यापित कर सकते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी कारणवश किसी मतदाता का नाम सूची में नहीं है, तो अपडेट की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और नामांकन की अंतिम तिथि तक सूची में सुधार जारी रहेगा।

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ गया है। भाजपा नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने बुधवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर तीखा हमला बोलते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि यदि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा सत्ता में आती है, तो राज्यभर से मुगल शासकों से जुड़े नाम और निशान हटाए जाएंगे। सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल में बंगाल में बाबर जैसे “विदेशी हमलावरों” के नाम सार्वजनिक स्थानों पर बने रहेंगे, लेकिन भाजपा सरकार बनने पर ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। ‘अप्रैल तक इंतजार कीजिए, फिर देखिए क्या होता है’ भाजपा नेता ने आक्रामक तेवर दिखाते हुए कहा कि आने वाले चुनावों में भाजपा सरकार बनाएगी और उसके बाद बंगाल में मुगल शासकों से जुड़े नामों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा—“अप्रैल तक इंतजार करें, जब हम...
दक्षिण कोलकाता में मतदाता सूची संशोधन पर विवाद, भवानीपुर-बालीगंज में ‘तार्किक विसंगति’ वाले वोटरों में मुस्लिम सबसे अधिक
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दक्षिण कोलकाता में मतदाता सूची संशोधन पर विवाद, भवानीपुर-बालीगंज में ‘तार्किक विसंगति’ वाले वोटरों में मुस्लिम सबसे अधिक

कोलकाता। चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision - SIR) अभियान के दौरान दक्षिण कोलकाता के दो प्रमुख विधानसभा क्षेत्रों भवानीपुर और बालीगंज में सामने आई ‘तार्किक विसंगतियों’ (Logical Discrepancies) ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। एक अध्ययन में दावा किया गया है कि इन क्षेत्रों में विसंगति के आधार पर चिह्नित मतदाताओं में मुस्लिम समुदाय के वोटरों की संख्या असमान रूप से अधिक पाई गई है। यह अध्ययन सबार इंस्टीट्यूट द्वारा किया गया है, जिसमें SIR प्रक्रिया के दौरान चिह्नित मतदाताओं के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। भवानीपुर में 15 हजार से अधिक मतदाताओं में आधे से ज्यादा मुस्लिम अध्ययन के अनुसार, भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में तार्किक विसंगति के तहत चिह्नित कुल 15,145 मतदाताओं में से 7,846 मतदाता मुस्लिम हैं। यानी यह अनुपात करीब 52% तक पह...
ममता बनर्जी ने SIR पर चुनाव आयोग को दी चुनौती, सुप्रीम कोर्ट में दलील, दिल्ली में बनी फाइटर छवि
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ममता बनर्जी ने SIR पर चुनाव आयोग को दी चुनौती, सुप्रीम कोर्ट में दलील, दिल्ली में बनी फाइटर छवि

कोलकाता/दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग को चुनौती दी है। टीएमसी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया। ममता बनर्जी ने अपनी दलील में पश्चिम बंगाल में जारी नोटिस और एसआईआर के दायरे में आए मतदाताओं के मुद्दों का जिक्र किया। एसआईआर के विरोध को लेकर ममता बनर्जी ने दिल्ली में अपने तेवर साफ कर दिए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग को वॉट्सऐप आयोग बताकर आलोचना की और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की मांग भी उठाई। सुप्रीम कोर्ट में दलील के दौरान उनके साथ एसआईआर से प्रभावित लोगों का प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद था। जुझारू और संघर्षशील छविममता बनर्जी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत से ही संघर्षशील और जुझारू नेता के रूप में पहचान ...
बीजेपी को देशभर में चुनौती देने की क्षमता सिर्फ ममता बनर्जी में, अखिलेश यादव ने किया पूर्ण समर्थन का ऐलान
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बीजेपी को देशभर में चुनौती देने की क्षमता सिर्फ ममता बनर्जी में, अखिलेश यादव ने किया पूर्ण समर्थन का ऐलान

कोलकाता: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लेकर बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। मंगलवार को कोलकाता में मुख्यमंत्री कार्यालय नबन्ना में हुई मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि अगर देश में कोई नेता भारतीय जनता पार्टी का डटकर मुकाबला कर सकता है, तो वह ममता बनर्जी हैं। मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने ममता बनर्जी की राजनीतिक दृढ़ता और साहस की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने लगातार बीजेपी के हमलों का मजबूती से सामना किया है। उन्होंने लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए ममता बनर्जी के संघर्ष को देश के लिए महत्वपूर्ण बताया। अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की आड़ में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लागू करने की कोशिश की जा रही है, जिससे आम ल...
अमित शाह के रणनीति अनुसार नितिन नवीन ने दुर्गापुर–आसनसोल से शुरू किया मिशन बंगाल
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अमित शाह के रणनीति अनुसार नितिन नवीन ने दुर्गापुर–आसनसोल से शुरू किया मिशन बंगाल

