Friday, February 13

देश में गड्ढों ने ली 5 साल में 9,438 जानें, यूपी सबसे आगे; 2020 के मुकाबले 2024 में मौतें 53% बढ़ीं

नई दिल्ली। देश में खराब सड़कों और गड्ढों की समस्या अब सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि जानलेवा संकट बन चुकी है। सरकारी आंकड़ों ने एक बार फिर सिस्टम की लापरवाही की पोल खोल दी है। बीते पांच वर्षों (2020 से 2024) के दौरान देशभर में गड्ढों में गिरकर 9,438 लोगों की मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि सड़क सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की अनदेखी आम नागरिकों के लिए कितनी घातक साबित हो रही है।

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उत्तर प्रदेश सबसे आगे, आधे से ज्यादा मौतें अकेले यूपी में

इन हादसों के मामले में उत्तर प्रदेश (UP) देशभर में सबसे ऊपर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच सालों में यूपी में 5,127 लोगों की मौत गड्ढों में गिरने से हुई है। यानी पूरे देश में हुई कुल मौतों का आधा से अधिक हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश का है। यह स्थिति राज्य में सड़क सुरक्षा और मरम्मत व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

मध्य प्रदेश दूसरे और तमिलनाडु तीसरे स्थान पर

गड्ढों में गिरकर मौत के मामलों में मध्य प्रदेश दूसरे स्थान पर रहा, जहां पांच साल में 969 लोगों की जान गई। वहीं तमिलनाडु 612 मौतों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। इसके बाद ओडिशा में 425, पंजाब में 414 और असम में 395 मौतें दर्ज की गईं।

2020 के मुकाबले 2024 में मौतों में 53% की बढ़ोतरी

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने लोकसभा में पेश आंकड़ों में बताया कि गड्ढों में गिरकर मौत के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
साल 2020 में जहां 1,555 लोगों की मौत हुई थी, वहीं साल 2024 में यह संख्या बढ़कर 2,385 तक पहुंच गई। इस तरह चार साल में मौतों के आंकड़े में 53 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया है।

कुछ राज्यों में एक भी मौत नहीं, उठे सवाल

आंकड़ों में चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि बिहार, गोवा, चंडीगढ़ और आंध्र प्रदेश में इन पांच वर्षों में गड्ढों में गिरकर मौत का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ।
इसी तरह उत्तर-पूर्व के मणिपुर, नागालैंड और त्रिपुरा में भी एक भी मौत दर्ज नहीं होने की बात सामने आई है। इन आंकड़ों के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या इन राज्यों में सच में ऐसी घटनाएं नहीं हुईं, या फिर पुलिस और प्रशासन द्वारा मामलों को सही श्रेणी में दर्ज नहीं किया गया।

दिल्ली में भी दर्ज हुए 50 मामले

हाल ही में दिल्ली के जनकपुरी में गड्ढे में गिरकर युवक की मौत के बाद मामला चर्चा में आया था। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक पिछले पांच सालों में दिल्ली में ऐसे 50 मौत के मामले दर्ज किए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट को लेना पड़ा था स्वतः संज्ञान

गड्ढों से हो रही मौतों की गंभीरता को देखते हुए पहले भी न्यायपालिका को हस्तक्षेप करना पड़ा है। वर्ष 2018 में टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए थे। अदालत ने तब साफ कहा था कि गड्ढों के कारण हो रही मौतों की जानकारी सबको है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अपना काम ठीक से नहीं कर रहे।

सिस्टम पर बड़ा सवाल

इन आंकड़ों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सड़क पर बने गड्ढे केवल विकास में बाधा नहीं, बल्कि आम लोगों की जिंदगी के लिए खतरा बन चुके हैं। हर साल बढ़ते मौतों के आंकड़े यह मांग कर रहे हैं कि सड़क मरम्मत, निगरानी और जवाबदेही व्यवस्था को तुरंत मजबूत किया जाए, ताकि आने वाले समय में हजारों और परिवार अपनों को न खो दें।

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