
मुंबई: वेस्टइंडीज के खिलाफ मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में 107 रनों की करारी हार के बाद जिम्बाब्वे के कप्तान सिकंदर रजा ने बड़ा बयान दिया है। 254 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए जिम्बाब्वे की टीम महज 147 रनों पर सिमट गई। इस हार ने टीम को झकझोर दिया, लेकिन रजा ने बहानों के बजाय कड़वे सच को स्वीकार करने पर जोर दिया।
बहानेबाजी से कुछ नहीं होगा
मैच के बाद वेन्यू और मौसम जैसी चुनौतियों पर बात करते हुए रजा ने कहा, “मैं बहानों के बारे में नहीं सोचना चाहता। अगर हम वेन्यू या मौसम के बारे में सोचेंगे, तो हम इस मैच से कुछ नहीं सीख पाएंगे। हमारे लिए महत्वपूर्ण यह है कि हम इस हार से सबक लें। अगर हम आगे बढ़ने लायक हैं, तो हमें हर जगह अच्छी क्रिकेट खेलनी होगी, चाहे वह भारत हो या श्रीलंका। वेन्यू में बदलाव मुझे परेशान नहीं करता।”
चेपॉक में भारत के खिलाफ महामुकाबला
जिम्बाब्वे का अगला मुकाबला अब भारत के साथ चेन्नई के एम. ए. चिदंबरम स्टेडियम में होना है। भारत को लेकर रजा ने बेबाक अंदाज में कहा, “जब भी जिम्बाब्वे मैदान पर उतरती है, हमारा लक्ष्य जीतना होता है। अब अगर सामने भारत है, तो भारत ही सही। दोनों टीमें अपना पिछला मैच हार चुकी हैं, इसलिए दोनों के पास खुद को साबित करने के लिए बहुत कुछ है। हम वानखेड़े से सबक लेंगे, चेन्नई की परिस्थितियों का इस्तेमाल करेंगे और बेहतर प्रदर्शन की कोशिश करेंगे।”
कहां हाथ से निकला मैच?
रजा ने हार के कारणों का विश्लेषण करते हुए बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि पिच सपाट रहेगी, लेकिन गेंद टर्न होने लगी और उन्होंने नियंत्रण खो दिया। उन्होंने कहा, “एक समय मुझे और टोनी को लग रहा था कि अगर आखिरी 7 ओवर में 18 का रन रेट भी रहा, तो मौका बन सकता था। हम बिना किसी अतिरिक्त दबाव के 12-13 रन प्रति ओवर बना रहे थे, लेकिन गुडाकेश मोती के स्पेल ने पूरे खेल का रुख बदल दिया।”
चोट और भविष्य की सीख
अपनी उंगली की चोट पर रजा ने अपडेट दिया कि कल उनका एक्स-रे होगा। हार के बावजूद उन्होंने सकारात्मक पहलू खोजते हुए कहा कि युवा गेंदबाजों को इस मैच से बहुत कुछ सीखने को मिला, जैसे धीमी पिचों पर गेंदबाजी करना और बड़े हिटर्स को रोकना। उन्होंने उम्मीद जताई कि ये अनुभव भविष्य में टीम के काम आएंगे।
