Thursday, June 18

Bihar

पीएम मोदी के प्रस्ताव पर नीतीश कुमार का साहसी रुख वही राजनीतिक स्टैंड, जिसके आगे अजित पवार भी हुए नतमस्तक
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पीएम मोदी के प्रस्ताव पर नीतीश कुमार का साहसी रुख वही राजनीतिक स्टैंड, जिसके आगे अजित पवार भी हुए नतमस्तक

पटना।बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हमेशा एक ऐसे नेता के रूप में देखा गया है, जो सत्ता से अधिक सम्मान, सिद्धांत और राज्यहित को प्राथमिकता देते हैं। यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रस्ताव पर लिया गया उनका एक पुराना निर्णय आज भी देश की राजनीति में उदाहरण के तौर पर याद किया जाता है—एक ऐसा साहसिक स्टैंड, जिसकी सराहना बाद में एनसीपी प्रमुख अजित पवार ने भी सार्वजनिक रूप से की थी। 0वीं बार शपथ, पटना पहुंचे थे अजित पवार नवंबर 2025 में जब नीतीश कुमार ने 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तब यह समारोह ऐतिहासिक बन गया। पटना के गांधी मैदान में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार विशेष रूप से उपस्थित हुए। इस अवसर पर अजित पवार ने कहा था— “नीतीश कुमार का 10वीं बार मुख्यमंत्री बनना न केवल बिहार, बल्कि भारतीय राजनी...
दरभंगा को जल्द मिलेगा चमचमाता बस स्टैंड फोर लेन आमस–दरभंगा पथ सहित 138 करोड़ की विकास सौगात
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दरभंगा को जल्द मिलेगा चमचमाता बस स्टैंड फोर लेन आमस–दरभंगा पथ सहित 138 करोड़ की विकास सौगात

दरभंगा।बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के दूसरे चरण में मिथिलांचल के केंद्र दरभंगा को विकास की बड़ी सौगात मिली। मुख्यमंत्री ने जिले में 138 करोड़ रुपये से अधिक की 90 विकास योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इनमें अत्याधुनिक बस पड़ाव, निर्माणाधीन दरभंगा एयरपोर्ट टर्मिनल और फोर लेन आमस–दरभंगा पथ जैसी प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने दरभंगा हवाई अड्डे पर पहुंचते ही सघन निरीक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की और विकास कार्यों की गुणवत्ता व समयसीमा की स्वयं समीक्षा की। 105 करोड़ की 50 योजनाओं का शिलान्यास, 33 करोड़ की 40 योजनाओं का उद्घाटन मुख्यमंत्री ने बताया कि दरभंगा जिले में 105 करोड़ रुपये की 50 योजनाओं का शिलान्यास 33 करोड़ रुपये की 40 योजनाओं का उद्घाटनकिया गया है। इन योजनाओं से जिले की आधारभूत संरचना, परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्...
अधूरा सपना, अधूरी कहानी  अजित पवार का बिहार प्रयोग भले ही असफल रहा
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अधूरा सपना, अधूरी कहानी अजित पवार का बिहार प्रयोग भले ही असफल रहा

पटना।महाराष्ट्र की राजनीति से बुधवार को एक अत्यंत दुखद और स्तब्ध कर देने वाली खबर सामने आई। बारामती के पास हुए भीषण विमान हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजित पवार का असामयिक निधन हो गया। इस दुर्घटना में विमान में सवार सभी छह लोगों की मौत की पुष्टि नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने की है।इस हृदयविदारक घटना के बाद देशभर में शोक की लहर दौड़ गई है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, दोनों उपमुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव समेत राज्य के तमाम वरिष्ठ नेताओं ने गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए इसे भारतीय राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। चुनावी कार्यक्रम में जाते समय हुआ हादसा जानकारी के अनुसार, 66 वर्षीय अजित पवार बुधवार सुबह मुंबई से बारामती एक चुनावी जनसभा में शामिल होने जा रहे थे। लैंडिंग के दौरान उनका विमान अच...
अजित पवार का बिहार दांव, जो सफल होता तो एनसीपी बनती राष्ट्रीय सियासत की बड़ी ताकत
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अजित पवार का बिहार दांव, जो सफल होता तो एनसीपी बनती राष्ट्रीय सियासत की बड़ी ताकत