कोलकाता: बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अपने राजनीतिक गुरु अमित शाह की “मिशन बंगाल” योजना पर काम करना शुरू कर दिया है। अपने पहले दौरे के लिए उन्होंने कोलकाता की बजाय दुर्गापुर और आसनसोल का चुनाव किया है, जहां गैर-बंगाली और हिंदी भाषी वोटरों की अच्छी संख्या है। सूत्रों के अनुसार, बीजेपी का उद्देश्य इन इलाकों में विशेषकर बिहार और पूर्वांचल के प्रवासी वोटरों को पार्टी की ओर आकर्षित करना है। पश्चिम बर्धमान की 9 विधानसभा सीटों पर नितिन नवीन के दौरे से सीधा लाभ मिलने की संभावना है। नितिन नवीन 27 और 28 जनवरी को दुर्गापुर और आसनसोल में विभिन्न बैठक और कार्यक्रमों में भाग लेंगे। उनके दौरे के तुरंत बाद खुद अमित शाह बंगाल का दौरा करेंगे और पार्टी संगठन को मजबूत करेंगे। बीजेपी ने विधानसभा चुनाव की रणनीति को क्षेत्रवार तैयार किया है। दलित, पिछड़े, ...
ग्रीन फाइल में आखिर क्या है? I-PAC चीफ के घर ED की रेड पर बवाल, सीएम ममता बनर्जी हुई आग बबूला
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ग्रीन फाइल में आखिर क्या है? I-PAC चीफ के घर ED की रेड पर बवाल, सीएम ममता बनर्जी हुई आग बबूला

    कोलकाता: पश्चिम बंगाल में आई-पेक के प्रमुख प्रतीक जैन के घर पर ईडी (Enforcement Directorate) की छापेमारी के बाद राजनीतिक हंगामा देखने को मिला। इस दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी मौके पर पहुंचीं और ईडी की टीम पर टीएमसी के इंटरनल डेटा, हार्ड डिस्क और उम्मीदवारों की लिस्ट को टारगेट करने का आरोप लगाया।   सूत्रों के अनुसार, छापेमारी के दौरान आई-पेक कार्यालय और प्रतीक जैन के घर से कुछ दस्तावेज और “ग्रीन फाइल्स” जब्त किए गए। सीएम ममता बनर्जी ने अपने काफिले में इन फाइल्स को सुरक्षित रखा। हालांकि, ग्रीन फाइल्स में क्या है, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि ईडी की कार्रवाई टीएमसी की चुनावी तैयारियों और रणनीतियों को प्रभावित करने की कोशिश है।   ममता बनर्जी ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यह काम ईडी का नहीं ...
ममता के गढ़ में नया चेहरा, बंगाल बीजेपी की पामेला गोस्वामी चर्चा में
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ममता के गढ़ में नया चेहरा, बंगाल बीजेपी की पामेला गोस्वामी चर्चा में

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के करीब आते ही बीजेपी ने ममता बनर्जी के गढ़ में अपने पाँव मजबूत करने के लिए महिला नेतृत्व पर जोर देना शुरू कर दिया है। इस बार पार्टी की महिला विंग में सबसे चर्चित नाम है पामेला गोस्वामी का। पामेला गोस्वामी, जो 2019 में बीजेपी में शामिल हुई थीं, वर्तमान में राज्य सचिव और हुगली जिले की पर्यवेक्षक हैं। पार्टी ने उन्हें युवा मतदाताओं को लुभाने और चुनावी रणनीति मजबूत करने का जिम्मा दिया है। हालांकि 2021 में पामेला का नाम ड्रग्स मामले में आया था, लेकिन बाद में उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया गया। इस बार वे ममता बनर्जी के सामने महिला नेतृत्व की भूमिका निभाने को तैयार हैं। कोलकाता में जन्मीं पामेला ने एमबीए की पढ़ाई की है और इसके बाद मॉडलिंग, एयरहोस्टेस और बंगाली फिल्मों में करियर बनाया। उन्होंने खुद की इंटीरियर डिजाइनिंग कंपनी रोकोको भी शुरू की। अब पामेल...
मौसम नूर की घरवापसी से कांग्रेस उत्साहित, मालदा में टीएमसी से पुराना किला छीनने की उम्मीद
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मौसम नूर की घरवापसी से कांग्रेस उत्साहित, मालदा में टीएमसी से पुराना किला छीनने की उम्मीद

  कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से महज तीन महीने पहले कांग्रेस ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को बड़ा राजनीतिक झटका दिया है। टीएमसी की राज्यसभा सांसद रहीं मौसम नूर ने सात साल बाद कांग्रेस में घरवापसी कर ली है। दिग्गज अल्पसंख्यक नेता स्व. अताउर गनी खान चौधरी के परिवार से जुड़ी मौसम नूर की वापसी को कांग्रेस मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे क्षेत्रों में अपनी खोई जमीन वापस पाने के अवसर के रूप में देख रही है।   मौसम नूर का राजनीतिक कद मालदा में लंबे समय से प्रभावी रहा है। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने कांग्रेस छोड़कर टीएमसी का दामन थामा था, जिसके बाद 2021 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों में करारी हार का सामना करना पड़ा। अब उनकी वापसी से कांग्रेस नेतृत्व को भरोसा है कि पार्टी इन जिलों में दोबारा मजबूती हासिल कर सकती है।   ...