
नई दिल्ली, 20 जनवरी 2026 – भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल आज 81 वर्ष के हो गए। खुफिया अभियानों से लेकर आतंकवाद विरोधी ऑपरेशनों और रणनीतिक कूटनीति तक, राष्ट्रीय सुरक्षा के हर मोर्चे पर निर्णायक भूमिका निभाने वाले डोभाल को देश में ‘भारत का जेम्स बॉन्ड’ कहा जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेहद भरोसेमंद माने जाने वाले इस सुरक्षा रणनीतिकार का जीवन साहस, गोपनीय अभियानों और राष्ट्रसेवा की मिसाल है।
सैन्य पृष्ठभूमि से शीर्ष रणनीतिकार तक
उत्तराखंड में जन्मे अजीत डोभाल एक सैन्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता भारतीय सेना में अधिकारी थे, जबकि उनकी मां उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा की चचेरी बहन थीं। आगरा विश्वविद्यालय से शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की और 1968 में केरल कैडर के आईपीएस अधिकारी बने।
केरल के थालास्सेरी में एएसपी के रूप में पोस्टिंग के दौरान दो समुदायों के बीच हुए दंगों को शांत कराने में उनके सख्त और सूझबूझ भरे कदमों ने उन्हें चर्चा में ला दिया।
खुफिया दुनिया में एंट्री और पाकिस्तान मिशन
1972 में अजीत डोभाल इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने भारत की सुरक्षा रणनीतियों को नया आकार देने में अहम भूमिका निभाई। रिपोर्टों के मुताबिक, 1980 के दशक में वे रॉ (RAW) एजेंट बनकर पाकिस्तान गए और करीब छह वर्षों तक वहां रहकर बेहद संवेदनशील जानकारियां भारत भेजते रहे। इसी साहसिक खुफिया अभियान के चलते उन्हें ‘जेम्स बॉन्ड’ की उपाधि मिली।
कीर्ति चक्र से सम्मानित पहले पुलिस अधिकारी
अजीत डोभाल असाधारण सेवा के लिए भारत के दूसरे सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार ‘कीर्ति चक्र’ से सम्मानित होने वाले पहले पुलिस अधिकारी हैं। यह सम्मान उनके अद्वितीय साहस और रणनीतिक कुशलता का प्रमाण है।
आतंकवाद विरोधी अभियानों में निर्णायक भूमिका
डोभाल ने 1988 में पंजाब में खालिस्तानी आतंकवादियों के खिलाफ ‘ऑपरेशन ब्लैक थंडर’ की कमान संभाली और इसे सफलतापूर्वक अंजाम तक पहुंचाया।
उन्होंने 1999 में एयर इंडिया की फ्लाइट IC-814 के अपहरण कांड के दौरान यात्रियों की रिहाई में भी अहम भूमिका निभाई।
2004 से 2005 तक वे इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक रहे और खुफिया तंत्र को और मजबूत किया।
NSA के रूप में ऐतिहासिक फैसले
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनने के बाद अजीत डोभाल ने कई बड़े अभियानों की रणनीति तैयार की।
2016 की सर्जिकल स्ट्राइक
2019 का बालाकोट एयर स्ट्राइक
इराक में फंसी 546 भारतीय नर्सों की सुरक्षित वापसी
भारत-चीन डोकलाम गतिरोध का शांतिपूर्ण समाधान
इन सभी अभियानों में उनकी भूमिका निर्णायक रही।
राष्ट्र की सुरक्षा का मजबूत स्तंभ
पाकिस्तान में खुफिया मिशन, उच्च स्तरीय कूटनीति और आतंकवाद के खिलाफ कठोर रुख के कारण अजीत डोभाल को भारत की सुरक्षा नीति का ‘मास्टरमाइंड’ माना जाता है। 81 वर्ष की उम्र में भी वे देश की सुरक्षा रणनीति के केंद्र में हैं और उनके अनुभव व निर्णय क्षमता को भारत की सबसे बड़ी ताकतों में गिना जाता है।