


सरल काव्यांजलि की मासिक गोष्ठी में हुआ अनूठा साहित्यिक आयोजन
उज्जैन। साहित्य जगत की महान विभूतियों की रचनाओं को कंठस्थ कर प्रस्तुत करना साहित्य के प्रति समर्पण और सम्मान का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस प्रकार का अभिनव प्रयोग करने के लिए सरल काव्यांजलि संस्था बधाई की पात्र है। यह विचार शिक्षाविद् डॉ. हरिमोहन बुधौलिया ने संस्था सरल काव्यांजलि की मासिक गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किए।
संस्था की ओर से जानकारी देते हुए डॉ. वंदना गुप्ता ने बताया कि गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में साहित्यकार डॉ. प्रभाकर शर्मा, समाजसेवी डॉ. मुकेश इंगले तथा वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद व्यास उपस्थित रहे।
गोष्ठी में डॉ. संजय नागर, संतोष सुपेकर, मानसिंह शरद, नितिन पोल, आशीष श्रीवास्तव ‘अश्क’, राजेन्द्र देवधरे ‘दर्पण’, डॉ. नेत्रा रावणकर, तरुण उपाध्याय, डॉ. पुष्पा चौरसिया, विजय गोपी, वी.एस. गहलोत ‘साकित’, गिरिजा देवी ठाकुर, डॉ. रफीक नागौरी, अमृता उषारिया, धनसिंह चौहान, संगीता तल्लेरा एवं डॉ. सीमा पंड्या सहित अनेक साहित्यकारों ने अपनी मौलिक रचनाओं का पाठ किया। इससे पूर्व प्रतिभागियों ने ख्यातिप्राप्त कवियों की रचनाओं का कंठस्थ वाचन कर कार्यक्रम को विशेष स्वरूप प्रदान किया।
श्रेष्ठ प्रस्तुति के लिए आशीष श्रीवास्तव ‘अश्क’, वी.एस. गहलोत ‘साकित’ एवं डॉ. रफीक नागौरी का चयन किया गया। प्रतियोगिता के निर्णायक डॉ. प्रभाकर शर्मा एवं प्रदीप सरल रहे।
कार्यक्रम में श्रीमती आशागंगा शिरढ़ोणकर ने साहित्यकार राममूरत राही के बाल लघुकथा संग्रह ‘जम्बो पैकेट’ की समीक्षा प्रस्तुत की। इस अवसर पर समाजसेवी चंद्रभान सिंह चंदेल एवं अशोक पाटनी का विशेष स्वागत एवं सम्मान किया गया।
समाजसेवी डॉ. मुकेश इंगले ने अपने उद्बोधन में सर्पों से जुड़ी विभिन्न जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम के दौरान सुप्रसिद्ध शायर बशीर बद्र को भावभीनी श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई।
कार्यक्रम के प्रारंभ में श्रीमती सुमन नागर, डॉ. तेजकुमार मालवीय, शैलेन्द्र जैन एवं संदीप यादव ने अतिथियों का स्वागत किया। संस्था की परंपरा के अनुसार राष्ट्रकवि श्रीकृष्ण सरल की प्रसिद्ध रचना ‘मैं अब मौन नहीं रह सकता’ का वाचन राजेन्द्र देवधरे ‘दर्पण’ ने किया। साथ ही इस माह जन्मदिवस वाले सदस्यों का विशेष सम्मान भी किया गया।
कार्यक्रम का सफल संचालन अमित जैन ने किया तथा अंत में संस्था अध्यक्ष डॉ. संजय नागर ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों एवं उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया।
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