Friday, February 13

मैक्रों के भारत दौरे से पहले बड़ा रक्षा फैसला, भारत खरीदेगा 114 राफेल फाइटर जेट, रक्षा मंत्रालय ने पहली बार किया आधिकारिक ऐलान

नई दिल्ली। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के भारत दौरे से पहले भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है। रक्षा अधिग्रहण समिति (DAC) ने भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने की आवश्यकता को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ भारत की वायु शक्ति को जबरदस्त मजबूती मिलने की उम्मीद है। खास बात यह है कि रक्षा मंत्रालय ने पहली बार आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) के तहत चुना गया विमान राफेल ही होगा।

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रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह प्रस्ताव रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण समिति की बैठक में मंजूर किया गया। बैठक में कुल मिलाकर करीब 3.60 लाख करोड़ रुपये के विभिन्न सैन्य खरीद प्रस्तावों को ‘एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी’ (AoN) यानी आवश्यकता की मंजूरी दी गई।

भारत में ही बनेगा अधिकांश राफेल

रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी कि इस डील के तहत खरीदे जाने वाले अधिकांश राफेल फाइटर जेट का निर्माण भारत में ही किया जाएगा, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ को बड़ा बढ़ावा मिलने की संभावना है। यह कदम रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

वायुसेना की ताकत को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

मंत्रालय ने कहा कि MRFA (राफेल) की खरीद से भारतीय वायुसेना की युद्ध क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। इससे किसी भी प्रकार के संघर्ष में एयर डॉमिनेंस (हवाई बढ़त) स्थापित करने की क्षमता मजबूत होगी। साथ ही लंबी दूरी तक सटीक हमला करने और प्रतिरोधक क्षमता (डिटरेंस) बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

कॉम्बेट मिसाइल और हाई-एल्टीट्यूड सिस्टम की भी मंजूरी

रक्षा अधिग्रहण समिति ने वायुसेना के लिए कॉम्बेट मिसाइलों की खरीद को भी मंजूरी दी है। इससे दुश्मन के ठिकानों पर लंबी दूरी से गहरी और अत्यंत सटीक स्ट्राइक की क्षमता बढ़ेगी।

इसके अलावा, एयरशिप आधारित हाई एल्टीट्यूड स्यूडो सैटेलाइट (AS-HAPS) खरीदने की जरूरत को भी मंजूरी दी गई है। इसका उपयोग लगातार इंटेलिजेंस, निगरानी और टोही (ISR), इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस, दूरसंचार और रिमोट सेंसिंग जैसे महत्वपूर्ण सैन्य उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

थलसेना के लिए एंटी-टैंक माइंस और ओवरहॉलिंग को मंजूरी

बैठक में भारतीय थलसेना के लिए एंटी-टैंक माइंस ‘विभव’ खरीदने की आवश्यकता को भी स्वीकृति दी गई। इन माइंस का उपयोग दुश्मन की मैकेनाइज्ड सेना को रोकने या उसकी गति धीमी करने के लिए किया जाएगा।

इसके अलावा, आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल (ARV), टी-72 टैंक और BMP-II इन्फेंट्री कॉम्बैट व्हीकल के प्लेटफॉर्म ओवरहॉल (मरम्मत व उन्नयन) को भी मंजूरी दी गई है। इससे इन सैन्य वाहनों की सेवा अवधि बढ़ेगी और सेना की ऑपरेशनल तैयारियों में मजबूती आएगी।

नेवी को मिलेगी 6 P-8I विमानों की मंजूरी

भारतीय नौसेना के लिए भी रक्षा अधिग्रहण समिति ने 6 P-8I लंबी दूरी के टोही विमान खरीदने की आवश्यकता को स्वीकृति दी है। ये विमान समुद्री गश्त और निगरानी के लिए बेहद अहम माने जाते हैं। इस खरीद से नौसेना की पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता (Anti-Submarine Warfare), समुद्री निगरानी और समुद्री स्ट्राइक क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।

कोस्ट गार्ड की निगरानी क्षमता भी होगी मजबूत

कोस्ट गार्ड के लिए डोर्नियर विमानों में लगाने हेतु इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रा-रेड सिस्टम की खरीद को भी मंजूरी दी गई है। इससे समुद्री सीमा की निगरानी क्षमता और अधिक प्रभावी होगी।

रणनीतिक संदेश और अंतरराष्ट्रीय असर

विशेषज्ञों का मानना है कि 114 राफेल जेट की खरीद का निर्णय भारत की सैन्य तैयारियों को नई ऊंचाई देगा और यह फैसला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ा रणनीतिक संदेश है। माना जा रहा है कि इस डील से भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग को नई मजबूती मिलेगी, वहीं पड़ोसी देशों खासकर पाकिस्तान में इसे लेकर चिंता बढ़ना तय है।

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