पटना।राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख अजित पवार के आकस्मिक निधन के साथ ही भारतीय राजनीति के एक ऐसे अध्याय पर विराम लग गया, जिसमें बड़े राजनीतिक प्रयोगों और अधूरे सपनों की छाया रही। बिहार की राजनीति में एनसीपी को स्थापित करने की उनकी कोशिश भी ऐसा ही एक प्रयोग थी, जो अगर सफल होता तो पार्टी को भाजपा और कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय ताकतों की कतार में खड़ा कर सकता था। बिहार में एनसीपी का राजनीतिक सफर कभी भी मजबूत नहीं रहा। पार्टी के ढाई दशक से अधिक के अस्तित्व में वर्ष 2005 ही वह दौर रहा, जिसे एनसीपी के लिए ‘गोल्डन ईयर’ माना जाता है। इसके बाद बिहार में पार्टी लगातार हाशिये पर जाती चली गई। शुरुआती पकड़, फिर ढलान राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, 1999 में कांग्रेस से अलग होकर बनी एनसीपी की बिहार में शुरुआत अपेक्षाकृत बेहतर रही थी। सीमांचल क्षेत्र—कटिहार और पूर्णिया—में पार्टी की मौजूदगी...
फाइल दबाने की कीमत चुकानी पड़ी भारी, समीक्षा बैठक में खुली पोल डिप्टी सीएम ने थमाया तत्काल निलंबन आदेश
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फाइल दबाने की कीमत चुकानी पड़ी भारी, समीक्षा बैठक में खुली पोल डिप्टी सीएम ने थमाया तत्काल निलंबन आदेश

पटना।बिहार सरकार में कार्य में लापरवाही और अनुशासनहीनता को लेकर अब कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। उपमुख्यमंत्री सह नगर विकास एवं आवास मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने एक अहम प्रशासनिक फाइल को समय पर प्रस्तुत नहीं करने के मामले में विभाग के दो अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई से विभागीय महकमे में हड़कंप मच गया है और स्पष्ट संदेश गया है कि सरकारी कामकाज में ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निलंबित किए गए अधिकारियों में शाखा अधिकारी उमेश्वर कुमार सिंह और सहायक शाखा अधिकारी जितेंद्र कुमार शामिल हैं। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने एक महत्वपूर्ण फाइल को जानबूझकर निर्धारित समय सीमा के भीतर आगे नहीं बढ़ाया, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया प्रभावित हुई। समीक्षा बैठक में सामने आई लापरवाही यह मामला करीब एक सप्ताह पहले उस समय उजागर हुआ, जब डिप्टी सीएम विजय सिन्हा विभाग की एक उच्चस्तरीय ...
बिहार में ‘जंगलराज’ के वे कारनामे, जिन्होंने नीतीश कुमार के सत्ता पथ को किया प्रशस्त
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बिहार में ‘जंगलराज’ के वे कारनामे, जिन्होंने नीतीश कुमार के सत्ता पथ को किया प्रशस्त

बिहार की राजनीति में ‘जंगलराज’ केवल एक चुनावी नारा नहीं रहा, बल्कि वह दौर रहा जिसने राज्य की कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक क्षमता और शासन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। 1990 के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के शासनकाल में बढ़ते अपराध, जातीय नरसंहार, अपहरण उद्योग और व्यापक भ्रष्टाचार ने बिहार को राष्ट्रीय स्तर पर बदनामी के शिखर पर पहुंचा दिया। इन्हीं परिस्थितियों ने अंततः सत्ता परिवर्तन की जमीन तैयार की और नीतीश कुमार के उदय का मार्ग प्रशस्त हुआ। दिलचस्प तथ्य यह है कि ‘जंगलराज’ शब्द किसी राजनीतिक दल की उपज नहीं था। पहली बार इस शब्द का प्रयोग पटना हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश ने राज्य सरकार की बदइंतजामी पर टिप्पणी करते हुए किया था। यह टिप्पणी किसी हत्या या बलात्कार जैसे गंभीर आपराधिक मामले की सुनवाई के दौरान नहीं, बल्कि राजधानी पटना में मॉनसून के दौरान जलजमाव और अव्यवस्थित सड़कों को लेकर की गई थी। ...
नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा LIVE दरभंगा को मिल रहा 138 करोड़ की योजनाओं का तोहफा
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नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा LIVE दरभंगा को मिल रहा 138 करोड़ की योजनाओं का तोहफा

दरभंगा: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी 'समृद्धि यात्रा' के दूसरे चरण के तहत आज मिथिलांचल के केंद्र दरभंगा में मौजूद हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री जिले को 138 करोड़ रुपये से अधिक की 90 विकास योजनाओं की सौगात देंगे। यात्रा का उद्देश्य जिले में चल रहे विकास कार्यों का जायजा लेना और नई परियोजनाओं को गति देना है। मुख्यमंत्री 105 करोड़ की 50 योजनाओं का शिलान्यास और 33 करोड़ की 40 योजनाओं का उद्घाटन करेंगे। दिल्ली मोड़ स्थित हाई-टेक बस स्टैंड से लेकर निर्माणाधीन एयरपोर्ट टर्मिनल तक, मुख्यमंत्री स्वयं विकास कार्यों की गुणवत्ता और समय-सीमा की समीक्षा करेंगे। 11 प्रमुख योजनाओं का मॉडल प्रदर्शन दिल्ली मोड़ पर 88.78 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे बस पड़ाव का मुख्यमंत्री निरीक्षण करेंगे। परिसर में 11 प्रमुख विकास योजनाओं के मॉडलों की प्रदर्शनी भी आयोजित है, जिनका अवलोकन कर नीतीश कुमार प्रगति यात...
इंदिरा की सत्ता हिलाने वाले बिहार से अब राहुल के खिलाफ शंखनाद! खानदानी कांग्रेसी ने बताया डरपोक
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इंदिरा की सत्ता हिलाने वाले बिहार से अब राहुल के खिलाफ शंखनाद! खानदानी कांग्रेसी ने बताया डरपोक

