
मुंबई: महाराष्ट्र में बढ़ते सड़क हादसों और खासकर दोपहिया सवारों तथा पैदल यात्रियों की मौतों को रोकने के लिए राज्य परिवहन विभाग ने 2026 में विशेष अभियान ‘दोपहिया सवार-पैदल यात्री बचाओ’ शुरू करने का निर्णय लिया है। सभी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) को इस अभियान को लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में राज्य में 36,450 से अधिक सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 15,549 लोगों की जान गई और 32,147 से अधिक लोग घायल हुए। इनमें 57 प्रतिशत मृतक दोपहिया सवार और 21 प्रतिशत पैदल यात्री थे। अधिकारियों का कहना है कि 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को 50 प्रतिशत तक घटाने का लक्ष्य है और उसी को ध्यान में रखकर यह अभियान चलाया जा रहा है।
गूगल मैप पर प्लॉट किए जाएंगे दुर्घटना स्थल
अभियान के तहत, जिन जिलों में दोपहिया दुर्घटनाएं अधिक होती हैं, वहां के प्रमुख राष्ट्रीय और राज्य मार्गों पर हेल्मेट नियमों को सख्ती से लागू किया जाएगा। सड़क सुरक्षा कक्ष के माध्यम से मोटर वाहन निरीक्षक पिछले तीन वर्षों के दुर्घटना स्थलों का विस्तृत विश्लेषण करेंगे और इन्हें गूगल मैप पर प्लॉट करेंगे। रंग कोड के अनुसार 2023 के लिए हरा, 2024 के लिए नारंगी और 2025 के लिए लाल रंग का उपयोग किया जाएगा।
इंटरसेप्टर वाहन और हेल्मेट जांच अनिवार्य
राज्य के आरटीओ कार्यालयों को 69 इंटरसेप्टर वाहन उपलब्ध कराए गए हैं, जिन्हें प्रमुख हाईवे मार्गों पर तैनात किया जाएगा। ये रडारयुक्त वाहन हेल्मेट नहीं पहनने वाले दोपहिया सवारों पर नजर रखेंगे। टोल नाकों पर “हेल्मेट नहीं, तो प्रवेश नहीं” बोर्ड लगाए जाएंगे और नियम तोड़ने वालों को रोकने के लिए व्हील जैमर का इस्तेमाल भी किया जाएगा।
ऑन-कैमरा ड्राइविंग टेस्ट अनिवार्य
पक्का ड्राइविंग लाइसेंस देने से पहले अब ऑन-कैमरा ड्राइविंग टेस्ट अनिवार्य किया गया है। जिन मोटर वाहन निरीक्षकों के परिणाम निर्धारित मानकों से कम होंगे, उनके मामलों के वीडियो डेटा की जांच आरटीओ अधिकारी करेंगे। विभाग का मानना है कि सख्त निगरानी और जनजागरूकता के जरिए सड़क हादसों में कमी लाई जा सकेगी।
