
लंदन।
विदेश में काम कर रहे भारतीय कर्मचारियों के लिए वर्क-लाइफ बैलेंस हमेशा एक बड़ी वजह रही है। ब्रिटेन की एक टेक कंपनी में कार्यरत भारतीय महिला मोधुरा रॉय ने भारत और ब्रिटेन के वर्क-कल्चर के बीच गहरा अंतर बताते हुए कहा कि वहां कर्मचारियों की सेहत और जीवन को प्राथमिकता दी जाती है।
मोधुरा रॉय ने मनीकंट्रोल को बताया, “ब्रिटेन में नौकरी को जीवन का एक हिस्सा माना जाता है, न कि हर घंटे किए जाने वाले काम के रूप में। यहां हेल्थ, फिटनेस, छुट्टियां और परिवार के साथ समय बिताने पर ज्यादा फोकस रहता है। इस अप्रोच की वजह से मैं ऑफिस और घर दोनों जगह बेहतर ढंग से जीवन जी पा रही हूं।”
काम की क्वालिटी पर जोर
कोलकाता और पुणे में 7.5 साल काम करने के बाद मार्च 2020 में लंदन आईं मोधुरा ने कहा कि ब्रिटिश और ऑस्ट्रेलियाई मैनेजर्स काम की क्वालिटी, प्रोफेशनल विकास और क्लाइंट वैल्यू पर अधिक ध्यान देते हैं। उन्होंने कहा, “भारतीय मैनेजर्स का फोकस अक्सर सेल्स बढ़ाने और अधिक लाभ कमाने पर होता है, जबकि यहां सीनियर्स अपस्किलिंग और बेहतर आउटपुट पर जोर देते हैं।”
छुट्टियों के लिए प्रोत्साहन
मोधुरा ने बताया कि ब्रिटेन में मैनेजर्स खुद कर्मचारियों को छुट्टी लेने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। “पिछले पांच सालों में मुझे कभी भी वीकेंड में काम करने या छुट्टी की वजह बताने के लिए दबाव नहीं डाला गया। यहां छुट्टी लेना सामान्य और प्रोत्साहित करने वाला व्यवहार है।” उन्होंने कहा कि भारत में उनका अनुभव इसके बिल्कुल उलट रहा है, जहां अधिकतम काम निकलवाना और मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी करना आम बात है।
मोधुरा का अनुभव यह दर्शाता है कि ब्रिटेन जैसे देशों में नौकरी का मतलब सिर्फ कार्य करना नहीं, बल्कि जीवन और काम के बीच संतुलन बनाए रखना भी है।