
नई दिल्ली: आज ओटीटी और टीवी पर हॉरर शोज की कोई कमी नहीं है, लेकिन 1980 के दशक में जब मनोरंजन का एकमात्र स्रोत दूरदर्शन था, तब एक भूतिया सीरियल ने दर्शकों के दिलों में डर और रोमांच की छाप छोड़ी। यह शो था ‘किले का रहस्य’, जिसने टीवी पर हॉरर जॉनर की नींव रखी।
‘आहट’ से पहले टीवी पर डर का असली अनुभव
‘किले का रहस्य’ ने उस दौर में दर्शकों को डर और रोमांच का वास्तविक अनुभव कराया। सीमित तकनीक और संसाधनों के बावजूद इसकी कहानी, किरदार और वातावरण इतने प्रभावशाली थे कि लोग हर हफ्ते अगले एपिसोड का बेसब्री से इंतजार करते थे। यही कारण है कि आज भी इसे हॉरर शोज के शुरुआती प्रतीकों में गिना जाता है।
कहानी और प्रसारण
शो का प्रीमियर 1989 में हुआ और यह हफ्ते में केवल एक बार रात 11 बजे प्रसारित होता था। शो की कहानी एक शापित और वीरान किले के इर्द-गिर्द घूमती थी, जहां भटकती आत्माओं और अज्ञात खतरों का डर दर्शकों को बांधे रखता था। कहा जाता था कि किले में प्रवेश करने वालों की पीठ पर अदृश्य निशान बन जाते थे और अंत बेहद भयावह होता था।
इस शो में लीड रोल निभाया था पीयूष मिश्रा और वीरेंद्र सक्सेना ने। हर एपिसोड का अंत सस्पेंस और रोमांच से भरा होता था, जिससे दर्शक अगली कड़ी का इंतजार करने के लिए बेताब रहते थे।
IMDb रेटिंग और लोकप्रियता
इस शो की लोकप्रियता का अंदाजा IMDb की 8.9 रेटिंग से लगाया जा सकता है। इसकी कहानी धीरे-धीरे खुलती थी और अंत में ऐसा मोड़ आता था जिसने दर्शकों को चौंका दिया। आज भी इसे देखने वाले दर्शक इसे याद करते हैं और इसे भारतीय टीवी के हॉरर जॉनर का पथप्रदर्शक मानते हैं।
