Friday, February 13

मध्य प्रदेश का पहला ‘पेपरलेस’ बजट 18 फरवरी को, सूटकेस की जगह टैबलेट, खजाना खोलेगी सरकार

भोपाल (आकाश सिकरवार / अंकुर सिरोथिया): मध्य प्रदेश सरकार 18 फरवरी को विधानसभा में अपना पहला पेपरलेस बजट पेश करेगी। इस साल बजट की मोटी-बंदी किताबों की जगह सिर्फ वित्त मंत्री का भाषण और एक संक्षिप्त बजट हैंडआउट होगा। यह बदलाव राज्य में ई-ऑफिस और ई-कैबिनेट सिस्टम लागू होने के बाद किया जा रहा है।

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सरकार इस वर्ष विशेष रूप से कृषि क्षेत्र पर ध्यान देगी क्योंकि 2026 को कृषि वर्ष घोषित किया गया है। इसके साथ ही 2028 में होने वाले सिंहस्थ महोत्सव के लिए भी बजट में पर्याप्त राशि का प्रावधान किया जा सकता है।

बजट में नए प्रयोग और रणनीतियां

इस साल बजट में सरकार ने कुछ नए प्रयोग किए हैं। ‘नॉन-बजटरी प्रोविजन्स’ (गैर-बजटीय प्रावधान) के माध्यम से विकास परियोजनाओं और घोषणाओं के खर्च का बोझ राज्य के अपने उद्यमों, बोर्डों और निगमों के फंड से उठाया जाएगा। इसका मतलब है कि ये खर्च सीधे राज्य के वार्षिक बजट का हिस्सा नहीं होंगे, लेकिन वित्तीय गतिविधियों पर प्रभाव डालेंगे।

साथ ही, ‘रोलिंग बजट’ की नई रणनीति भी अपनाई गई है। इसमें 2026-27, 2027-28 और 2028-29 के लिए बजट तैयार किए जाएंगे, जिनकी सालाना समीक्षा और समायोजन किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे नीतियां लंबी अवधि के लिए और दूरदर्शी बनेंगी।

बजट का आकार और केंद्रीय करों की कटौती

इस साल मध्य प्रदेश का बजट पिछले साल से बड़ा होगा, अनुमानित रूप से 4.80 लाख करोड़ रुपये। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी में 0.5% की कमी से बजट लगभग 8,000 करोड़ रुपये कम होगा। वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस कमी से अगले पांच सालों में राज्य को सालाना करीब 7,500 करोड़ रुपये कम मिलेंगे, जिससे वित्तीय दबाव बढ़ सकता है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 10 फरवरी को बजट प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया और कहा कि ये वर्तमान संदर्भ के लिए बेहतर और दूरदर्शी प्रस्ताव हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल शुरू की गई ‘जीरो-बेस्ड बजटिंग’ की प्रक्रिया भी जारी रहेगी, जिसमें हर साल सभी खर्चों को नए सिरे से साबित करना होगा।

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