
पटना: इतिहास गवाह है कि बिहार से उठी विरोध की चिंगारी अक्सर दिल्ली की सत्ता हिला देती है। इंदिरा गांधी के बाद अब राहुल गांधी के खिलाफ बिहार से ही मोर्चा खुला है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और खानदानी कांग्रेसी डॉ. शकील अहमद ने पार्टी छोड़कर राहुल गांधी को ‘डरपोक’ और ‘अक्षम’ करार दिया है। उनके इस बयान ने कांग्रेस के भीतर हलचल और सियासी बहस तेज कर दी है।
खानदानी कांग्रेसी ने उठाए सवाल
डॉ. शकील अहमद की तीन पीढ़ियों ने कांग्रेस सेवा की है। उनके दादा अहमद गफूर 1937 में विधायक बने, पिता शकूर अहमद 1952-1977 तक पांच बार विधायक रहे और शकील अहमद खुद 1985 के बाद पांच बार विधायक और केंद्रीय मंत्री रहे। लेकिन 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी और अब राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए।
उनका आरोप है कि राहुल गांधी चुनावी मुद्दों की गंभीर समझ नहीं रखते। बिहार में उन्होंने वोटर अधिकार यात्रा के दौरान SIR को मुद्दा बनाने की कोशिश की, लेकिन जनता के नजरिए में यह कोई प्रभावी मुद्दा साबित नहीं हुआ। शकील अहमद का कहना है कि राहुल गांधी संगठन के आंतरिक लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं और परिवार की पकड़ इतनी मजबूत है कि बाहर के काबिल नेताओं की आवाज दब रही है।
बिहार में जिला स्तर पर भी विरोध
राहुल गांधी के खिलाफ बिहार से उठी यह आवाज अब जिले-स्तर तक फैल गई है। दरभंगा में आयोजित ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ में स्थानीय नेताओं ने राहुल गांधी और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुले तौर पर नारे लगाए। स्थानीय नेता राम नारायण ने कहा कि जब तक बिहार में टिकट की खरीद-फरोख्त बंद नहीं होगी, कांग्रेस की साख और संगठन यहां मजबूत नहीं हो पाएगा।
नतीजा: कांग्रेस के भीतर सियासी तूफान और नेतृत्व पर सवालों का दौर जारी है। बिहार से उठी यह बुलंद आवाज दिल्ली तक गूंज रही है और पार्टी के भविष्य पर गहरी छाया डाल रही है।