
नई दिल्ली, 20 जनवरी 2026 – भारतीय जनता पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को लेकर सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि क्या पार्टी उन्हें राज्यसभा भेजेगी या वे फिलहाल बिहार विधानसभा के सदस्य बने रहेंगे। उनकी ताजपोशी के साथ ही यह सवाल उठने लगा है कि बढ़ी हुई राष्ट्रीय जिम्मेदारियों को देखते हुए क्या उच्च सदन में उनकी मौजूदगी पार्टी के लिए जरूरी होगी।
हालांकि, भाजपा के इतिहास और अंदरूनी संकेत इन अटकलों पर फिलहाल ब्रेक लगाते नजर आ रहे हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, नितिन नबीन के इतनी जल्दी विधायक पद से इस्तीफा देने की संभावना कम है।
राष्ट्रीय राजनीति में नई भूमिका
नितिन नबीन अब भाजपा के बड़े राष्ट्रीय चेहरों में शामिल हो चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सार्वजनिक मंच से उन्हें अपना ‘बॉस’ बताते हुए पार्टी कार्यकर्ता के रूप में स्वयं को प्रस्तुत किया। ऐसे में यह स्वाभाविक है कि यह चर्चा हो कि नितिन नबीन राज्यसभा के जरिए केंद्रीय राजनीति में प्रवेश करेंगे या अभी पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से विधायक बने रहेंगे।
राज्यसभा की कई सीटें होंगी खाली
इस वर्ष राज्यसभा की लगभग 71 सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें से करीब 30 सीटें फिलहाल भाजपा के पास हैं। हाल के वर्षों में विधानसभा चुनावों में पार्टी के शानदार प्रदर्शन के चलते भाजपा के पास यह अवसर है कि वह कम से कम 33 नेताओं को राज्यसभा भेज सके।
पार्टी से जुड़े कुछ सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नबीन को नई दिल्ली के लुटियंस जोन में सरकारी आवास भी आवंटित हो चुका है, जिससे यह संकेत भी निकाले जा रहे हैं कि वे भविष्य में उच्च सदन में नजर आ सकते हैं।
बिहार से अभी नहीं खाली हो रही सीट
एक अहम तथ्य यह भी है कि फिलहाल बिहार से राज्यसभा की कोई सीट खाली नहीं हो रही है। हालांकि, जून महीने में झारखंड से एक सीट रिक्त होगी और संयोग से नितिन नबीन का जन्म भी रांची में हुआ था। इसके बावजूद, पार्टी सूत्रों का मानना है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते उनके लिए यह जरूरी नहीं कि वे राज्यसभा जाने के लिए केवल बिहार या झारखंड पर ही निर्भर रहें।
क्या छोड़ेंगे बांकीपुर की विधायकी?
नितिन नबीन ने पिछले साल नवंबर में पटना की बांकीपुर सीट से पांचवीं बार भारी बहुमत (51,936 वोटों) से जीत दर्ज की थी। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या वे इतनी जल्दी अपनी विधायकी छोड़ेंगे।
पटना और दिल्ली में पार्टी नेताओं से बातचीत में अधिकांश ने फिलहाल उनके राज्यसभा जाने की संभावना से इनकार किया है। पटना के एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा,
“नितिन नबीन अब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उन्हें क्या करना है, यह तो वही तय करेंगे। लेकिन इसके लिए विधायक पद से इस्तीफा देना जरूरी नहीं है। गडकरी जी ने भी अपने अध्यक्ष कार्यकाल में विधायकी नहीं छोड़ी थी।”
गडकरी का उदाहरण
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी 2010 से 2013 तक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे थे। इस दौरान वे 1989 से 2014 तक लगातार महाराष्ट्र विधान परिषद (एमएलसी) के सदस्य भी रहे। 2014 में लोकसभा चुनाव जीतने के बाद ही उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता छोड़ी थी।
‘जल्दबाजी नहीं है’
दिल्ली के एक भाजपा नेता ने भी कहा,
“इसमें कोई जल्दबाजी नहीं है। समय आने पर नितिन नबीन राज्यसभा जा सकते हैं और इसमें कोई दिक्कत नहीं होगी। लेकिन इतनी जल्दी विधायक पद छोड़ने की संभावना नहीं है, क्योंकि नए अध्यक्ष को अभी आने वाले विधानसभा चुनावों पर फोकस करना है।”