
नई दिल्ली: मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के नाम को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने प्रोड्यूसर और राइटर नीरज पांडे को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने निर्देश दिए कि फिल्म का शीर्षक बदलकर शपथपत्र दाखिल किया जाए, जिसमें यह स्पष्ट किया गया हो कि फिल्म किसी भी समाज या वर्ग को बदनाम नहीं करती।
सुप्रीम कोर्ट का दो टूक आदेश
जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने कहा, “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की अपनी जगह है, लेकिन किसी को बदनाम करने का अधिकार नहीं मिलता। बोलने की आज़ादी एक चीज है, लेकिन इससे किसी को अपमानित करने का लाइसेंस नहीं मिल जाता। राई का पहाड़ मत बनाइए।”
कोर्ट ने नीरज पांडे से कहा कि जब तक वे नया शीर्षक और एफिडेविट नहीं देंगे, फिल्म को रिलीज की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और CBFC को भी नोटिस जारी किया।
विवाद की पृष्ठभूमि
मामले की जनहित याचिका अतुल मिश्रा द्वारा दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि फिल्म का नाम और कहानी ब्राह्मण समुदाय को अपमानजनक रूप में प्रस्तुत करती है। याचिका में कहा गया कि ‘पंडत’ शब्द के साथ ‘घूसखोर’ जोड़ने से जाति आधारित रूढ़ियां बढ़ती हैं और यह सार्वजनिक व्यवस्था तथा संवैधानिक मूल्यों के लिए खतरा है।
फिल्म और कलाकार
फिल्म में मनोज बाजपेयी के अलावा नुसरत भरूचा, साकिब सलीम, अक्षय ओबेरॉय और दिव्या दत्ता भी हैं। इसे नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ किया जाना था, लेकिन कोर्ट ने शीर्षक विवाद सुलझने तक रिलीज पर रोक लगा दी।
अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी 2026 के लिए तय की है। कोर्ट ने साफ कहा कि तब तक इस मामले पर कोई हल्ला-गुल्ला नहीं होना चाहिए।
