
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने बीते एक दशक में महिला सशक्तीकरण को केवल नारे तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे नीति, व्यवस्था और प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए जमीनी हकीकत बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। इसी दूरदर्शी सोच का परिणाम है SHe-Box पोर्टल, जो कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक प्रभावशाली डिजिटल मंच के रूप में उभरा है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा विकसित यह पोर्टल महिलाओं को कार्यस्थल पर होने वाले उत्पीड़न के मामलों में त्वरित, गोपनीय और पारदर्शी शिकायत प्रणाली प्रदान करता है। यह पहल कार्यस्थल पर महिलाओं का उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (POSH Act) को और अधिक मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रही है।
महिला नेतृत्व को केंद्र में रखकर सरकार की रणनीति
आजादी के 100वें वर्ष यानी 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने महिला नेतृत्व विकास को भारत की प्रगति का केंद्रबिंदु बनाया है। महिलाओं की आर्थिक सहभागिता लगातार बढ़ रही है। आंकड़ों के अनुसार, महिला श्रम बल भागीदारी दर 2017-18 में 23.3% से बढ़कर 2023-24 में 41.7% तक पहुंच चुकी है। ऐसे में महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण तैयार करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है।
डिजिटल इंडिया के तहत दोबारा लॉन्च हुआ SHe-Box
सरकार ने डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करते हुए 29 अगस्त 2024 को तकनीकी सुधारों के साथ SHe-Box पोर्टल को दोबारा लॉन्च किया। यह पोर्टल देशभर में गठित आंतरिक समितियों (Internal Committee – IC) और स्थानीय समितियों (Local Committee – LC) की जानकारी का केंद्रीकृत भंडार उपलब्ध कराता है।
अब महिलाएं किसी भी संस्थान या कार्यस्थल से सीधे संबंधित समिति के पास अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज करा सकती हैं। इससे न केवल शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया सरल हुई है, बल्कि मामलों के निपटारे में देरी भी कम हुई है।
शिकायत दर्ज करने से लेकर ट्रैकिंग तक की सुविधा
SHe-Box पोर्टल महिलाओं को यह सुविधा देता है कि वे शिकायत दर्ज कराने के बाद उसकी स्थिति भी ऑनलाइन देख सकें। इससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ी है और पीड़िता को बार-बार कार्यालयों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ती।
यह पोर्टल सरकारी और निजी क्षेत्र सहित सभी क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं के लिए उपलब्ध है, जिससे इसका दायरा व्यापक बनता है।
गोपनीयता की गारंटी, पीड़िता की पहचान सुरक्षित
SHe-Box पोर्टल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पूर्ण गोपनीयता व्यवस्था है। पोर्टल पर दर्ज की गई शिकायत सीधे संबंधित कार्यस्थल की आंतरिक समिति या जिले की स्थानीय समिति तक पहुंचती है। शिकायत का विवरण केवल समिति की अध्यक्ष देख सकती हैं, जिससे पीड़िता की पहचान और सम्मान सुरक्षित रहता है।
यह व्यवस्था महिलाओं को बिना डर और दबाव के अपनी बात रखने का साहस देती है।
समयबद्ध जांच और मंत्रालय की सक्रिय निगरानी
POSH अधिनियम के तहत शिकायत की जांच के लिए 90 दिनों की समयसीमा तय की गई है। इस समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय समय-समय पर डैशबोर्ड अलर्ट, ईमेल और मैसेज भेजकर निगरानी करता है। यह सक्रिय प्रणाली सरकार की उत्तरदायित्वपूर्ण और परिणाम आधारित शासन व्यवस्था को दर्शाती है।
‘भरोसे का पोर्टल’ बनता SHe-Box
आज देश में 10 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं और बड़ी संख्या में महिलाएं पहली बार संगठित और औपचारिक कार्यस्थलों का हिस्सा बन रही हैं। ऐसे समय में SHe-Box महिलाओं को यह विश्वास देता है कि संकट की घड़ी में सरकार उनके साथ खड़ी है।
संस्थागत समन्वय से बढ़ेगी कार्रवाई की गति
SHe-Box के तहत हर कार्यस्थल पर नियुक्त नोडल अधिकारी, नियोक्ता, आंतरिक/स्थानीय समिति और शिकायतकर्ता के बीच समन्वय स्थापित किया जाता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि शिकायत केवल दर्ज न हो, बल्कि उस पर ठोस कार्रवाई भी हो।
इसके अलावा यह पोर्टल बहुभाषी है, जिससे देश के अलग-अलग हिस्सों की महिलाएं भी आसानी से इसका उपयोग कर सकती हैं।
महिला सुरक्षा के लिए डिजिटल युग का बड़ा कदम
कुल मिलाकर, SHe-Box पोर्टल महिलाओं के लिए एक ऐसा मंच बनकर उभरा है, जो उन्हें भयमुक्त वातावरण, सम्मानजनक कार्यस्थल और न्याय तक सीधी पहुंच प्रदान करता है। यह पहल नारी शक्ति को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर देकर भारत के विकास में उनकी भूमिका को और अधिक सशक्त बना रही है।
