Thursday, February 12

JNU में निष्कासन के खिलाफ हड़ताल, छात्र संघ के चार पदाधिकारी रस्टिकेट

नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में छात्र संघ के चार पदाधिकारियों और एक पूर्व अध्यक्ष के निष्कासन के विरोध में छात्रों ने बुधवार से हड़ताल शुरू कर दी है। छात्रों का कहना है कि प्रशासन ने बिना किसी संवाद के यह कठोर कार्रवाई की है, जिसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।

This slideshow requires JavaScript.

किस वजह से हुई रस्टिकेशन

21 नवंबर को डॉ. बी. आर. आंबेडकर सेंट्रल लाइब्रेरी में फेस रिकग्निशन टेक्नॉलजी आधारित एक्सेस गेट्स में तोड़फोड़, हिंसा और प्रशासनिक काम में बाधा डालने के आरोप के चलते JNU प्रशासन ने JNUSU के चार पदाधिकारियों—प्रेसिडेंट अदिति मिश्रा, वाइस प्रेसिडेंट के. गोपिका, जनरल सेक्रेटरी सुनील यादव, जॉइंट सेक्रेटरी दानिश अली—साथ ही JNUSU के पूर्व प्रेसिडेंट नीतीश कुमार को दो सेमेस्टर (विंटर और मॉनसून 2026) के लिए रस्टिकेट कर दिया।

यूनियन का विरोध

स्टूडेंट्स यूनियन का कहना है कि यह कार्रवाई सीधे यूनियन और छात्र लोकतंत्र पर हमला है। रस्टिकेशन के साथ ही सभी पर कैंपस में प्रवेश पर रोक लगाई गई है और प्रत्येक छात्र को 10 दिन के भीतर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना जमा करना पड़ रहा है। कुछ छात्रों पर 19-19 हजार रुपये का फाइन भी लगाया गया।

प्रदर्शन और नारेबाजी

बुधवार को स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज (SSS) के नेतृत्व में छात्रों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने क्लासों का बहिष्कार किया, चीफ प्रॉक्टर मैनुअल की प्रतिलिपि जलाई और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। छात्रों की मांग है कि रस्टिकेशन, जुर्माने और CPO मैनुअल से संबंधित सभी आदेश तुरंत वापस लिए जाएं। छात्र यूनियन ने यह भी कहा कि हड़ताल तब तक जारी रहेगी जब तक प्रशासन उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं करता।

Leave a Reply