Friday, February 13

दार्जिलिंग टॉय ट्रेन के 145 साल के इतिहास में पहली महिला TTE बनीं सरिता योलमो, विश्व धरोहर रेलवे में रचा नया अध्याय

नई दिल्ली/दार्जिलिंग। यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे (DHR) ने अपने 145 वर्षों के गौरवशाली इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। 55 वर्षीय सरिता योलमो को दार्जिलिंग की प्रसिद्ध हेरिटेज टॉय ट्रेन में ट्रैवलिंग टिकट एग्जामिनर (TTE) के रूप में नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही वह दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे की पहली महिला टीटीई बन गई हैं।

This slideshow requires JavaScript.

इस उपलब्धि को लेकर सरिता योलमो ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे के इतिहास में पहली महिला टीटीई बनने पर वह बेहद गौरवान्वित महसूस कर रही हैं। उन्होंने बताया कि यह सम्मान उनके लिए सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि एक सपना पूरा होने जैसा है, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।

5 फरवरी को निभाई पहली ड्यूटी, अनुभव बना यादगार

सरिता योलमो ने बताया कि उन्होंने 5 फरवरी को पहली बार न्यू जलपाईगुड़ी (NJP) से दार्जिलिंग के बीच चलने वाली विश्व प्रसिद्ध टॉय ट्रेन में टीटीई के रूप में अपनी ड्यूटी निभाई। यह सफर उनके लिए बेहद खास और यादगार बन गया।

उन्होंने कहा कि वह पहले इस ट्रेन में एक यात्री के रूप में यात्रा कर चुकी थीं, लेकिन अब उसी ट्रेन में टीटीई के रूप में जिम्मेदारी निभाना उनके लिए गर्व की बात है।

8 घंटे का सफर, रात दार्जिलिंग में ठहराव

सरिता के अनुसार, न्यू जलपाईगुड़ी से दार्जिलिंग तक करीब 88 किलोमीटर की यह यात्रा होती है, जिसे पूरा करने में लगभग 8 घंटे लगते हैं। वह सुबह 10 बजे ट्रेन में सवार होती हैं और देर शाम दार्जिलिंग पहुंचती हैं। इसके बाद वहीं रात्रि विश्राम होता है और अगले दिन वापसी की ड्यूटी रहती है।

पहली बार निभाई टीटीई की भूमिका, चुनौती को बनाया अवसर

सरिता योलमो ने स्वीकार किया कि इससे पहले उन्होंने कभी टीटीई के रूप में काम नहीं किया था, लेकिन उन्होंने इस जिम्मेदारी को एक चुनौती की तरह स्वीकार किया और आत्मविश्वास के साथ नई भूमिका निभाई।

रेलवे अधिकारियों ने भी सराहा, बताया ऐतिहासिक उपलब्धि

नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे के सीपीआरओ केके शर्मा ने बताया कि सरिता योलमो इस विश्व धरोहर रेलवे पर प्रतिष्ठित “टूर ड्यूटी” के लिए नियुक्त होने वाली पहली महिला टीटीई बन गई हैं।

वहीं दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे के अधिकारी रिषभ चौधरी ने बताया कि सरिता ने अपने करियर की शुरुआत रेलवे प्रेस से की थी। जब वह इकाई बंद हुई, तो उन्होंने पीछे हटने के बजाय नई जिम्मेदारी को अपनाया और वाणिज्यिक विभाग में अपनी जगह बनाई। इसके बाद उन्होंने न्यू जलपाईगुड़ी में टीटीई के रूप में कार्यभार संभाला।

पहले TC के रूप में तैनात हुई थीं महिला अधिकारी

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले इस रूट पर मधु लांबा नामक महिला अधिकारी को टिकट कलेक्टर (TC) के रूप में नियुक्त किया गया था, लेकिन टीटीई के रूप में सरिता योलमो पहली महिला हैं।

विश्व धरोहर रेलवे का गौरवशाली इतिहास

गौरतलब है कि दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे वर्ष 1881 से अपनी सेवाएं दे रही है। इसे यूनेस्को ने 5 दिसंबर 1999 को विश्व धरोहर सूची में शामिल कर अंतरराष्ट्रीय पहचान दी थी।

सरिता योलमो की नियुक्ति को न केवल रेलवे के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, बल्कि इसे महिला सशक्तिकरण और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का प्रतीक भी कहा जा रहा है।

Leave a Reply