
मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा-वृंदावन स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर से जुड़ी संपत्ति की खोज को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। हाल ही में राजस्थान के कोटा जिले में मंदिर की लगभग 15 हेक्टेयर जमीन का पता चला है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित मंदिर की हाई पावर्ड कमेटी ने न केवल इस जमीन का पता लगाया, बल्कि स्थानीय प्रशासन से इसके मूल दस्तावेज भी प्राप्त कर लिए हैं।
देशभर में संपत्तियों की खोज होगी
हाई पावर्ड कमेटी के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायाधीश अशोक कुमार ने बताया कि अब मंदिर की अन्य संपत्तियों की तलाश देशभर के अलग-अलग राज्यों में की जाएगी। इसके लिए राज्यों के मुख्य सचिवों और शीर्ष अधिकारियों से सहयोग लिया जाएगा। यह कदम उन जमीनों और संपत्तियों का पता लगाने के लिए उठाया जा रहा है, जो कागजों में मंदिर के नाम पर दर्ज हैं लेकिन अभी तक प्रबंधन के नियंत्रण में नहीं हैं।
इतिहास में मंदिर की संपत्तियां
इतिहासकारों और प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, बांके बिहारी मंदिर की संपत्तियां विभाजन से पहले के संयुक्त भारत में भी थीं, जिनमें पाकिस्तान के मुल्तान, सियालकोट और सिंध क्षेत्रों में मंदिर से जुड़ी हवेलियां और भूमि शामिल हैं। प्रामाणिक ग्रंथों जैसे ‘श्रीस्वामी हरिदास अभिनंदन ग्रंथ’ और ‘केलिमालजु’ में इन संपत्तियों का उल्लेख मिलता है।
महाराजों और सम्राटों का योगदान
मुगल सम्राट अकबर ने 1594 में मंदिर को 25 बीघा जमीन भेंट की थी। जयपुर के सवाई मानसिंह ने 1592 में 3 एकड़ जमीन अर्पित की। इसके अलावा ग्वालियर, भरतपुर और करौली की रियासतों ने भी मंदिर को भूमि और आभूषण दान किए।
हाई पावर्ड कमेटी का मानना है कि इस पहल से मंदिर की सभी संपत्तियों का ट्रैक और उनका संरक्षण सुनिश्चित किया जा सकेगा।