पटना: इतिहास गवाह है कि बिहार से उठी विरोध की चिंगारी अक्सर दिल्ली की सत्ता हिला देती है। इंदिरा गांधी के बाद अब राहुल गांधी के खिलाफ बिहार से ही मोर्चा खुला है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और खानदानी कांग्रेसी डॉ. शकील अहमद ने पार्टी छोड़कर राहुल गांधी को 'डरपोक' और 'अक्षम' करार दिया है। उनके इस बयान ने कांग्रेस के भीतर हलचल और सियासी बहस तेज कर दी है। खानदानी कांग्रेसी ने उठाए सवालडॉ. शकील अहमद की तीन पीढ़ियों ने कांग्रेस सेवा की है। उनके दादा अहमद गफूर 1937 में विधायक बने, पिता शकूर अहमद 1952-1977 तक पांच बार विधायक रहे और शकील अहमद खुद 1985 के बाद पांच बार विधायक और केंद्रीय मंत्री रहे। लेकिन 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी और अब राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि राहुल गांधी चुनावी मुद्दों की गंभीर समझ नहीं रखते। बिहार में उन्होंने व...
बिहार: विधायक बनने के लिए जमीन बिकी, सतीश प्रसाद सिंह को उनके धैर्य ने बनाया पहला ओबीसी मुख्यमंत्री
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बिहार: विधायक बनने के लिए जमीन बिकी, सतीश प्रसाद सिंह को उनके धैर्य ने बनाया पहला ओबीसी मुख्यमंत्री

पटना: बिहार की राजनीति में 28 जनवरी 1968 ऐतिहासिक दिन बन गया। इस दिन सतीश प्रसाद सिंह बिहार के पहले अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के मुख्यमंत्री बने। हालांकि यह कार्यकाल केवल पाँच दिन का था, लेकिन उनके धैर्य और राजनीतिक कौशल ने उन्हें इतिहास में अमर कर दिया। सतीश प्रसाद सिंह का राजनीतिक सफरमुंगेर जिले के कुरचक्का गांव से आने वाले सतीश प्रसाद सिंह जमींदार परिवार से थे। राजनीति में उनकी रुचि पढ़ाई के दौरान ही जाग गई थी। उनका चुनावी सफर चुनौतियों भरा रहा। 1962: स्वतंत्र पार्टी के टिकट पर पहला चुनाव हार गए। 1964: उपचुनाव में फिर हार, यहां तक कि चुनाव जीतने के लिए जमीन भी बिक गई। 1967: तीसरी बार संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़े और पहली बार जीत दर्ज की। इस जीत ने उन्हें बिहार की राजनीति में नई पहचान दिलाई और उनके संकल्प को साबित किया। 1967 का राजनीतिक उथल...
बिहार में 28 जनवरी की वो तारीख जब पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने सामना किया अविश्वास प्रस्ताव
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बिहार में 28 जनवरी की वो तारीख जब पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने सामना किया अविश्वास प्रस्ताव

पटना: बिहार की राजनीति में 28 जनवरी ऐतिहासिक तारीख के रूप में दर्ज है। 1968 में इसी दिन महामाया प्रसाद सिन्हा की गैर-कांग्रेसी सरकार अविश्वास प्रस्ताव के कारण गिर गई थी। प्रतिभा और देशभक्ति के धनी सिन्हा ने ICS की परीक्षा पास करने के बावजूद देश सेवा चुनी और गांधी जी के आंदोलन से जुड़कर जननायक बने। मुख्यमंत्री बनने का शानदार सफर1967 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन बहुमत से दूर। संसोपा ने 68 सीटें जीतकर दूसरा स्थान प्राप्त किया। महामाया प्रसाद सिन्हा ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में केबी सहाय को पटना पश्चिम से हराकर राजनीतिक तहलका मचा दिया। इसके बाद उन्हें राजा कामाख्या नारायण सिंह के जनक्रांति दल में शामिल होने का आमंत्रण मिला, और परिणामस्वरूप 13 निर्दलीय विधायक उनके साथ आए। महामाया प्रसाद सिन्हा को मुख्यमंत्री बनाकर बड़े जनादेश का सम्मान किया गया, जबकि कर्पूरी ठ...