
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से महज तीन महीने पहले कांग्रेस ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को बड़ा राजनीतिक झटका दिया है। टीएमसी की राज्यसभा सांसद रहीं मौसम नूर ने सात साल बाद कांग्रेस में घरवापसी कर ली है। दिग्गज अल्पसंख्यक नेता स्व. अताउर गनी खान चौधरी के परिवार से जुड़ी मौसम नूर की वापसी को कांग्रेस मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे क्षेत्रों में अपनी खोई जमीन वापस पाने के अवसर के रूप में देख रही है।
मौसम नूर का राजनीतिक कद मालदा में लंबे समय से प्रभावी रहा है। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने कांग्रेस छोड़कर टीएमसी का दामन थामा था, जिसके बाद 2021 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों में करारी हार का सामना करना पड़ा। अब उनकी वापसी से कांग्रेस नेतृत्व को भरोसा है कि पार्टी इन जिलों में दोबारा मजबूती हासिल कर सकती है।
दो बार की सांसद, संगठन में भी रही अहम भूमिका
मौसम नूर ने 2008 में अपनी मां रूबी नूर के निधन के बाद राजनीति में कदम रखा। 2009 में वह सुजापुर विधानसभा सीट से उपचुनाव जीतकर विधायक बनीं और उसी वर्ष मालदा उत्तर लोकसभा सीट से सांसद चुनी गईं। 2014 में उन्होंने दोबारा लोकसभा चुनाव जीता। 2011 में राहुल गांधी ने उन्हें पश्चिम बंगाल यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया था। बाद में वह मालदा जिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी रहीं।
2019 के लोकसभा चुनाव से पहले टीएमसी से गठबंधन की वकालत को लेकर कांग्रेस नेतृत्व से मतभेद के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ी थी। टीएमसी ने उन्हें उत्तर मालदा से उम्मीदवार बनाया, लेकिन वह भाजपा के खगेन मुर्मू से चुनाव हार गईं। इसके बाद 2020 में टीएमसी ने उन्हें राज्यसभा भेजा।
मालदा में कांग्रेस को फिर उम्मीद
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि वक्फ कानून समेत कई मुद्दों को लेकर मालदा और मुर्शिदाबाद के अल्पसंख्यक मतदाता टीएमसी से नाराज हैं। ऐसे में मौसम नूर की वापसी कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित हो सकती है। 2016 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने मालदा की 13 में से आठ सीटें जीती थीं, जबकि 2021 में पार्टी का खाता भी नहीं खुल सका था।
हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में ईशा खान चौधरी के रूप में कांग्रेस को एकमात्र सांसद मिली, जिससे दक्षिण मालदा में गनी खान चौधरी परिवार का प्रभाव फिर नजर आया। अब पार्टी को उम्मीद है कि मौसम नूर के नेतृत्व में मालदा में कांग्रेस का पुराना किला दोबारा खड़ा किया जा सकेगा।
कांग्रेस नेतृत्व यह भी मान रहा है कि मौसम नूर राज्य में पार्टी के एक मजबूत महिला चेहरे के रूप में उभर सकती हैं, जिससे आगामी विधानसभा चुनाव में वाम-कांग्रेस गठबंधन को नई धार मिल सकती है।