Wednesday, January 28

फाइल दबाने की कीमत चुकानी पड़ी भारी, समीक्षा बैठक में खुली पोल डिप्टी सीएम ने थमाया तत्काल निलंबन आदेश

पटना।
बिहार सरकार में कार्य में लापरवाही और अनुशासनहीनता को लेकर अब कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। उपमुख्यमंत्री सह नगर विकास एवं आवास मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने एक अहम प्रशासनिक फाइल को समय पर प्रस्तुत नहीं करने के मामले में विभाग के दो अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई से विभागीय महकमे में हड़कंप मच गया है और स्पष्ट संदेश गया है कि सरकारी कामकाज में ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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निलंबित किए गए अधिकारियों में शाखा अधिकारी उमेश्वर कुमार सिंह और सहायक शाखा अधिकारी जितेंद्र कुमार शामिल हैं। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने एक महत्वपूर्ण फाइल को जानबूझकर निर्धारित समय सीमा के भीतर आगे नहीं बढ़ाया, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया प्रभावित हुई।

समीक्षा बैठक में सामने आई लापरवाही

यह मामला करीब एक सप्ताह पहले उस समय उजागर हुआ, जब डिप्टी सीएम विजय सिन्हा विभाग की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर रहे थे। बैठक के दौरान कार्यपालक अधिकारी कुमार ऋत्विक के योगदान (जॉइनिंग) से संबंधित फाइल तलब की गई। फाइल प्रस्तुत करने में अनावश्यक देरी और टालमटोल देख मंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए तत्काल जांच के आदेश दे दिए।

जांच में यह स्पष्ट हुआ कि फाइल जानबूझकर दबाकर रखी गई थी और जिम्मेदार अधिकारियों ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं किया।

जवाब से नहीं संतुष्ट हुआ विभाग

जांच रिपोर्ट के आधार पर दोनों अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। हालांकि, उनके द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण विभाग को संतोषजनक नहीं लगा। इसके बाद उपमुख्यमंत्री ने बिना देर किए दोनों अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।

अनुशासनहीनता पर ‘जीरो टॉलरेंस’

डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने साफ शब्दों में कहा कि सुशासन की सरकार में लापरवाही और काम टालने की संस्कृति के लिए कोई जगह नहीं है। महत्वपूर्ण फाइलों को दबाकर रखना या प्रक्रिया में जानबूझकर देरी करना गंभीर अनुशासनहीनता है। इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही, पारदर्शिता और समयबद्ध कार्यसंस्कृति को मजबूत करना है।

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