
मुंबई: महाराष्ट्र में दिवंगत नेता अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार शनिवार को राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले चुकी हैं। उन्हें आबकारी, खेल, अल्पसंख्यक विकास और वक्फ विभाग आवंटित किए गए हैं, जबकि वित्त और योजना विभाग, जो पहले अजित पवार के पास थे, उन्हें अभी नहीं दिए गए हैं।
इस संदर्भ में जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से सवाल किया गया कि क्या एनसीपी को वित्त विभाग मिलेगा, तो उन्होंने स्पष्ट जवाब दिया कि इस बारे में कोई तत्काल निर्णय नहीं लिया गया है। फडणवीस ने कहा, “सुनेत्रा पवार के लिए इतनी बड़ी जिम्मेदारी तुरंत संभालना संभव नहीं था। बजट सत्र के बाद वित्त विभाग पर निर्णय लिया जाएगा। बजट केवल भाषण देने तक सीमित नहीं है, इसमें कई विभागीय बैठकें शामिल होती हैं। मैंने एनसीपी नेताओं से इस विषय पर बात की थी और मैं राज्य का बजट पेश करूंगा।”
विलय पर सीएम ने रखी शर्त
मुख्यमंत्री फडणवीस ने एनसीपी के संभावित विलय पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि दिवंगत अजित पवार ने उनके साथ इस विषय में कोई चर्चा नहीं की थी। यदि ऐसा होता, तो उन्हें अवश्य जानकारी दी जाती। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि एनसीपी अजित पवार गुट के विलय का निर्णय लेती है, तो उससे पहले बीजेपी से परामर्श करना आवश्यक होगा।
फडणवीस ने कहा, “एनसीपी एक स्वतंत्र पार्टी है और अपने फैसले स्वयं लेती है, लेकिन हमारी सहयोगी होने के नाते, उससे आगे बढ़ने से पहले हमसे चर्चा करने की अपेक्षा की जाती है।”
शरद पवार खेमे का दावा और असमंजस
एनसीपी के शरद पवार गुट ने दावा किया था कि अजित पवार ने दोनों गुटों के विलय के लिए 12 फरवरी की तारीख तय कर दी थी। लेकिन अजित पवार के निधन के कारण इस प्रक्रिया में अब बाधा आ सकती है। 17 जनवरी को अजित पवार और शरद पवार के बीच हुई बैठक का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि विलय की बातचीत अंतिम चरण में होती, तो अजित पवार उन्हें अवश्य बताते। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या एनसीपी हमारी जानकारी के बिना इस प्रक्रिया को अंतिम रूप दे सकती है। फडणवीस ने यह भी साफ किया कि बीजेपी ने किसी भी गुट के विलय का विरोध नहीं किया है।